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India Plastic Notes: भारत में अब कागज़ नहीं, प्लास्टिक के होंगे नोट! जानिए एक नोट छापने में कितना आता है खर्च

India Plastic Notes: भारत में अब कागज़ नहीं, प्लास्टिक के होंगे नोट! जानिए एक नोट छापने में कितना आता है खर्च

India Plastic Notes: भारत में जल्द ही आपकी जेब में रखे नोटों का रूप पूरी तरह बदल सकता है. भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीआई अब पारंपरिक कागजी नोटों की जगह प्लास्टिक या पॉलीमर नोट लाने की तैयारी में जुटा है. बताया जा रहा है कि पटना और मुंबई में हुई आरबीआई बोर्ड की हालिया बैठकों में इस प्रस्ताव पर गंभीर चर्चा हुई है. बढ़ती छपाई लागत, तेजी से खराब होते नोट और कैश की लगातार बढ़ती मांग को देखते हुए अब देश में नई करेंसी व्यवस्था की ओर कदम बढ़ाए जा रहे हैं.अगर सबकुछ योजना के मुताबिक रहा तो आने वाले समय में भारत में पॉलीमर नोटों का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जा सकता है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि आखिर एक नोट छापने में कितना खर्च आता है और प्लास्टिक के नोट कितने महंगे पड़ सकते हैं?

एक कागजी नोट छापने में कितना खर्च होता है?

भारत में हर नोट की छपाई लागत अलग-अलग होती है. नोट की कीमत जितनी बड़ी होती है, उसमें सुरक्षा फीचर्स भी उतने ही ज्यादा होते हैं और इसी वजह से उसकी प्रोडक्शन लागत भी बढ़ जाती है.मौजूदा समय में ₹10 का नोट छापने में करीब ₹1.01 का खर्च आता है. वहीं ₹20 के नोट की छपाई लागत लगभग ₹1 प्रति नोट मानी जाती है. ₹50 का नोट तैयार करने में करीब ₹1.22 खर्च होते हैं. बात अगर ₹100 के नोट की करें तो इसकी लागत सुरक्षा फीचर्स और प्रिंटिंग तकनीक के आधार पर ₹1.20 से ₹1.51 के बीच पहुंच जाती है.₹200 का नोट फिलहाल सबसे महंगे कागजी नोटों में गिना जाता है. इसे छापने में करीब ₹2.93 प्रति नोट का खर्च आता है. वहीं ₹500 के नोट की प्रिंटिंग लागत हालिया बदलावों के बाद लगभग ₹2.29 प्रति नोट बताई जाती है.

India Plastic Notes: आखिर क्या होते हैं पॉलीमर नोट?

पॉलीमर नोट साधारण कपास आधारित कागज से नहीं बनते. इन्हें खास तरह के पॉलिप्रोपाइलीन प्लास्टिक सबस्ट्रेट से तैयार किया जाता है. यही वजह है कि ये नोट ज्यादा मजबूत, टिकाऊ और सुरक्षित माने जाते हैं.इन नोटों में पारदर्शी विंडो, होलोग्राम, एडवांस सिक्योरिटी लेयर और नकली नोटों को रोकने वाले कई आधुनिक फीचर्स मौजूद होते हैं. दुनिया के कई देशों में पहले से ही पॉलीमर नोट इस्तेमाल किए जा रहे हैं और वहां इनकी सफलता भी देखने को मिली है.

India Plastic Notes: प्लास्टिक के नोट छापने में कितना आएगा खर्च?

विशेषज्ञों के मुताबिक पॉलीमर नोटों की शुरुआती लागत कागजी नोटों की तुलना में लगभग 2 से 3 गुना ज्यादा हो सकती है. यानी अगर अभी किसी कागजी नोट को छापने में ₹1 से ₹3 तक खर्च आता है तो उसी कीमत के पॉलीमर नोट को तैयार करने में शुरुआत में करीब ₹2 से ₹6 तक का खर्च हो सकता है.हालांकि शुरुआती लागत ज्यादा जरूर है, लेकिन लंबे समय में ये नोट सरकार और आरबीआई के लिए फायदे का सौदा साबित हो सकते हैं क्योंकि इन्हें बार-बार बदलने की जरूरत नहीं पड़ेगी.

आरबीआई आखिर क्यों लाना चाहता है प्लास्टिक नोट?

भारत में करेंसी नोटों का इस्तेमाल बेहद ज्यादा होता है. लगातार हाथों में आने-जाने, नमी, धूल, गंदगी, मोड़ने और खराब रखरखाव की वजह से कागजी नोट बहुत जल्दी खराब हो जाते हैं. यही कारण है कि हर साल बड़ी संख्या में पुराने नोटों को बाजार से हटाना पड़ता है.सिर्फ वित्त वर्ष 2025 में ही करीब 23.80 अरब खराब और गंदे नोट वापस लेकर नष्ट किए गए. यह प्रक्रिया बेहद महंगी और समय लेने वाली होती है.इसके उलट पॉलीमर नोट पानी से खराब नहीं होते, आसानी से फटते नहीं और सामान्य कागजी नोटों की तुलना में 4 से 5 गुना ज्यादा चलते हैं. यही वजह है कि आरबीआई अब इन्हें भविष्य की करेंसी के रूप में देख रहा है.अगर भारत में पॉलीमर नोट पूरी तरह लागू होते हैं तो आने वाले वर्षों में देश की करेंसी पहले से ज्यादा सुरक्षित, टिकाऊ और आधुनिक हो सकती है. इससे नकली नोटों पर रोक लगाने में भी बड़ी मदद मिलेगी और बार-बार नोट छापने का खर्च भी कम हो सकता है.अब देखना दिलचस्प होगा कि आरबीआई कब इस नई करेंसी व्यवस्था को जमीन पर उतारता है और भारतीयों की जेब में प्लास्टिक के नोट कब तक पहुंचते हैं.

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