Bangladesh PM: जिस दिन बांग्लादेश में तारिक रहमान चुनाव जीतकर प्रधानमंत्री बने, उसी दिन भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत आने का निमंत्रण तारिक रहमान को दिया। लेकिन लगता है चीन की ओर से आये निमंत्रण को वह ज्यादा तरजीह दे रहे हैं। उसका कारण है, पहले उन्होंने चीन की यात्रा करने का मन बनाया था, पर उससे भी फिलहाल कन्नी काट गये। अब उनकी प्रधानमंत्री बनने के बाद पहली विदेश यात्रा मलेशिया की होने जा रही है। चीन जाने से पहले जून 21 और 22 को बांग्लादेश के प्रधानमंत्री मलेशिया को दौरा करने जा रहे हैं। मलेशिया के प्रधानमंत्री अनबर इब्राहीम ने अप्रैल में ही प्रधानमंत्री तारिक अनवर को मलेशिया आने का न्यौता दिया था। निमंत्रण स्वीकार करने की कूटनीति में पड़ौसी देशों के साथ तालमेल बनाने की कोशिश में यह यात्रा देखी जा रही है।
अच्छे रिश्तों की जरूरत
लगता है भारत के साथ वह संबध बांग्लादेश नहीं रखना चहता है, जो संबाध उस समय के थे, जब बांग्लादेश का जन्म हुआ थ। एक शिशु की भांति भारत ने बांग्लादेश के जन्म में साथ दिया था। उन घटनाओं को पिछले सप्ताह भारत ने तारिक के पिता पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान के उन भाषणों को याद दिलाया था, जिसमें उन्होंने भारत का बांग्लादेश बनवाने में आभार प्रकट किया था। वह एक ऐसा ऐतिहासिक दस्तावेज है, जो भारत की भूमिका को बताता है। लेकिन इसके बावजूद तारिक रहमान पहले मलेशिया और चीन को खुश करना चाहता है। लगता है शेख हसीना को भारत का संरक्षण देना, उसके मनमुटाव का कारण हो। लेकिन उसे यह नहीं भूलना चाहिए की शेख हसीना के पिता मुजीबुर्ररहमान ही वह योद्धा थे, जो बांग्लादेश की आजादी के लिए आगे आये थे। शेख मुजीब और उसके परिवार को तब भी भारत ने संरक्षण दिया था, जब वह स्वतंत्र बांग्ला के लिए लड़ रहे थे।
आज बांग्लादेश की विश्व पटल पर अपनी छवि हो गई है। बांग्लादेश के विदेशमंत्री खलिलुर रहमान ने साइप्रस के एंडियास काकोरी को हराकर संयुक्तराष्ट्र संघ की आम सभा में एक वर्ष के लिए 81 वें अध्यक्ष चुने गये। यह बांग्लादेश की अंतर्राष्ट्रीय पटल पर शाख बन गई है। ऐसी स्थिति में भारत को अपने हाथ से बांग्लादेश को नहीं जाने देना चाहिए। पाकिस्तान जिससे बांग्लादेश विभक्त हुआ, उसे वह अपने करीब लाने की कोशिश कर रहा है।
Bangladesh PM: नेपाल भी भारत के साथ सीमा विवाद पर
वैसे विदेश नीति में न कोई स्थाई मित्र होता है, और न कोई स्थाई शत्रु। नेपाल भी भारत के साथ सीमाओं का मामला उछालने की कोशिश कर रहा है, वह ब्रिटेन को भारत-नेपाल सीमाओं को सुनिश्चित करने के लिए मध्यस्थता की भूमिका के लिए आमंत्रित कर रहा है। इस पर भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर का सही जवाब था। जयशंकर ने ब्रिटेन की मध्यस्थता स्वीकार करने के लिए सख्त मना कर दिया। सीमाओं का निर्धारण सिर्फ आपसी तालमेल के आधार पर होना चाहिए; तभी शांति की उम्मीद की जा सकती है। सीमा विवाद चीन से भी हमारा है। पाकिस्तान ने तो भारत के कश्मीर क्षेत्र को हथिया रखा है। उस पर भी टेबल पर बातचीत होनी चाहिए। सीमा निर्धारण न होने के कारण पाकिस्तान हर बार लड़ाई के लिए तैयार रहता है। इसका निराकरण भी होना आवश्यक है।
लेखक: भगवती प्रसाद डोभाल
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