CJP Protest: शिक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं के खिलाफ दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने केंद्र सरकार को सात दिन का अल्टीमेटम दिया है। संगठन के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा है कि यदि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से नहीं हटाया गया या उन्होंने इस्तीफा नहीं दिया, तो आंदोलन को देशव्यापी स्वरूप दिया जाएगा।
प्रदर्शन को बताया ऐतिहासिक और शांतिपूर्ण
प्रदर्शन के बाद जारी बयान में दीपके ने जंतर-मंतर पर हुए कार्यक्रम को ऐतिहासिक और पूरी तरह शांतिपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में छात्र, युवा और आम नागरिक इस आंदोलन से जुड़े, जिनमें कई ऐसे लोग भी शामिल थे जिन्होंने पहली बार किसी जन आंदोलन में भाग लिया। उनके अनुसार यह केवल शुरुआत है और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर जवाबदेही तय होने तक संघर्ष जारी रहेगा।
CJP Protest: सरकार को सात दिन की चेतावनी
अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया कि शिक्षा व्यवस्था की खामियों का खामियाजा एक पूरी पीढ़ी को भुगतना पड़ा है। उन्होंने कहा कि सरकार के पास सात दिन का समय है। यदि इस अवधि में कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो CJP देशभर में व्यापक जनसंपर्क अभियान और विरोध प्रदर्शन शुरू करेगी। उन्होंने यह भी बताया कि आंदोलन की अगली रणनीति को लेकर वह सोशल मीडिया के माध्यम से समर्थकों को संबोधित करेंगे।
देशव्यापी आंदोलन की तैयारी
CJP के प्रवक्ता आशीष रांका ने भी सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान या तो स्वयं इस्तीफा दें या प्रधानमंत्री उन्हें पद से हटाएं। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर से शुरू हुआ यह आंदोलन अब शिक्षा सुधार, पारदर्शिता और जवाबदेही की राष्ट्रीय मांग का रूप ले चुका है।
CJP Protest: बीजेपी का पलटवार
वहीं, भारतीय जनता पार्टी ने आंदोलन पर पलटवार किया है। भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने कहा कि कुछ लोग विदेश में बैठकर भारत के युवाओं को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन ऐसे प्रयास सफल नहीं होंगे। उन्होंने भरोसा जताया कि देश का युवा तथ्यों और विकास के आधार पर अपना निर्णय लेगा।
अगले सात दिनों पर टिकी निगाहें
जंतर-मंतर पर आयोजित इस प्रदर्शन में छात्रों, युवाओं और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया था। अब सबकी निगाहें अगले सात दिनों पर टिकी हैं। यदि सरकार की ओर से कोई कार्रवाई नहीं होती है, तो CJP देशव्यापी आंदोलन की दिशा में कदम बढ़ा सकती है, जिससे शिक्षा व्यवस्था को लेकर शुरू हुई यह बहस और व्यापक हो सकती है।








