Cyber fraud: सोशल मीडिया पर बिना जांच-पड़ताल के किसी फोटो, वीडियो या खबर को शेयर करना अब महंगा पड़ सकता है। फेक न्यूज, भ्रामक जानकारी और डीपफेक कंटेंट पर लगाम लगाने के लिए सख्त नियम लागू किए गए हैं। ऐसे मामलों में यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर गलत जानकारी फैलाता है, तो उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के साथ कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।
क्राइम ब्रांच डीसीपी ने जारी की चेतावनी
इंदौर क्राइम ब्रांच के डीसीपी राजेश डंडोतिया ने एक वीडियो संदेश जारी कर लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर गलत या अपुष्ट जानकारी साझा करना गंभीर परिणाम ला सकता है। कंटेंट क्रिएटर्स, ब्लॉगर और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स की जिम्मेदारी है कि वे किसी भी पोस्ट या वीडियो को शेयर करने से पहले उसकी सच्चाई की जांच करें।
Cyber fraud: फॉलोअर्स को फेक कंटेंट नहीं, सही जानकारी दें
डीसीपी ने कहा कि किसी भी कंटेंट क्रिएटर के फॉलोअर्स उसके परिवार की तरह होते हैं, इसलिए उन्हें भ्रामक या फर्जी जानकारी नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी खबर, फोटो या वीडियो को शेयर करने से पहले उसका फैक्ट चेक और सत्यापन जरूर करें। उन्होंने “फॉलोअर्स, फैमिली, फैक्ट चेक और नो फेक कंटेंट” का संदेश देते हुए जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया।
Cyber fraud: फेक न्यूज और डीपफेक पर क्या हैं नए नियम?
नए नियमों के मुताबिक, सरकारी या न्यायालय के निर्देश मिलने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को भ्रामक या डीपफेक कंटेंट को तय समय सीमा के भीतर हटाना होगा। इसके अलावा AI की मदद से तैयार किए गए कंटेंट पर स्पष्ट लेबल लगाना भी जरूरी होगा। जानबूझकर फर्जी खबर फैलाने वालों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और आईटी कानूनों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
कंटेंट क्रिएटर्स की बढ़ी जिम्मेदारी
Cyber fraud: डिजिटल दौर में जानकारी तेजी से फैलती है, इसलिए कंटेंट क्रिएटर्स की जिम्मेदारी भी बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी जानकारी को पोस्ट करने से पहले उसकी पुष्टि करना बेहद जरूरी है। इससे न केवल फेक न्यूज पर रोक लगेगी, बल्कि लोगों तक सही और विश्वसनीय जानकारी भी पहुंचेगी।
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