Bihar news: बिहार के मुजफ्फरपुर से सरकारी लापरवाही का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक 75 वर्षीय वृद्ध महिला को सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित कर दिया गया, जबकि वह पूरी तरह जीवित हैं। इस गलती की वजह से उनकी वृद्धा पेंशन भी कई महीनों से बंद हो गई है। अपनी पहचान और अस्तित्व साबित करने के लिए महिला लगातार सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं।
क्या है पूरा मामला?
ब्रह्मपुरा थाना क्षेत्र के संजय सिनेमा रोड निवासी 75 वर्षीय विधवा पवितर देवी को अचानक पेंशन मिलनी बंद हो गई। जांच करने पर उन्हें पता चला कि सरकारी रिकॉर्ड में उन्हें मृत घोषित कर दिया गया है। इसके बाद से वह लगातार अधिकारियों के सामने यह साबित करने की कोशिश कर रही हैं कि वह जीवित हैं।
Bihar news: पेंशन बंद होने से बढ़ी मुश्किलें
पवितर देवी का कहना है कि पिछले तीन-चार महीनों से उन्हें पेंशन नहीं मिली है। उम्र के इस पड़ाव पर पेंशन ही उनके जीवनयापन का प्रमुख सहारा है। उन्होंने बताया कि सरकारी दफ्तरों के कई चक्कर लगाने के बावजूद अब तक उनकी समस्या का समाधान नहीं हो सका है।
Bihar news: लोग कहने लगे ‘जिंदा भूत’
वृद्ध महिला ने अपनी पीड़ा बताते हुए कहा कि रिकॉर्ड में मृत घोषित किए जाने के कारण लोग अब उन्हें मजाक में ‘जिंदा भूत’ कहने लगे हैं। इससे उन्हें मानसिक रूप से भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
मानवाधिकार आयोग में दायर की गई याचिका
सरकारी उदासीनता से परेशान होकर पवितर देवी ने मानवाधिकार अधिवक्ता एस.के. झा की मदद से राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और बिहार राज्य मानवाधिकार आयोग में याचिका दायर की है। याचिका में उन्होंने कहा है कि वह जीवित हैं, लेकिन सरकारी गलती के कारण उन्हें लगातार प्रताड़ना झेलनी पड़ रही है और पेंशन से भी वंचित होना पड़ रहा है।
अधिवक्ता बोले- मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन
Bihar news: मानवाधिकार अधिवक्ता एस.के. झा ने इस मामले को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि किसी जीवित व्यक्ति को मृत घोषित कर उसकी पेंशन रोक देना मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन है। उन्होंने बताया कि मामले की शिकायत राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, नई दिल्ली और बिहार राज्य मानवाधिकार आयोग, पटना को भेजी गई है, ताकि पीड़ित महिला को जल्द न्याय और बकाया पेंशन मिल सके।
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