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नए भारत के निर्माण का फॉर्मूला! 12 साल पूरे होने पर पीएम मोदी का बड़ा बयान

PM MODI SANDESH: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्र सरकार में अपने नेतृत्व के 12 वर्ष पूरे होने के अवसर पर देशवासियों को विशेष संदेश दिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण के लिए समर्पण और सेवाभाव देश की सबसे बड़ी पूंजी है। प्रधानमंत्री ने कहा कि बीते 12 वर्षों में ‘सबका साथ, सबका विकास’ की भावना से किए गए निरंतर प्रयासों के कारण भारत आज एक सशक्त, समृद्ध और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

सुभाषितम के जरिए दिया राष्ट्र निर्माण का संदेश

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक संस्कृत सुभाषित साझा करते हुए राष्ट्र निर्माण में सेवा, समर्पण और लोककल्याण के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने लिखा कि देश के विकास और जनसेवा के प्रति समर्पण ही भारत की वास्तविक शक्ति है, जिसने पिछले 12 वर्षों में विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

PM MODI SANDESH: संस्कृत श्लोक का साझा किया भावार्थ

प्रधानमंत्री ने श्लोक ‘आर्यकर्मणि रज्यन्ते भूतिकर्माणि कुर्वते। हितं च नाभ्यसूयन्ति स वै पण्डित उच्यते॥’ साझा किया। इसका अर्थ बताते हुए उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति श्रेष्ठ कर्मों में लगा रहता है, लोककल्याण और उन्नति के कार्य करता है तथा दूसरों के हितकारी विचारों और कार्यों का सम्मान करता है, वही वास्तविक अर्थों में बुद्धिमान कहलाता है।

लगातार साझा कर रहे हैं सुभाषितम संदेश

प्रधानमंत्री पिछले कुछ दिनों से संस्कृत सुभाषितों के माध्यम से विभिन्न सामाजिक और सांस्कृतिक विषयों पर संदेश दे रहे हैं। 8 जून को उन्होंने प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण पर आधारित सुभाषित साझा करते हुए प्रकृति के साथ संतुलन बनाए रखने को भारतीय संस्कृति की मूल भावना बताया था।

PM MODI SANDESH: पर्यावरण संरक्षण पर भी दिया था संदेश

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर 5 जून को प्रधानमंत्री ने वैदिक मंत्र साझा करते हुए कहा था कि प्रकृति का संरक्षण केवल जिम्मेदारी नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और संस्कारों का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण, नदियों, वायु और वनस्पतियों के महत्व को रेखांकित किया था।

भारतीय ज्ञान परंपरा को बढ़ावा

प्रधानमंत्री के हालिया सुभाषितम संदेशों को भारतीय ज्ञान परंपरा, सांस्कृतिक मूल्यों, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्र निर्माण की भावना को जन-जन तक पहुंचाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। 12 वर्ष पूरे होने के अवसर पर दिया गया यह संदेश सेवा, समर्पण और लोककल्याण के मूल्यों को केंद्र में रखता है।

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