UP Panchayat Election: उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 2026 की तैयारियां तेज हो गई हैं। राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायत चुनाव के लिए अंतिम मतदाता सूची जारी कर दी है। नई सूची के अनुसार प्रदेश में करीब 40.19 लाख नए मतदाता जुड़े हैं, जिससे कुल मतदाताओं की संख्या बढ़कर लगभग 12.69 करोड़ हो गई है। आयोग ने दावे और आपत्तियों के निस्तारण तथा व्यापक सत्यापन प्रक्रिया पूरी करने के बाद यह सूची प्रकाशित की है। नई मतदाता सूची को पंचायत चुनाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
40 लाख से अधिक नए मतदाता जुड़े
राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार अंतिम मतदाता सूची में करीब 1.81 करोड़ नए नाम जोड़े गए हैं, जबकि लगभग 1.41 करोड़ नाम विभिन्न कारणों से हटाए गए हैं। इस तरह कुल मिलाकर 40.19 लाख मतदाताओं की शुद्ध बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पिछली सूची की तुलना में मतदाताओं की संख्या में लगभग 3.27 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। आयोग ने प्रत्येक पंचायत मतदाता को नौ अंकों का विशिष्ट पहचान संख्या भी आवंटित की है, जिससे चुनावी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाया जा सके।
UP Panchayat Election: युवाओं और प्रवासी मतदाताओं का बढ़ा योगदान
आयोग का कहना है कि नए मतदाताओं में बड़ी संख्या उन युवाओं की है जिन्होंने हाल ही में 18 वर्ष की आयु पूरी की है। इसके अलावा बेहतर सर्वेक्षण, सत्यापन अभियान और प्रवासी मतदाताओं की वापसी के कारण भी मतदाता सूची में वृद्धि हुई है। अंतिम सूची प्रदेश के सभी जिलों में प्रकाशित कर दी गई है, ताकि मतदाता अपने नाम और विवरण की पुष्टि कर सकें। आयोग ने बताया कि अनंतिम सूची 18 दिसंबर 2025 को जारी की गई थी, जिसके बाद प्राप्त दावों और आपत्तियों का निस्तारण किया गया।
केंद्रीय संशोधन अभियान से अलग रही प्रक्रिया
राज्य निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि पंचायत चुनाव की मतदाता सूची केंद्रीय निर्वाचन आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान से अलग है। केंद्रीय स्तर पर मृत, दोहरे, स्थानांतरित और अनुपस्थित मतदाताओं के नाम हटाने पर विशेष जोर दिया गया था। वहीं पंचायत चुनाव की सूची मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों पर केंद्रित रही। इसी कारण राज्य स्तर की प्रक्रिया अपेक्षाकृत कम कठोर रही और मतदाताओं की संख्या में शुद्ध बढ़ोतरी देखने को मिली। दोनों प्रक्रियाओं में क्षेत्रीय स्तर के अधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
UP Panchayat Election: चुनाव की तारीख का इंतजार, आरक्षण पर भी काम जारी
हालांकि पंचायत चुनाव की तारीखों का अभी आधिकारिक ऐलान नहीं किया गया है। प्रदेश के ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 26 मई को समाप्त हो चुका है। चुनाव समय पर नहीं हो पाने के कारण राज्य सरकार ने मौजूदा प्रधानों को अगले छह महीने तक प्रशासक के रूप में जिम्मेदारी संभालने की अनुमति दी है। वहीं पंचायत चुनाव में अन्य पिछड़ा वर्ग आरक्षण को लेकर सरकार ने पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन किया है। आयोग की रिपोर्ट के आधार पर आरक्षण व्यवस्था तय की जाएगी, जिसके बाद चुनाव कार्यक्रम घोषित होने की संभावना है। प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां भी तेज हो रही हैं और अंतिम मतदाता सूची जारी होने के साथ चुनावी प्रक्रिया ने एक महत्वपूर्ण पड़ाव पार कर लिया है।
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