Paper Leak: देशभर में भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ियों, प्रश्नपत्र लीक और तकनीकी खामियों को लेकर युवाओं का आक्रोश लगातार बढ़ रहा है। इसी बीच मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (ESB) द्वारा आयोजित भर्ती परीक्षाओं को लेकर भी विवाद गहराता नजर आ रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) ने परीक्षाओं में सामने आई कथित अनियमितताओं और तकनीकी विफलताओं को गंभीर बताते हुए पूरे मामले की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) अथवा विशेष जांच दल (SIT) से जांच कराने की मांग की है। उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं।
दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को भेजे पत्र में कहा है कि भर्ती परीक्षाओं से जुड़ी शिकायतों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि बेरोजगार युवाओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने उनसे मुलाकात कर परीक्षा संचालन में खामियों और निविदा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जानकारी दी है। दिग्विजय सिंह का कहना है कि लाखों युवाओं के भविष्य से जुड़े मामले में निष्पक्ष जांच जरूरी है।
Paper Leak: टेंडर प्रक्रिया पर उठे गंभीर सवाल
युवाओं द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों के आधार पर दिग्विजय सिंह ने दावा किया कि वर्ष 2023 और 2024 में परीक्षा संचालन के लिए जारी निविदाओं (टेंडरों) में कई कंपनियों को तकनीकी रूप से पात्र घोषित किया गया था, लेकिन बाद में दोनों निविदाएं निरस्त कर दी गईं। इसके बाद नई शर्तों के साथ जारी प्रक्रिया में एक कंपनी को कार्य दिए जाने से सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने आशंका जताई कि निविदा प्रक्रिया में बदलाव किसी विशेष कंपनी को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से किया गया हो सकता है।
भर्ती परीक्षाओं को लेकर युवाओं में बढ़ रहा आक्रोश
देशभर में हाल के वर्षों में प्रश्नपत्र लीक और भर्ती प्रक्रियाओं में गड़बड़ियों के मामलों ने युवाओं का भरोसा कमजोर किया है। मध्य प्रदेश में भी तकनीकी समस्याओं और परीक्षा संचालन संबंधी शिकायतों के कारण अभ्यर्थियों को मानसिक, आर्थिक और समय की क्षति उठानी पड़ी है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में वर्षों लगाने वाले युवाओं का कहना है कि भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए।
Paper Leak: व्यापम का जिक्र, सीबीआई जांच की मांग
दिग्विजय सिंह ने कहा कि मध्य प्रदेश पहले भी व्यापम घोटाले जैसी घटनाओं के कारण राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रहा है। ऐसे में भर्ती परीक्षाओं से जुड़े किसी भी विवाद की निष्पक्ष जांच आवश्यक है। उन्होंने पूरे मामले की केंद्रीय जांच ब्यूरो अथवा उच्चस्तरीय विशेष जांच दल से जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि प्रदेश के लगभग 40 लाख बेरोजगार युवाओं का विश्वास बनाए रखने के लिए पारदर्शी भर्ती व्यवस्था सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।
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