Japan Defense Policy: करीब 80 वर्षों तक जापान की सुरक्षा नीति सैन्य शक्ति के सीमित उपयोग, हथियारों के निर्यात पर रोक और रक्षा खर्च को कम रखने जैसे सिद्धांतों पर आधारित रही। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अपनाई गई इस नीति ने जापान की शांतिवादी पहचान बनाई। अब टोक्यो धीरे-धीरे इन पुरानी बंदिशों को खत्म करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
Japan Defense Policy: युद्ध के बाद अपनाया था शांतिवाद-
1945 में द्वितीय विश्व युद्ध समाप्त होने के बाद जापान ने शांतिवादी नीति अपनाई ताकि पड़ोसी देशों को भरोसा दिलाया जा सके कि वह दोबारा सैन्य विस्तार या आक्रामकता का रास्ता नहीं अपनाएगा। इसी सोच के तहत सैन्य गतिविधियों और हथियारों पर कई प्रतिबंध लगाए गए थे।
Japan Defense Policy: रक्षा बजट और सैन्य क्षमता में हो रहा इजाफा-
हाल के वर्षों में जापान ने रक्षा बजट बढ़ाने, सैन्य क्षमताओं का विस्तार करने, हथियारों के निर्यात की अनुमति देने और नई खुफिया एजेंसी के गठन जैसे कदम उठाए हैं। देश में राष्ट्रीय सुरक्षा के संदर्भ में परमाणु हथियारों की भूमिका पर भी चर्चा शुरू हो गई है।
चीन क्यों है परेशान-
{Chin – Japan} चीन जापान की नई रक्षा नीति को केवल एक रणनीतिक बदलाव नहीं, बल्कि ऐतिहासिक दृष्टि से भी गंभीर मुद्दा मानता है। बीजिंग का कहना है कि यह बदलाव द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापान के सैन्य विस्तार और अत्याचारों की यादों को फिर से ताजा करता है।
चीन की चिंता की तीन बड़ी वजहें
चीन की चिंताओं के पीछे तीन प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं—
1. ऐतिहासिक कारण
द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापान द्वारा किए गए अत्याचार आज भी चीन और अन्य एशियाई देशों की सामूहिक स्मृति का हिस्सा हैं। ऐसे में जापान की सैन्य नीति में बदलाव को चीन पुराने सैन्यवाद की वापसी के रूप में देखता है।
2. बढ़ती सैन्य ताकत
जापान रक्षा बजट को जीडीपी के 2% तक बढ़ाने, आधुनिक सैन्य तकनीक अपनाने और जवाबी हमले की क्षमता विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इससे पूर्वी एशिया में शक्ति संतुलन बदलने की आशंका जताई जा रही है।
3. अमेरिका और सहयोगी देशों के साथ मजबूत गठबंधन
जापान अमेरिका, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन जैसे देशों के साथ रक्षा सहयोग लगातार बढ़ा रहा है। चीन को आशंका है कि किसी क्षेत्रीय संकट की स्थिति में यह गठबंधन उसके लिए बड़ी रणनीतिक चुनौती बन सकता है।
इंडो-पैसिफिक क्षेत्र पर पड़ सकता है असर-
विशेषज्ञों का मानना है कि जापान की नई रक्षा नीति का असर पूरे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था पर पड़ सकता है। यदि प्रस्तावित बदलाव पूरी तरह लागू होते हैं, तो क्षेत्रीय रणनीतिक समीकरणों में महत्वपूर्ण परिवर्तन देखने को मिल सकते हैं।
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