TMC: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के बागी सांसदों ने दिल्ली में भाजपा के पश्चिम बंगाल प्रभारी और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के आवास पर बैठक कर राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है। इस बैठक में टीएमसी की वरिष्ठ सांसद सायोनी घोष, प्रसून बनर्जी समेत कई सांसद शामिल हुए। वहीं भाजपा सांसद निशिकांत दुबे की मौजूदगी ने इस बैठक को और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया है। माना जा रहा है कि टीएमसी के भीतर चल रही खींचतान अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच सकती है।
सायोनी घोष ने साधी चुप्पी
दिल्ली पहुंचने पर सायोनी घोष ने मीडिया से बातचीत में किसी भी राजनीतिक अटकल पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि वह फिलहाल कुछ नहीं बोलेंगी और उचित समय आने पर अपनी बात रखेंगी। उल्लेखनीय है कि हाल ही में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सायोनी घोष और माला रॉय को पार्टी के संगठनात्मक पदों से हटा दिया था। सायोनी टीएमसी की युवा इकाई की अध्यक्ष थीं।
TMC: लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात की तैयारी
बागी गुट की प्रमुख सांसद काकोली घोष ने दावा किया है कि अब उनके साथ 22 लोकसभा सांसदों का समर्थन है। इससे पहले उन्होंने 20 सांसदों के समर्थन की बात कही थी और 19 सांसदों के हस्ताक्षर वाला एक पत्र भी सामने आया था। सूत्रों के अनुसार बागी सांसदों का प्रतिनिधिमंडल सोमवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर अपनी स्थिति स्पष्ट कर सकता है।
दो-तिहाई समर्थन का दावा
टीएमसी के कुल 28 लोकसभा सांसद हैं। काकोली घोष के दावे के अनुसार इनमें से 20 से अधिक सांसद बागी गुट के साथ हैं। वहीं पश्चिम बंगाल विधानसभा में पार्टी के 80 विधायकों में से 58 विधायक भी बागी खेमे का समर्थन कर रहे हैं। इसके अलावा राज्यसभा के 13 सांसदों में से 4 सांसद पार्टी छोड़ चुके हैं।
TMC: दल-बदल कानून में क्या है प्रावधान
संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत किसी राजनीतिक दल के कम से कम दो-तिहाई सांसद या विधायक यदि अलग गुट बनाते हैं या किसी अन्य दल में विलय का निर्णय लेते हैं, तो उन्हें कानूनी मान्यता मिल सकती है। हालांकि अंतिम निर्णय लोकसभा अध्यक्ष, विधानसभा अध्यक्ष या राज्यसभा के सभापति द्वारा लिया जाता है। दूसरी ओर, ममता बनर्जी का गुट इस पूरे घटनाक्रम को अदालत में चुनौती देने की तैयारी कर सकता है।
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