POJK Protest: पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) में सुरक्षा बलों की कार्रवाई में 53 लोगों की मौत के बाद जनाक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। आरोप है कि पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल Asim Munir के समर्थन से हुई कार्रवाई के बाद क्षेत्र में विरोध प्रदर्शनों ने व्यापक रूप ले लिया है।
POJK Protest:जेकेजेएएसी के नेतृत्व में तेज हुआ आंदोलन-
जम्मू-कश्मीर ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी (JKJAAC) के नेतृत्व में चल रहा आंदोलन अब और तेज हो गया है। अधिकारियों द्वारा बातचीत की पेशकश किए जाने के बावजूद संगठन ने इसे महज औपचारिकता बताते हुए खारिज कर दिया। संगठन का कहना है कि पाकिस्तान सरकार पहले भी कई आश्वासन दे चुकी है, लेकिन उन पर कभी अमल नहीं हुआ।
POJK Protest:पूर्ण नियंत्रण की तैयारी में पाकिस्तान-
भारतीय खुफिया अधिकारियों के अनुसार, इस्लामाबाद की बातचीत की पेशकश का उद्देश्य समस्या का समाधान नहीं बल्कि समय हासिल करना और अपनी शर्तें लागू करना है। अधिकारियों का दावा है कि आसिम मुनीर का लक्ष्य पीओजेके पर पूर्ण नियंत्रण स्थापित करना है।
POJK Protest:धारा 56 लागू करने पर हो रहा विचार-
सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तान ‘आज़ाद जम्मू-कश्मीर अंतरिम संविधान अधिनियम, 1974’ की धारा 56 लागू करने पर विचार कर सकता है। यदि ऐसा होता है तो पीओजेके की निर्वाचित सरकार को बर्खास्त किया जा सकेगा और विधानसभा भी भंग की जा सकती है। इससे क्षेत्र की स्थानीय सरकार की भूमिका लगभग समाप्त हो जाएगी और महत्वपूर्ण फैसले सीधे इस्लामाबाद से लिए जाएंगे।
स्व-शासित क्षेत्र की स्वायत्तता पर खतरा-
वर्तमान व्यवस्था के तहत पीओजेके एक स्व-शासित क्षेत्र है। पाकिस्तान का नियंत्रण विदेश नीति, रक्षा, सुरक्षा, मुद्रा और विदेशी व्यापार जैसे विषयों तक सीमित है, जबकि स्थानीय प्रशासन और शासन क्षेत्रीय सरकार के अधीन है। अधिकारियों का कहना है कि पाकिस्तान की कोशिश क्षेत्र की स्वायत्तता को सीमित कर विरोध प्रदर्शनों को दबाने की है।
विदेशों तक पहुंचा विरोध, बढ़ा अंतरराष्ट्रीय दबाव-
सूत्रों के अनुसार, विरोध प्रदर्शन अब केवल Muzaffarabad तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पूरे पीओजेके में फैल चुके हैं। विदेशों में रहने वाले पीओजेके मूल के लोग भी मानवाधिकार उल्लंघनों का मुद्दा उठा रहे हैं, जिससे पाकिस्तान प्रशासन पर दबाव बढ़ रहा है।
खबरें दबाने और इंटरनेट बंद करने के आरोप-
पाकिस्तान पर आंदोलन से जुड़ी खबरों को दबाने के आरोप भी लग रहे हैं। बताया जा रहा है कि कई इलाकों में इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं बाधित कर दी गई हैं। इसी बीच यूट्यूब पत्रकार Sohrab Barkat को हिरासत में लिए जाने के बाद विरोध और तेज हो गया है।
सीपीजे ने जताई चिंता, रिहाई की मांग-
पत्रकारों की सुरक्षा के लिए काम करने वाले संगठन Committee to Protect Journalists ने भी इस मामले पर चिंता जताई है। संगठन ने सोहराब बरकत की तत्काल रिहाई की मांग करते हुए प्रेस की स्वतंत्रता और पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है।
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