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योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति को चुनौती? जालौन में वन विभाग की जमीन पर अवैध खनन का खेल, NGT नियमों की उड़ रहीं धज्जियां

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UP News: उत्तर प्रदेश में अवैध खनन के खिलाफ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार सख्त रुख अपनाने की बात करते रहे हैं। समय-समय पर अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए जाते रहे हैं कि किसी भी कीमत पर अवैध खनन को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसके बावजूद जालौन जिले के मुहाना खंड संख्या-2 से सामने आई तस्वीरों और आरोपों ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारी के अनुसार, क्षेत्र में खनन पट्टे की निर्धारित सीमा से बाहर जाकर बड़े पैमाने पर अवैध खनन किए जाने के आरोप सामने आए हैं। सबसे गंभीर बात यह है कि खनन कार्य में उन हैवी मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिन पर नियमों के तहत प्रतिबंध है। स्थानीय स्तर पर सामने आई तस्वीरें और वीडियो यह संकेत दे रहे हैं कि खनन गतिविधियां निर्धारित मानकों और शर्तों से कहीं आगे बढ़ चुकी हैं।

वन विभाग की जमीन पर खनन का आरोप

मामले में सबसे चौंकाने वाला आरोप यह है कि खनन माफियाओं ने वन विभाग की भूमि तक को नहीं छोड़ा। बताया जा रहा है कि वन क्षेत्र से जुड़ी जमीन पर भी मिट्टी और खनिजों का अवैध दोहन किया जा रहा है। यदि यह आरोप सही साबित होते हैं तो यह केवल खनन नियमों का उल्लंघन नहीं बल्कि पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कानूनों की भी गंभीर अनदेखी मानी जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि वन क्षेत्र और उसके आसपास होने वाला अनियंत्रित खनन भूजल स्तर, जैव विविधता और पर्यावरणीय संतुलन पर दीर्घकालिक नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। यही कारण है कि ऐसे क्षेत्रों में खनन को लेकर सख्त नियम बनाए गए हैं और NGT भी समय-समय पर दिशा-निर्देश जारी करता रहा है।

सरकारी नियमों की अनदेखी?

स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्षेत्र में हो रहा खनन प्रदेश सरकार की नीतियों और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) द्वारा निर्धारित मानकों के विपरीत है। निर्धारित सीमा से बाहर खनन, प्रतिबंधित मशीनों का उपयोग और पर्यावरणीय शर्तों की अनदेखी जैसे आरोप इस पूरे मामले को गंभीर बनाते हैं। सूत्रों का कहना है कि खनन पट्टे की शर्तों के अनुसार सीमित क्षेत्र और निर्धारित मानकों के भीतर ही कार्य किया जा सकता है, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति कुछ और ही दिखाई दे रही है। आरोप है कि खनन माफिया नियमों को दरकिनार कर अधिक लाभ कमाने के लिए बड़े पैमाने पर अवैध गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं।

मामले में यह आरोप भी लगाए जा रहे हैं कि खनन से जुड़े कुछ तत्व प्रशासनिक तंत्र को गुमराह कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिलाधिकारी द्वारा अवैध खनन रोकने और नियमों का पालन सुनिश्चित कराने के लिए समय-समय पर निर्देश जारी किए गए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर उनका प्रभाव दिखाई नहीं दे रहा। लोगों का सवाल है कि यदि प्रशासन की ओर से निगरानी और कार्रवाई के दावे किए जा रहे हैं तो फिर इतनी बड़ी मात्रा में अवैध खनन आखिर कैसे जारी है। क्षेत्र में सक्रिय खनन गतिविधियों को देखकर यह भी सवाल उठ रहे हैं कि क्या जिम्मेदार विभागों को इसकी जानकारी नहीं है या फिर कार्रवाई के स्तर पर कहीं न कहीं चूक हो रही है।

प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी निगाहें

मुहाना खंड संख्या-2 से सामने आए आरोपों और तस्वीरों के बाद अब लोगों की निगाहें जिला प्रशासन और संबंधित विभागों की कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग तेज हो सकती है। प्रदेश सरकार लगातार अवैध खनन के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की बात करती रही है। ऐसे में जालौन का यह मामला न केवल स्थानीय प्रशासन बल्कि पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच के बाद सच्चाई क्या सामने आती है और खनन माफियाओं के खिलाफ क्या कदम उठाए जाते हैं।

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