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शहीद हुए सार्जेंट जितेंद्र शर्मा को सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई, नम आंखों से उमड़ा जनसैलाब

शहीद जितेंद्र शर्मा को सैन्य सम्मान से विदाई

Jitendra Sharma Martyrdom: असम के जोरहाट में हुए विमान हादसे में शहीद हुए भारतीय वायुसेना के सार्जेंट जितेंद्र शर्मा का पार्थिव शरीर सोमवार शाम करीब पांच बजे उनके पैतृक गांव सालपुर पहुंचा। देश की सेवा करते हुए सर्वोच्च बलिदान देने वाले इस वीर जवान को अंतिम विदाई देने के लिए हजारों लोग गांव और आसपास के क्षेत्रों से पहुंचे। पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।गांव और आसपास का इलाका “भारत माता की जय” और “जितेंद्र शर्मा अमर रहें” के नारों से गूंज उठा। हर कोई अपने वीर सपूत को श्रद्धांजलि देने के लिए उमड़ पड़ा।

शहीद जितेंद्र शर्मा को सैन्य सम्मान से विदाई
शहीद जितेंद्र शर्मा को सैन्य सम्मान से विदाई

हिंडन एयरबेस से सालपुर तक भावुक विदाई यात्रा

सोमवार दोपहर करीब एक बजे शहीद का पार्थिव शरीर गाजियाबाद स्थित हिंडन वायुसेना स्टेशन पहुंचा। वहां से सड़क मार्ग के जरिए उसे सालपुर के लिए रवाना किया गया।शाम करीब चार बजे पार्थिव शरीर यमुना एक्सप्रेसवे के टप्पल कट पर पहुंचा, जहां का दृश्य बेहद भावुक था। हजारों युवा हाथों में तिरंगा लेकर अपने शहीद भाई के स्वागत के लिए पहले से मौजूद थे। इसके बाद बड़ी संख्या में लोग बाइक, ट्रैक्टर और अन्य वाहनों के साथ शव यात्रा में शामिल हो गए।

टप्पल, जट्टारी और हजियापुर होते हुए यह यात्रा शाम करीब साढ़े पांच बजे सालपुर पहुंची। पूरे रास्ते लोगों ने अपने घरों की छतों और सड़कों के किनारे खड़े होकर पुष्पवर्षा कर शहीद को श्रद्धांजलि दी।

Jitendra Sharma Martyrdom:  शहीद जितेंद्र शर्मा को सैन्य सम्मान से विदाई
शहीद जितेंद्र शर्मा को सैन्य सम्मान से विदाई

Jitendra Sharma Martyrdom: बड़े भाई ने दी मुखाग्नि

जैसे ही शहीद का पार्थिव शरीर गांव पहुंचा, परिवार में मातम छा गया। परिजनों और महिलाओं का रो-रोकर बुरा हाल था।शाम करीब साढ़े छह बजे भारतीय वायुसेना के अधिकारियों ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर अंतिम सलामी दी। हिंडन एयरबेस से आए विंग कमांडर अतीश बरुआ के नेतृत्व में करीब 60 अधिकारियों ने शहीद को श्रद्धांजलि अर्पित की।इस दौरान वायुसेना अधिकारियों ने जितेंद्र शर्मा का पदक और राष्ट्रीय ध्वज उनके बड़े भाई रमाकांत को सौंपा। शाम करीब सात बजे बड़े भाई रमाकांत ने नम आंखों से अपने छोटे भाई को मुखाग्नि दी।

शहीद जितेंद्र शर्मा को सैन्य सम्मान से विदाई
शहीद जितेंद्र शर्मा को सैन्य सम्मान से विदाई

परिवार के सबसे छोटे और सबसे प्यारे थे जितेंद्र

जितेंद्र शर्मा अपने परिवार में सबसे छोटे थे। उनकी चार बड़ी बहनें हैं, जिनकी शादी हो चुकी है, जबकि तीन भाई हैं। वे अविवाहित थे और माता-पिता सहित पूरे परिवार के बेहद लाडले थे।असम के जोरहाट में हुए इस दुखद विमान हादसे में जितेंद्र शर्मा समेत भारतीय वायुसेना के चार जवानों ने अपने प्राणों की आहुति दी थी।

शहीद को श्रद्धांजलि देने के लिए अलीगढ़ के सांसद सतीश गौतम, जिलाधिकारी अविनाश कुमार, एसएसपी नीरज कुमार जादौन सहित कई प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।सभी ने पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी और परिवार को सांत्वना दी। सांसद सतीश गौतम ने कहा कि जितेंद्र शर्मा एक प्रतिभाशाली और युवा सैनिक थे। उनकी शहादत से क्षेत्र को ऐसी क्षति हुई है जिसकी भरपाई कभी नहीं हो सकती।

शहीद जितेंद्र शर्मा को सैन्य सम्मान से विदाई
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52 घंटे बाद मां को मिली बेटे की शहादत की खबर

दो दिनों तक मां राधेश्वरी देवी को अपने बेटे की शहादत की जानकारी नहीं दी गई थी। लेकिन जब गांव के सैकड़ों लोग पार्थिव शरीर लेने के लिए टप्पल की ओर रवाना हुए और आसपास की महिलाएं विलाप करती हुई उनके घर पहुंचीं, तब उन्हें इस दुखद खबर का पता चला।72 वर्षीय मां यह सुनते ही फूट-फूटकर रोने लगीं। वे बार-बार कहती रहीं, “मैं तेरे फोन का इंतजार करती रही, लेकिन तेरा फोन नहीं आया।”

जब बेटे का ताबूत उनके सामने लाया गया तो मां सहित बहनें और परिवार की अन्य महिलाएं दहाड़ मारकर रोने लगीं। इस हृदयविदारक दृश्य को देखकर वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं।बेटे के जाने का सदमा मां सहन नहीं कर सकीं और उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। अंतिम संस्कार की तैयारियों के बीच परिवार और ग्रामीण लगातार उन्हें संभालने में जुटे रहे।

दोस्तों की यादों में हमेशा जिंदा रहेंगे ‘जीतू’

गांव के लोगों और दोस्तों के लिए जितेंद्र सिर्फ एक सैनिक नहीं बल्कि खुशमिजाज और मिलनसार साथी थे।उनके दोस्त पीके शर्मा बताते हैं कि सभी उन्हें प्यार से “जीतू” कहते थे। हाल ही में छुट्टियों के दौरान उन्होंने दोस्तों के साथ खूब समय बिताया था। वे अक्सर कहते थे कि जल्द ही उनकी शादी होने वाली है और सभी दोस्तों को उसमें शामिल होना है।

रामकुमार डागुर ने बताया कि जितेंद्र उन्हें गुरुजी कहकर बुलाते थे। हाल की मुलाकात में उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा था कि अब वे शादी करने जा रहे हैं।राजेंद्र सिंह मास्टर ने बताया कि 3 तारीख को मंदिर पर उनसे आखिरी मुलाकात हुई थी। वहीं गांव के बुजुर्ग कांति प्रसाद शर्मा ने कहा कि जितेंद्र ने अपने गांव और क्षेत्र का नाम पूरे देश में रोशन किया है।

शहीद जितेंद्र शर्मा को सैन्य सम्मान से विदाई
शहीद जितेंद्र शर्मा को सैन्य सम्मान से विदाई

बहनों का दर्द सुनकर हर आंख हुई नम

गांव में हर तरफ शोक का माहौल था। भाई के पार्थिव शरीर के इंतजार में उनकी दो बड़ी बहनें घर से करीब 300 मीटर दूर सड़क किनारे खड़ी होकर एक-दूसरे से लिपटकर रो रही थीं।छोटी बहन ने रोते हुए बताया कि जब वह एक दिन पहले भाई को याद कर रो रही थी, तब बड़ी बहन ने उसे समझाया था कि अभी मत रो, नहीं तो मां की तबीयत और बिगड़ जाएगी।

बड़ी बहन समता देवी बार-बार यही कहती रहीं कि उन्हें सबसे ज्यादा चिंता अपनी मां की है। उन्होंने कहा कि जब भी मां को बेटे की याद आएगी, पता नहीं वह इस दुख को कैसे सह पाएंगी।उन्होंने बताया कि घर में उनकी दोनों भाभियां लगातार मां की देखभाल करती रहीं। उन्हें यह पता था कि उनका देवर अब इस दुनिया में नहीं रहा, लेकिन उन्होंने दो दिनों तक अपनी सास को इसका एहसास तक नहीं होने दिया।

राष्ट्र के लिए सर्वोच्च बलिदान

सार्जेंट जितेंद्र शर्मा ने देश की रक्षा करते हुए अपने प्राणों का बलिदान दिया। उनकी शहादत ने पूरे क्षेत्र को गर्व और गहरे दुख से भर दिया है। गांव से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों तक, हर किसी ने उन्हें नम आंखों से विदाई दी। उनका साहस, समर्पण और देशभक्ति आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करती रहेगी।

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