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अमेरिकी फेड के फैसले के बाद कीमती धातुओं में बड़ी गिरावट, चांदी 2.5% से ज्यादा टूटी

शांति समझौते और फेड के फैसले का असर

Gold Silver Price: अमेरिका और ईरान के बीच अंतरिम शांति समझौते पर हस्ताक्षर होने और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को स्थिर रखने के फैसले के बाद गुरुवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) में सोने और चांदी की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई।

चांदी में भारी बिकवाली

गुरुवार के कारोबार के दौरान एमसीएक्स पर जुलाई डिलीवरी वाली चांदी के वायदा भाव में बड़ी कमजोरी देखने को मिली। यह अपने पिछले बंद भाव 2,51,807 रुपए प्रति किलोग्राम से 2.5 प्रतिशत से अधिक गिरकर दिन के निचले स्तर 2,44,495 रुपए प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई। चांदी ने आज 2,48,000 रुपए प्रति किलोग्राम के स्तर पर कारोबार की शुरुआत की थी।

खबर लिखे जाने तक सुबह करीब 11:43 बजे जुलाई डिलीवरी वाली चांदी 7,057 रुपए यानी 2.80 प्रतिशत की गिरावट के साथ 2,44,750 रुपए प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रही थी।

Gold Silver Price:  शांति समझौते और फेड के फैसले का असर
शांति समझौते और फेड के फैसले का असर

Gold Silver Price: सोने की कीमतों में भी नरमी

वहीं, एमसीएक्स पर अगस्त डिलीवरी वाले सोने के वायदा भाव में भी गिरावट दर्ज की गई। खबर लिखे जाने तक सोना 2,378 रुपए यानी 1.55 प्रतिशत टूटकर 1,51,501 रुपए प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करता दिखाई दिया।दिन के दौरान सोना अपने पिछले बंद भाव 1,53,879 रुपए प्रति 10 ग्राम से 1.64 प्रतिशत फिसलकर 1,51,348 रुपए प्रति 10 ग्राम के निचले स्तर तक पहुंच गया।

वैश्विक स्तर पर अमेरिका और ईरान के बीच अंतरिम शांति समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद निवेशकों की धारणा में बदलाव आया, जिसका असर सोने और चांदी जैसी कीमती धातुओं की कीमतों पर देखा गया। हालांकि, फेडरल रिजर्व ने इस साल के अंत तक ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना के संकेत भी दिए हैं।

ट्रम्प और पेजेश्कियन ने किए हस्ताक्षर

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने फ्रांस में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान वर्साय पैलेस में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ रात्रिभोज के समय इस शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए। ईरान की ओर से राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए।इस समझौते के बाद वैश्विक ऊर्जा संकट में कुछ राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। ऊर्जा संकट के कारण दुनिया भर में महंगाई बढ़ने और ब्याज दरों में वृद्धि की आशंकाएं पैदा हो गई थीं।हालांकि, समझौते के बावजूद यह स्पष्ट नहीं है कि ईंधन की कीमतों में कितनी जल्दी कमी आएगी और होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही कब तक युद्ध-पूर्व स्थिति में लौट पाएगी।

फेड ने लगातार चौथी बार दरें स्थिर रखीं

फेडरल रिजर्व ने बुधवार, 17 जून को सर्वसम्मति से फैसला लेते हुए लगातार चौथी बैठक में अपनी बेंचमार्क ब्याज दर 3.5 से 3.75 प्रतिशत के दायरे में स्थिर रखी। इसके साथ ही केंद्रीय बैंक ने अक्टूबर तक मौद्रिक नीति को और सख्त करने के संकेत भी दिए हैं।विशेषज्ञों के अनुसार, ऊंची ब्याज दरें सोने और चांदी जैसी कीमती धातुओं के लिए आमतौर पर नकारात्मक मानी जाती हैं, क्योंकि इन परिसंपत्तियों पर कोई ब्याज नहीं मिलता। ऐसे में निवेशक बेहतर रिटर्न के लिए अन्य विकल्पों की ओर रुख कर सकते हैं, जिससे कीमती धातुओं की मांग और कीमतों पर दबाव बढ़ता है।

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