Donald Trump : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के छह साल पुराने बयान एक बार फिर चर्चा में हैं। हाल ही में व्हाइट हाउस में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब फॉक्स न्यूज के पत्रकार पीटर डूसी ने ट्रंप को उनका ही 2020 का ट्वीट याद दिलाया, “Iran never won a war, but never lost a negotiation!” तो ट्रंप ने मुस्कुराते हुए पूछा, “यह किसने कहा था?” जिस पर पत्रकार ने जवाब दिया, “Donald Trump.” यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ।

इसी के साथ ट्रंप के पुराने ट्वीट और ईरान को लेकर दी गई चेतावनियां फिर सुर्खियों में आ गईं। कई विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा घटनाक्रम ने ट्रंप की उस टिप्पणी को फिर प्रासंगिक बना दिया है, हालांकि इस बात पर राय बंटी हुई है कि इसे भविष्यवाणी कहा जाए या महज एक राजनीतिक आकलन।
Donald Trump का 6 साल पुराना बयान
हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच “इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU)” पर सहमति बनी, जिसका उद्देश्य महीनों से जारी तनाव और संघर्ष को समाप्त करना है। इस समझौते के तहत दोनों देशों ने युद्धविराम, होरमुज जलडमरूमध्य में व्यापारिक आवाजाही बहाल करने और अगले 60 दिनों में व्यापक समझौते के लिए बातचीत जारी रखने पर सहमति जताई है। समझौते के बाद ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने इसे “एक शक्तिशाली ईरान का ऐतिहासिक दस्तावेज” बताया, जबकि कई पश्चिमी विश्लेषकों का कहना है कि तेहरान एक बार फिर बातचीत की मेज पर अपनी शर्तों के साथ मजबूत स्थिति में दिखाई दिया। यही वजह है कि ट्रंप का 2020 का ट्वीट, “ईरान कभी युद्ध नहीं जीतता, लेकिन बातचीत कभी नहीं हारता” फिर से चर्चा का विषय बन गया है। कुछ आलोचकों का मानना है कि अमेरिका को कई मोर्चों पर समझौते करने पड़े, जबकि समर्थक इसे युद्ध टालने की सफल रणनीति मान रहे हैं।
भविष्यवाणी या महज संयोग?
ट्रंप के पुराने बयानों को लेकर अब राजनीतिक और रणनीतिक बहस छिड़ गई है। भारत में भी टीवी कार्यक्रमों और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में यह सवाल उठाया जा रहा है कि क्या छह साल पहले कही गई बातें आज की हकीकत बनती दिख रही हैं। हालांकि विशेषज्ञों का एक वर्ग मानता है कि यह कहना जल्दबाजी होगी कि ट्रंप की भविष्यवाणी पूरी तरह सही साबित हुई है, क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच अंतिम समझौता अभी बाकी है और आने वाले 60 दिनों की वार्ताएं बेहद अहम होंगी। फिर भी, इतना तय है कि ट्रंप का पुराना ट्वीट आज फिर वैश्विक राजनीति की बहस के केंद्र में है और इसी वजह से छह साल पहले कही गई एक पंक्ति फिर सुर्खियों में लौट आई है।
این متن، بازتاب صدای ملتی است که عزت و استقلال خود را با هیچ تهدید و فشاری معامله نکرد.
آنچه امروز به ثبت رسید، نتیجه استقامت ملی، عقلانیت سیاسی و دیپلماسی مسئولانه بود. pic.twitter.com/77ri1McFm8— Masoud Pezeshkian (@drpezeshkian) June 18, 2026
समझौते की शर्तें
इस दौरान होरमुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर विशेष ध्यान दिया गया, क्योंकि दुनिया के समुद्री रास्ते से होने वाले करीब 20 प्रतिशत तेल व्यापार की आपूर्ति इसी मार्ग से गुजरती है। हालिया तनाव के दौरान इस अहम समुद्री मार्ग के बंद होने की आशंकाओं ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में चिंता बढ़ा दी थी, लेकिन MoU के बाद स्थिति में कुछ स्थिरता आई है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने इस समझौते को “एक शक्तिशाली ईरान का ऐतिहासिक दस्तावेज” बताया, जबकि अमेरिकी पक्ष ने इसे क्षेत्र में स्थिरता और आगे की बातचीत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना।
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Written By : Mahi








