Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से जुड़े करीब 1,500 करोड़ रुपये के कथित बैंक फ्रॉड मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार और संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है। याचिका में पूरे मामले की कोर्ट की निगरानी में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (एसएफआईओ) और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से जांच कराने की मांग की गई है।
चार सप्ताह में मांगा जवाब
भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए सभी संबंधित पक्षों से चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा। याचिका अधिवक्ता अश्वनी कुमार दुबे के माध्यम से दाखिल की गई है।
Supreme Court News: 73.50 करोड़ में निपटाने का आरोप
याचिका में आरोप लगाया गया है कि जेकेएम इंफ्रा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड पर बैंकों का कुल 1,537.59 करोड़ रुपये बकाया था, लेकिन एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनियों (एआरसी) के जरिए इसका निपटारा केवल 73.50 करोड़ रुपये में कर दिया गया। इससे सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को 95 प्रतिशत से अधिक का नुकसान हुआ।
फर्जी दस्तावेजों और शेल कंपनियों से 902 करोड़ की हेराफेरी का दावा
याचिका में वर्ष 2018 की फोरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया गया है कि फर्जी दस्तावेजों, फर्जी इनवॉइस और शेल कंपनियों के माध्यम से 902 करोड़ रुपये से अधिक की राशि का कथित रूप से डायवर्जन किया गया। इसके बावजूद खाते को धोखाधड़ी वाला घोषित नहीं किया गया और न ही कोई प्रभावी आपराधिक कार्रवाई हुई।
Supreme Court News: बैंकों और एआरसी की भूमिका पर उठे सवाल
याचिका में आरोप लगाया गया है कि एसबीआई की अगुवाई वाले बैंक समूह ने समय रहते न तो जांच एजेंसियों को मामला सौंपा और न ही आरबीआई के नियमों के अनुसार खाते को फ्रॉड घोषित किया। बाद में यह कर्ज पहले प्रूडेंट एआरसी और फिर फीनिक्स एआरसी को भारी छूट पर हस्तांतरित कर दिया गया।
ईडी, एसएफआईओ और आरबीआई से व्यापक जांच की मांग
याचिकाकर्ता ने पीएमएलए के तहत ईडी से मनी लॉन्ड्रिंग की जांच, एसएफआईओ से कंपनी और उससे जुड़ी संस्थाओं की जांच तथा आरबीआई से बैंकिंग प्रक्रिया और एआरसी की भूमिका की जांच कराने की मांग की है। साथ ही सार्वजनिक धन के कथित दुरुपयोग के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करने की भी अपील की गई है।
Supreme Court News: पहले से दर्ज हैं दो एफआईआर
याचिका में दिल्ली की इकोनॉमिक ऑफेंस विंग और गौतम बुद्ध नगर में दर्ज दो एफआईआर का भी उल्लेख किया गया है। इसमें दावा किया गया कि दिल्ली पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट को सक्षम अदालत पहले ही खारिज कर चुकी है और आगे की जांच के निर्देश दिए जा चुके हैं। अब सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के बाद इस पूरे मामले की जांच और कानूनी प्रक्रिया पर सभी की नजरें टिक गई हैं।
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