Kabir : इम्तियाज अली की फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ रिलीज के बाद से लगातार चर्चा में बनी हुई है। फिल्म की कहानी के साथ-साथ इसके गानों को भी दर्शकों का खूब प्यार मिला है। हालांकि कम लोग जानते हैं कि फिल्म का चर्चित गीत ‘इश्क मस्ताना’ संत कबीर दास के करीब 600 साल पुराने प्रसिद्ध दोहे से प्रेरित है दरअसल, इस गीत की मूल प्रेरणा कबीर के मशहूर दोहे “हमन हैं इश्क़ मस्ताना” से ली गई है। 15वीं शताब्दी में लिखे गए इस दोहे में कबीर ने ईश्वर के प्रति प्रेम, आत्मिक जुड़ाव और अद्वैत दर्शन की बात कही थी। दोहे का भाव यह बताता है कि जो प्रेम में पूरी तरह डूब चुका है, उसे दुनिया की दिखावे वाली समझदारी या किसी प्रतीक्षा की जरूरत नहीं रह जाती।

फिल्म में इसी भाव को आधुनिक अंदाज में पेश किया गया है। निर्देशक इम्तियाज अली ने प्रेम की गहराई और आत्मिक जुड़ाव को कहानी का हिस्सा बनाया है, जिसकी झलक ‘इश्क मस्ताना’ गीत में साफ दिखाई देती है।
Kabir के 600 साल पुराने दोहे से बना
गीतकार इरशाद कामिल ने कबीर के मूल विचार को बरकरार रखते हुए उसे नए शब्दों में ढाला है। एआर रहमान के संगीत और इरशाद की लेखनी ने इस गीत को एक अलग पहचान दी है। गाने में पंजाबी शब्दों का भी इस्तेमाल किया गया है, लेकिन इसकी भावना हर भाषा के श्रोता तक आसानी से पहुंचती है। गाने की खास बात यह है कि इसमें कबीर के प्रसिद्ध दोहे की पंक्तियां भी सुनाई देती हैं। “हमन हैं इश्क़ मस्ताना, हमन को होशियारी क्या” जैसी लाइनें सीधे कबीर की रचनाओं से प्रेरित हैं, जिन्हें नए संगीत और नए संदर्भ के साथ पेश किया गया है।
सोशल मीडिया पर हो रहा वायरल
फिल्म की कहानी में यह गीत अहम भूमिका निभाता है और दर्शकों पर गहरा असर छोड़ता है। यही वजह है कि रिलीज के बाद से यह गाना सोशल मीडिया और यूट्यूब पर लगातार पसंद किया जा रहा है। अब तक इसे 13 मिलियन से ज्यादा बार देखा जा चुका है। अगर आपने ‘इश्क मस्ताना’ को सिर्फ एक रोमांटिक गीत समझकर सुना है, तो एक बार इसके शब्दों और कबीर के मूल दोहे को साथ पढ़िए। तब महसूस होगा कि यह गीत सिर्फ प्रेम की नहीं, बल्कि आत्मा और प्रेम के गहरे रिश्ते की भी बात करता है।
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Written By : Kanishka








