Paddy Seed Crisis : खरीफ सीजन की शुरुआत होते ही क्षेत्र के किसानों ने खेती-किसानी की गतिविधियां तेज कर दी हैं। धान की फसल को लेकर खेतों में तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं, लेकिन सरकारी स्तर पर बीज वितरण शुरू नहीं होने से किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ा। समय पर बीज नहीं मिलने के कारण अधिकांश किसानों ने निजी दुकानों से अधिक कीमत चुकाकर धान का बीज खरीदा और बिचड़ा तैयार कर लिया। किसानों का कहना है कि हर वर्ष की तरह इस बार भी उन्हें सरकारी बीज मिलने की उम्मीद थी, लेकिन खेती के महत्वपूर्ण समय तक वितरण प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी।

खेती का कार्य मौसम के अनुसार तय होता है और इसमें देरी की कोई गुंजाइश नहीं रहती। ऐसे में किसानों को मजबूर होकर बाजार का रुख करना पड़ा। उनका कहना है कि यदि समय पर सरकारी बीज उपलब्ध हो जाता तो खेती की लागत काफी कम हो सकती थी।
Paddy Seed Crisis
क्षेत्र के अधिकांश गांवों में किसानों ने धान का बिचड़ा डालने का काम पूरा कर लिया है। कई स्थानों पर बिचड़ा पूरी तरह तैयार भी हो चुका है। दूसरी ओर खेतों की जुताई और रोपाई से जुड़ी तैयारियां भी अंतिम चरण में हैं। नहरों से सिंचित क्षेत्रों में अगले कुछ दिनों के भीतर धान की रोपाई शुरू होने की संभावना जताई जा रही है। किसान अब मानसून की बारिश और सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिलने का इंतजार कर रहे हैं।
जताई नाराजगी
कई किसानों ने सरकारी व्यवस्था को लेकर नाराजगी व्यक्त की है। उनका कहना है कि हर साल किसानों का पंजीकरण कराया जाता है और अनुदानित बीज देने का दावा किया जाता है, लेकिन जरूरत के समय बीज उपलब्ध नहीं हो पाता। किसानों का मानना है कि खेती का पूरा कार्यक्रम मौसम पर आधारित होता है, इसलिए बीज वितरण में थोड़ी सी देरी भी उन्हें आर्थिक नुकसान पहुंचा सकती है।
अनुदान के भरोसे नहीं रुक सकती खेती
ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों का कहना है कि खेती किसी सरकारी प्रक्रिया का इंतजार नहीं करती। यदि समय पर बुवाई और रोपाई नहीं की जाए तो उत्पादन प्रभावित हो सकता है। इसी वजह से अधिकांश किसानों ने अनुदानित बीज की प्रतीक्षा छोड़कर बाजार से महंगा बीज खरीदना बेहतर समझा। इससे उनकी लागत जरूर बढ़ी है, लेकिन फसल का समय बच गया।
कृषि विभाग के अनुसार प्रखंड के लिए धान बीज का आवंटन किया जा चुका है। अधिकारियों ने बताया कि कुल 24 क्विंटल बीज स्वीकृत हुआ है, जिसमें हाइब्रिड और अनुदानित दोनों श्रेणियों के बीज शामिल हैं। हालांकि अब तक बीज की खेप प्रखंड स्तर पर नहीं पहुंच सकी है। इसी कारण वितरण प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई। विभाग का कहना है कि बीज उपलब्ध होते ही किसानों को वितरण किया जाएगा।








