Diabetes and Bone Weakness: डायबिटीज का असर सिर्फ ब्लड शुगर तक सीमित नहीं रहता। लंबे समय तक बढ़ा हुआ शुगर लेवल हड्डियों की मजबूती और गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है, जिससे फ्रैक्चर समेत कई समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। डायबिटीज एक ऐसी बीमारी है, जिसका असर शरीर के कई अंगों पर पड़ सकता है। लंबे समय तक ब्लड शुगर कंट्रोल में न रहने पर नसों, आंखों और किडनी के साथ-साथ हड्डियों की सेहत भी प्रभावित हो सकती है। यही वजह है कि कुछ लोगों में कम उम्र में ही हड्डियों में दर्द, कमजोरी और जोड़ों से जुड़ी समस्याएं देखने को मिलती हैं। Metabolism Open में प्रकाशित एक स्टडी के मुताबिक, टाइप-2 डायबिटीज वाले लोगों में बोन मिनरल डेंसिटी सामान्य होने के बावजूद हड्डियों की गुणवत्ता कमजोर हो सकती है। ऐसे में फ्रैक्चर का खतरा भी बढ़ सकता है।
Diabetes and Bone Weakness: डायबिटीज में हड्डियां क्यों होती हैं कमजोर-
डॉ. राजीव चौधरी के अनुसार, जब ब्लड शुगर लंबे समय तक बढ़ा रहता है तो शरीर के टिश्यूज में कई तरह के बदलाव होने लगते हैं। इसका असर हड्डियों की संरचना और मजबूती पर पड़ सकता है। लंबे समय तक हाई ब्लड शुगर रहने से हड्डियों में मौजूद कोलेजन भी प्रभावित हो सकता है। इसके अलावा इंसुलिन की कमी या इंसुलिन रेजिस्टेंस भी हड्डियों की सेहत पर नकारात्मक असर डाल सकता है।2024 में Metabolism Open में प्रकाशित एक स्टडी के अनुसार, लंबे समय तक बढ़ा हुआ ब्लड शुगर, इंसुलिन रेजिस्टेंस और शरीर में सूजन हड्डियों की संरचना और गुणवत्ता को प्रभावित कर सकते हैं। इससे फ्रैक्चर का खतरा बढ़ने की संभावना रहती है।
Diabetes and Bone Weakness: क्रॉनिक डायबिटीज में बढ़ सकता है खतरा-
2025 में Diabetology में प्रकाशित एक स्टडी के मुताबिक, लंबे समय से डायबिटीज से जूझ रहे और अनियंत्रित ब्लड शुगर वाले लोगों में हड्डियों से जुड़ी समस्याओं का खतरा अधिक हो सकता है। इसलिए डायबिटीज को सिर्फ ब्लड शुगर की बीमारी समझना सही नहीं है। लंबे समय तक शुगर कंट्रोल में न रहने पर इसका असर हड्डियों और जोड़ों की सेहत पर भी पड़ सकता है।
डायबिटीज में हड्डियों और जोड़ों से जुड़ी 5 आम समस्याएं-
1. फ्रोजन शोल्डर-
डायबिटीज मरीजों में फ्रोजन शोल्डर की समस्या देखने को मिल सकती है। इसमें कंधे के आसपास के टिश्यू में बदलाव के कारण कंधे की मूवमेंट प्रभावित हो सकती है। हाथ उठाने या कंधे को घुमाने में दर्द और परेशानी हो सकती है। ब्लड शुगर को कंट्रोल में रखना और डॉक्टर की सलाह से एक्सरसाइज करना इससे बचाव में मदद कर सकता है।
2. पेरिफेरल न्यूरोपैथी-
जब ब्लड शुगर लंबे समय तक कंट्रोल में नहीं रहता, तो नसों पर इसका असर पड़ सकता है। इससे हाथ-पैरों में झनझनाहट, सुन्नपन या जलन जैसी समस्या महसूस हो सकती है। ऐसे लक्षणों को नजरअंदाज करने के बजाय डॉक्टर से जांच करवाना जरूरी है।
3. हाथ-पैरों में सूजन और अकड़न-
हाई ब्लड शुगर के कारण कुछ डायबिटिक मरीजों में हाथ-पैरों की उंगलियों में सूजन और अकड़न की समस्या हो सकती है। इससे उंगलियों की सामान्य गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं।
4. चारकोट न्यूरोआर्थ्रोपैथी-
चारकोट न्यूरोआर्थ्रोपैथी पैरों के जोड़ों से जुड़ी एक गंभीर समस्या है, जो डायबिटिक मरीजों में देखी जा सकती है। नसों को नुकसान पहुंचने के कारण पैर के जोड़ों में चोट और नुकसान का पता देर से चल सकता है।
5. ऑस्टियोपोरोसिस-
डायबिटीज में हड्डियों की गुणवत्ता और मजबूती प्रभावित होने से ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा बढ़ सकता है। इससे हड्डियां कमजोर हो सकती हैं और मामूली चोट में भी फ्रैक्चर होने की संभावना बढ़ सकती है।
हड्डियों को मजबूत रखने के लिए क्या करें-
डायबिटीज मरीजों के लिए ब्लड शुगर को कंट्रोल में रखना सबसे जरूरी है। इसके लिए नियमित रूप से शुगर की जांच करवाएं और डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाएं समय पर लें।
इसके अलावा:
– डाइट में पर्याप्त कैल्शियम शामिल करें।
– नियमित रूप से वॉकिंग या स्ट्रेंथ ट्रेनिंग जैसी एक्सरसाइज करें।
– धूम्रपान और शराब के सेवन से बचें।
– पैरों में सुन्नपन या संवेदनशीलता कम होने पर तुरंत ध्यान दें।
– नियमित हेल्थ चेकअप करवाते रहें।
डॉक्टर से कब संपर्क करें-
अगर आपको बार-बार हड्डियों या जोड़ों में दर्द रहता है, पैरों में सुन्नपन या झनझनाहट महसूस होती है, बार-बार फ्रैक्चर होता है या चलने-फिरने में परेशानी होने लगी है, तो डॉक्टर से जांच करवानी चाहिए।डायबिटीज को कंट्रोल में रखना सिर्फ ब्लड शुगर के लिए ही नहीं, बल्कि हड्डियों और पूरे शरीर की सेहत के लिए भी जरूरी है।
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