Ram Mandir FIR: राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए नकदी और आभूषणों की कथित चोरी का मामला अब कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ सियासी बहस का विषय भी बन गया है। राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के ट्रस्टी कृष्ण मोहन की लिखित शिकायत के आधार पर अयोध्या पुलिस ने मंदिर के आठ कर्मचारियों के खिलाफ चोरी, गबन और आपराधिक साजिश जैसी गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज की है। मामले की जांच स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) कर रही है, जिसकी शुरुआती रिपोर्ट के बाद यह कार्रवाई की गई।
आठ कर्मचारियों पर दर्ज हुआ मुकदमा
एफआईआर में जिन कर्मचारियों को नामजद किया गया है उनमें रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव, अविनाश, मनीष यादव, लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा, सुभाष चंद्र, करुणेश पांडे और रमाशंकर मिश्रा शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि जांच अभी जारी है और मामले से जुड़े सभी पहलुओं की गहराई से पड़ताल की जा रही है। यदि अदालत में आरोप सिद्ध होते हैं तो आरोपियों को लंबी सजा का सामना करना पड़ सकता है।
Ram Mandir FIR: कौन हैं ट्रस्टी कृष्ण मोहन?
इस पूरे मामले में शिकायतकर्ता राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के ट्रस्टी कृष्ण मोहन हैं। हरदोई के निवासी कृष्ण मोहन को सितंबर 2025 में ट्रस्ट का नया ट्रस्टी नियुक्त किया गया था। ट्रस्ट में यह जिम्मेदारी उन्हें कामेश्वर चौपाल के निधन के बाद सौंपी गई।कृष्ण मोहन ने लखनऊ विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की और शुरुआती दौर में परमाणु ऊर्जा विभाग में सेवाएं दीं। बाद में वे भारतीय वन सेवा (IFS) के लिए चयनित हुए और महाराष्ट्र कैडर में लंबे समय तक अपनी सेवाएं दीं। वर्ष 2012 में सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने सामाजिक कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाई, जिसके चलते उन्हें राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में ट्रस्टी बनाया गया।
Ram Mandir FIR: निचले कर्मचारियों पर कार्रवाई, विपक्ष ने उठाए सवाल
एफआईआर दर्ज होने के बाद मामला राजनीतिक रंग भी पकड़ चुका है। विपक्ष का आरोप है कि जांच के दायरे में केवल निचले स्तर के कर्मचारियों को लाया गया है, जबकि ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई।समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि छोटे कर्मचारियों को बलि का बकरा बनाया जा रहा है और बड़े लोगों को बचाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने एसआईटी की शुरुआती रिपोर्ट पर भी सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की।वहीं आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने दावा किया कि उन्होंने पहले ही एसआईटी को कथित अनियमितताओं से जुड़े कई दस्तावेज उपलब्ध कराए थे। उनका आरोप है कि जांच का दायरा सीमित रखकर बड़े पदाधिकारियों को बचाने की कोशिश की जा रही है और जनता का ध्यान मुख्य मुद्दे से हटाया जा रहा है।
जांच जारी, आगे की कार्रवाई पर नजर
फिलहाल पुलिस और एसआईटी मामले की विस्तृत जांच में जुटी हैं। अब सबकी निगाह इस बात पर टिकी है कि जांच केवल आठ कर्मचारियों तक सीमित रहती है या फिर यदि साक्ष्य सामने आते हैं तो ट्रस्ट के अन्य जिम्मेदार पदाधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जाएगी। इस मामले की आगे की कार्रवाई और जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
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