Ram Mandir Cash Recovery: अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावे की रकम में हुई कथित चोरी के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। जांच के दौरान मंदिर के व्यवस्थापक और मामले के मुख्य आरोपी माने जा रहे रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव के हॉस्टल से 20 लाख रुपये नकद बरामद किए गए हैं। इस बरामदगी के बाद पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया है और पुलिस अब इस कथित सिंडिकेट से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी गहराई से जांच कर रही है।पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में टिन्नू यादव ने हॉस्टल में रखी नकदी की जानकारी दी। इसके बाद पुलिस टीम उसे अयोध्या की दुर्गापुरी कॉलोनी स्थित हॉस्टल लेकर पहुंची, जहां उसके कब्जे वाले दो कमरों की तलाशी ली गई। तलाशी के दौरान 20 लाख रुपये नकद बरामद हुए। इससे पहले पुलिस टिन्नू यादव और उसके भतीजे मनीष यादव के पास से भी करीब 3 लाख रुपये बरामद कर चुकी थी। अब तक कुल 23 लाख रुपये की रिकवरी हो चुकी है।पूरा मामला तब सामने आया जब मई महीने में राम मंदिर ट्रस्ट ने चढ़ावे की राशि का ऑडिट कराया। जांच में दान पात्रों की रकम में करीब 7 से 8 लाख रुपये की कमी पाई गई। इसके बाद नोट गिनने वाले कक्ष में गुप्त कैमरे लगाए गए। करीब सवा महीने की रिकॉर्डिंग देखने पर कथित तौर पर 70 बार चोरी की घटनाएं सामने आईं, जिसके बाद पुलिस ने जांच तेज कर दी।
Ram Mandir Cash Recovery: कैसे काम करता था कथित सिंडिकेट
जांच में सामने आया कि नोटों की गिनती के दौरान कुछ कर्मचारी जानबूझकर मुख्य सीसीटीवी कैमरे के सामने खड़े हो जाते थे, ताकि उनकी गतिविधियां रिकॉर्ड न हो सकें। इसी दौरान अन्य कर्मचारी नोटों की गड्डियों से पैसे निकालकर कपड़ों में छिपा लेते थे। कुछ मामलों में गड्डियां बनाते समय अतिरिक्त नोट रखे जाते थे, जिन्हें बाद में कथित रूप से बाहर निकाल लिया जाता था।पुलिस इस मामले में अब तक आठ लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। इनमें मुख्य आरोपी टिन्नू यादव, उसका भतीजा मनीष यादव, एसबीआई के सेवानिवृत्त कर्मचारी और कैश काउंटिंग प्रभारी सुभाष चंद्र श्रीवास्तव सहित अन्य कर्मचारी शामिल हैं। पुलिस का दावा है कि मामले से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच जारी है।
Ram Mandir Cash Recovery: जांच का दायरा बढ़ा
टिन्नू यादव के हॉस्टल से 20 लाख रुपये की बरामदगी के बाद पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस कथित सिंडिकेट के तार कहीं और लोगों से भी जुड़े थे या नहीं। वहीं इस मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है और मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था तथा पारदर्शिता को लेकर कई सवाल उठाए जा रहे हैं। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की हर कड़ी को जोड़ने और चोरी की रकम के वास्तविक स्रोत व उपयोग का पता लगाने में जुटी हुई है।
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