ITR New Rules 2026: आकलन वर्ष 2026-27 के लिए आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। आयकर विभाग ने करदाताओं से अपील की है कि वे अपनी सभी प्रकार की आय और संपत्तियों की सही जानकारी रिटर्न में दें। विदेश में आय या संपत्ति रखने वाले करदाताओं के लिए यह नियम और भी महत्वपूर्ण है।
ITR New Rules 2026: किन करदाताओं को भरना होगा ITR-2 और ITR-3-
विदेश में आय अर्जित करने वाले या संपत्ति रखने वाले रेजिडेंट और ऑर्डिनरिली रेजिडेंट (ROR) करदाता, जिनकी बिजनेस या प्रोफेशन से आय नहीं है, उन्हें ITR-2 फॉर्म भरना होगा। वहीं, जिनकी बिजनेस या प्रोफेशन से भी आय है, उन्हें ITR-3 के जरिए रिटर्न दाखिल करना होगा।
ITR New Rules 2026: ‘शेड्यूल FA’ में देनी होगी विदेशी संपत्ति की जानकारी-
विदेशी बैंक खाते, शेयर, विदेशी रिटायरमेंट अकाउंट, एम्प्लॉयी स्टॉक ओनरशिप प्लान (ESOP) और अन्य विदेशी संपत्तियों की जानकारी ITR में ‘शेड्यूल FA’ के तहत देना अनिवार्य है।
जानकारी छिपाने पर लग सकता है ₹10 लाख तक का जुर्माना-
आयकर नियमों और कालेधन (अघोषित विदेशी आय और संपत्ति) कानून (BMA) के तहत विदेशी संपत्ति या आय की जानकारी छिपाने पर, भले ही उस पर टैक्स देय न हो, करदाता पर ₹10 लाख तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। गलत जानकारी देने पर नोटिस और जांच का भी सामना करना पड़ सकता है।
दोहरे टैक्स से बचने के लिए करें FTC का दावा-
यदि विदेश में पहले ही टैक्स चुका चुके हैं, तो करदाता फॉरेन टैक्स क्रेडिट (FTC) का दावा कर सकते हैं। इसके लिए ITR की संबंधित अनुसूचियों में विदेशी आय और चुकाए गए विदेशी टैक्स का विवरण देना जरूरी है। राहत की राशि भारत के दोहरे कर बचाव समझौते (DTAA) या अन्य लागू नियमों के अनुसार तय होती है।
विदेशी संपत्ति की जानकारी कैलेंडर वर्ष के आधार पर दें-
भारत में ITR आमतौर पर अप्रैल से मार्च की आय के आधार पर भरा जाता है, लेकिन विदेशी संपत्ति और आय की जानकारी कैलेंडर वर्ष (जनवरी से दिसंबर) के आधार पर देनी होती है। आकलन वर्ष 2026-27 के लिए जनवरी 2025 से दिसंबर 2025 तक की विदेशी आय और संपत्ति का विवरण देना होगा।
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