Cancer Lump Symptoms:शरीर के किसी भी हिस्से में गांठ महसूस होना स्वाभाविक रूप से चिंता का कारण बन सकता है, क्योंकि लोग अक्सर इसे कैंसर का शुरुआती संकेत मान लेते हैं। लेकिन डॉ. मुदित अग्रवाल, यूनिट हेड और सीनियर कंसल्टेंट, हेड एंड नेक ऑन्कोलॉजी यूनिट–2, राजीव गांधी कैंसर इंस्टीट्यूट एंड रिसर्च सेंटर (RGCIRC), नई दिल्ली के अनुसार, हर गांठ कैंसर नहीं होती। कई बार संक्रमण, सिस्ट, फैटी ग्रोथ या अन्य गैर-कैंसर (नॉन-कैंसरस) कारणों की वजह से भी शरीर में गांठ बन सकती है। इसलिए बिना जांच के किसी गांठ को खतरनाक मान लेना या उसे पूरी तरह नजरअंदाज कर देना, दोनों ही सही नहीं हैं।
शरीर के इन हिस्सों में बन सकती है गांठ
गांठ शरीर के लगभग किसी भी हिस्से में दिखाई दे सकती है। यह सीने, गर्दन, आर्मपिट (बगल), ग्रोइन यानी शरीर के जोड़ों के अंदरूनी हिस्सों, हाथों और पैरों में भी बन सकती है। यदि कोई गांठ दो से तीन सप्ताह से अधिक समय तक बनी रहे, उसका आकार लगातार बढ़ता जाए या उसकी बनावट में बदलाव दिखाई दे, तो बिना देरी किए डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।
Cancer Lump Symptoms: इन संकेतों को हल्के में न लें
अगर गांठ के साथ कुछ खास लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए। जैसे गांठ में दर्द न होने के बावजूद उसका आकार लगातार बढ़ना, गांठ का सख्त होना और आसपास के टिश्यू से चिपकी हुई महसूस होना, उसके आसपास लालपन आना, घाव जैसा बनना या त्वचा के रंग में बदलाव दिखाई देना। इसके अलावा अगर गांठ के साथ लगातार बुखार आने लगे, बिना किसी कारण वजन कम होने लगे, लगातार थकान महसूस हो या रात में जरूरत से ज्यादा पसीना आए, तो डॉक्टर से तुरंत सलाह लेनी चाहिए।

बिना दर्द वाली गांठ भी हो सकती है गंभीर
अक्सर लोग यह सोचकर निश्चिंत हो जाते हैं कि गांठ में दर्द नहीं है, इसलिए कोई खतरा नहीं होगा। लेकिन ऐसा हमेशा सही नहीं होता। विशेषज्ञों के मुताबिक, कई तरह के कैंसर की शुरुआती अवस्था में गांठ पूरी तरह दर्दरहित होती है। दर्द न होने की वजह से लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं और डॉक्टर के पास जाने में देरी कर देते हैं। यह लापरवाही बीमारी को बढ़ने का मौका दे सकती है, इसलिए बिना दर्द वाली गांठ को भी गंभीरता से लेना चाहिए।
डॉक्टर कैसे करते हैं जांच
गांठ की सही वजह जानने के लिए डॉक्टर सबसे पहले मरीज की मेडिकल हिस्ट्री लेते हैं और शारीरिक जांच करते हैं। इसके बाद जरूरत के अनुसार अल्ट्रासाउंड, मैमोग्राफी, सीटी स्कैन, एमआरआई और ब्लड टेस्ट जैसी जांचें कराई जा सकती हैं। अगर डॉक्टर को आवश्यकता महसूस होती है, तो बायोप्सी भी कराई जाती है।
बायोप्सी से मिलती है सही जानकारी
बायोप्सी एक महत्वपूर्ण जांच है, जिससे यह पता लगाया जाता है कि गांठ कैंसर से जुड़ी है या सामान्य (नॉन-कैंसरस) है। इस जांच के जरिए डॉक्टर बीमारी की सही पहचान कर पाते हैं और उसी के आधार पर आगे के इलाज की योजना बनाई जाती है।
समय पर जांच है सबसे जरूरी
हालांकि शरीर में बनने वाली हर गांठ खतरनाक नहीं होती, लेकिन उसका सही कारण केवल डॉक्टर ही बता सकते हैं। अगर शरीर में कोई नई गांठ महसूस हो, वह लंबे समय तक बनी रहे, लगातार बढ़े, सख्त हो, दर्द न करे या एक ही जगह पर स्थिर रहे, तो डॉक्टर से जरूर मिलना चाहिए। खासकर अगर इसके साथ वजन कम होना, बुखार, थकान या रात में ज्यादा पसीना आने जैसे लक्षण भी दिखाई दें, तो मेडिकल जांच में बिल्कुल देरी नहीं करनी चाहिए। सही समय पर जांच कराने से बीमारी का जल्द पता चल सकता है, जिससे इलाज आसान होता है और बेहतर परिणाम मिलने की संभावना भी बढ़ जाती है।
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