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तिहाड़ जेल में अमेरिकी कैदी की 50 दिन से भूख हड़ताल, भारतीय खाने पर जताई आपत्ति, कोर्ट पहुंचा मामला

Delhi Tihar Jail

Delhi Tihar Jail: दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद एक अमेरिकी नागरिक की भूख हड़ताल इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है। अमेरिकी नागरिक वैन डाइक (Van Dyke) पिछले करीब 50 दिनों से जेल में मिलने वाला भोजन नहीं खा रहा है। उसका कहना है कि भारतीय जेल का मसालेदार और तला-भुना खाना उसकी सेहत के अनुकूल नहीं है, जिसके चलते वह केवल तरल पदार्थों के सहारे रह रहा है। अब इस मामले में अदालत का भी दखल हो गया है।

50 दिनों से नहीं खाया जेल का खाना

वैन डाइक की ओर से अदालत में दायर याचिका में कहा गया है कि वह पिछले 50 दिनों से तिहाड़ जेल में परोसा जाने वाला नियमित भोजन नहीं खा पा रहा है। उसके वकीलों के मुताबिक, भारतीय मसालेदार और डीप-फ्राइड भोजन खाने के बाद उसकी तबीयत खराब हो जाती है और उसे पाचन संबंधी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। याचिका में यह भी बताया गया है कि फिलहाल वह केवल तरल पदार्थों का सेवन कर रहा है, जिसमें मुख्य रूप से सोया मिल्क शामिल है। उसने आगे भी अपनी डाइट में सोया मिल्क उपलब्ध कराने की मांग की है।

Delhi Tihar Jail: जेल प्रशासन ने मांगा समय

मामले की सुनवाई के दौरान तिहाड़ जेल के सुपरिटेंडेंट की ओर से अदालत में जवाब दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय मांगा गया। अदालत ने इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई तय की है। वैन डाइक को नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने 13 मार्च को छह यूक्रेनी नागरिकों के साथ गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसी के अनुसार, यह समूह कथित तौर पर म्यांमार-मिजोरम सीमा के रास्ते अवैध रूप से भारत में दाखिल हुआ था। बाद में देश के विभिन्न घरेलू हवाई अड्डों से इन लोगों को हिरासत में लिया गया।

NIA का आरोप है कि यह समूह कथित तौर पर भाड़े के लड़ाकों (Mercenaries) के रूप में सक्रिय था और भारत तथा म्यांमार में सक्रिय जातीय सशस्त्र समूहों को सहायता और ड्रोन प्रशिक्षण देने से जुड़े एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है। इसी मामले में इनके खिलाफ गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) समेत अन्य गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

कौन है वैन डाइक?

आपको बता दें कि वैन डाइक ने ‘Sons of Liberty International (SOLI)’ नामक एक गैर-लाभकारी संस्था की स्थापना की थी। संस्था का दावा है कि उसने इराक में ISIS के खिलाफ लड़ने वाले समूहों को प्रशिक्षण दिया और वर्ष 2022 से यूक्रेन की सहायता से जुड़े अभियानों में भी भाग लिया। संगठन खुद को तानाशाही सरकारों के विरोध में काम करने वाला बताता है। हालांकि, NIA का आरोप है कि इस संगठन के कुछ लोगों के भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र में सक्रिय विद्रोही संगठनों से संबंध हो सकते हैं। एजेंसी इसी एंगल से पूरे मामले की जांच कर रही है।

Delhi Tihar Jail: अब कोर्ट के फैसले का इंतजार

फिलहाल अदालत के समक्ष मुख्य सवाल यह है कि क्या विदेशी नागरिक की चिकित्सीय और आहार संबंधी आवश्यकताओं को देखते हुए उसे विशेष भोजन उपलब्ध कराया जाना चाहिए। इस मामले पर अगली सुनवाई 21 जुलाई को होगी, जिसके बाद अदालत आगे का निर्णय ले सकती है।

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