UP Kanwar Yatra 2026: उत्तर प्रदेश में इस बार कांवड़ यात्रा को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए पुलिस ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की तैयारी शुरू कर दी है। डीजीपी राजीव कृष्ण ने संबंधित जिलों के पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि कांवड़ यात्रा मार्गों की निगरानी ड्रोन से की जाए और संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती सुनिश्चित की जाए।
UP Kanwar Yatra 2026: ‘नो इंसीडेंट, नो एक्सीडेंट’ रहेगा लक्ष्य-
पुलिस मुख्यालय में हुई उच्च स्तरीय अपराध समीक्षा बैठक में डीजीपी ने कहा कि इस बार कांवड़ यात्रा को ‘नो इंसीडेंट, नो एक्सीडेंट’ के लक्ष्य के साथ संपन्न कराया जाएगा। उन्होंने निर्देश दिए कि कांवड़ मार्गों, शिविरों, घाटों और प्रमुख धार्मिक स्थलों पर सुरक्षा, बैरिकेडिंग, पर्याप्त रोशनी और यातायात प्रबंधन के सभी इंतजाम समय रहते पूरे किए जाएं। 28-29 जुलाई से शुरू होने वाली यात्रा को लेकर सभी तैयारियां पहले ही पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।
UP Kanwar Yatra 2026: लंबित मामलों के निस्तारण पर भी जोर-
डीजीपी ने अधिकारियों को हत्या, डकैती, लूट, चेन स्नैचिंग और अन्य गंभीर अपराधों के लंबित मामलों का जल्द निस्तारण करने के निर्देश दिए। साथ ही सक्रिय अपराधियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट और गुंडा एक्ट के तहत प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा।
‘बीट सूचना यक्ष ऐप की आत्मा’-
बैठक के दौरान डीजीपी ने कहा कि ‘बीट सूचना यक्ष ऐप की आत्मा है’। उन्होंने पुलिस अधिकारियों को बीट सिस्टम को और मजबूत बनाने तथा ऐप के प्रभावी उपयोग पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए।
केस मॉनिटरिंग और थानों की व्यवस्था में सुधार-
डीजीपी ने थानों में लंबे समय से खड़े वाहनों के निस्तारण के लिए अलीगढ़ और रायबरेली मॉडल के तहत डंपिंग यार्ड की व्यवस्था सभी जिलों में लागू करने के निर्देश दिए। इसके अलावा विवेचनाओं की निगरानी के लिए औरैया पुलिस द्वारा विकसित ‘केस डायरी मॉनिटरिंग डैशबोर्ड पोर्टल’ का उपयोग करने को भी कहा।
मिशन शक्ति और सड़क सुरक्षा अभियान के सकारात्मक परिणाम-
बैठक में बताया गया कि मिशन शक्ति केंद्रों की स्थापना के बाद समीक्षा में दहेज हत्या के मामलों में करीब 43% और दहेज प्रताड़ना के मामलों में लगभग 13% की कमी दर्ज की गई है। वहीं, जेडएफडी और आरटीसी अभियान के तहत सड़क सुरक्षा में भी सुधार देखने को मिला है। 1 जनवरी से 30 जून 2026 की तुलना में पिछले वर्ष की समान अवधि के मुकाबले सड़क दुर्घटनाओं में 9% और जाम की घटनाओं में 10% तक कमी दर्ज की गई है।
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