IAS Success Story: हर सफलता के पीछे संघर्ष की एक कहानी होती है और IAS अधिकारी गोविंद जायसवाल की कहानी इसका जीता-जागता उदाहरण है। वाराणसी के एक साधारण परिवार में जन्मे गोविंद के पिता रिक्शा चलाकर परिवार का पालन-पोषण करते थे। आर्थिक तंगी और सामाजिक तानों के बीच पले-बढ़े गोविंद ने कठिन परिस्थितियों को अपनी कमजोरी नहीं, बल्कि ताकत बनाया और पहले ही प्रयास में UPSC परीक्षा पास कर IAS अधिकारी बनने का सपना पूरा किया।
गरीबी में बीता बचपन, पिता चलाते थे रिक्शा
गोविंद जायसवाल का बचपन आर्थिक संघर्षों से भरा रहा। उनके पिता रिक्शा चलाकर परिवार की जरूरतें पूरी करते थे, जबकि मां गृहिणी थीं। सीमित संसाधनों के बावजूद परिवार ने बच्चों की शिक्षा को प्राथमिकता दी। छोटे से घर में रहने वाले गोविंद ने बचपन से ही जिम्मेदारियों और कठिनाइयों का सामना किया।
IAS Success Story: मां के निधन और अपमान ने बदल दी जिंदगी
सातवीं कक्षा में पढ़ाई के दौरान उनकी मां का ब्रेन हेमरेज से निधन हो गया, जिससे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। इसके बाद 11 साल की उम्र में एक दोस्त के घर उन्हें पिता के रिक्शा चालक होने को लेकर अपमानित किया गया। इसी घटना ने उनके भीतर कुछ बड़ा करने का संकल्प जगाया। बाद में एक बुजुर्ग से IAS अधिकारियों के बारे में जानने के बाद उन्होंने सिविल सेवा में जाने का लक्ष्य तय कर लिया।
IAS Success Story: दिल्ली में ट्यूशन पढ़ाकर की तैयारी
UPSC की तैयारी के लिए गोविंद दिल्ली पहुंचे। पिता ने उनकी पढ़ाई के लिए अपनी जमीन तक बेच दी। दिल्ली में उन्होंने ट्यूशन पढ़ाकर अपना खर्च चलाया। कई बार आर्थिक तंगी के कारण उन्हें एक समय का भोजन छोड़ना पड़ा, लेकिन उन्होंने अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया और पूरी लगन के साथ तैयारी जारी रखी।

पहले ही प्रयास में बने IAS
लगातार मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर गोविंद जायसवाल ने वर्ष 2006 में UPSC सिविल सेवा परीक्षा पहले ही प्रयास में पास की और ऑल इंडिया 48वीं रैंक हासिल की। उनकी सफलता ने यह साबित कर दिया कि गरीबी, संसाधनों की कमी या हिंदी माध्यम जैसी चुनौतियां मेहनत और दृढ़ संकल्प के आगे छोटी पड़ जाती हैं।
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