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नया देश कैसे बनता है? जानिए कौन देता है मान्यता और क्या हैं अंतरराष्ट्रीय नियम

International Law:

International Law: दुनिया के नक्शे पर किसी नए देश का उभरना केवल भौगोलिक बदलाव नहीं, बल्कि कानूनी, राजनीतिक और कूटनीतिक प्रक्रिया का परिणाम होता है। किसी क्षेत्र के खुद को स्वतंत्र घोषित कर देने से उसे स्वतः संप्रभु देश का दर्जा नहीं मिल जाता। 2011 में दक्षिण सूडान के गठन के बाद दुनिया में कोई नया संप्रभु देश आधिकारिक रूप से अस्तित्व में नहीं आया है।

International Law: देश बनने के लिए क्या हैं जरूरी शर्तें-

अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार 1933 के मोंटेवीडियो कन्वेंशन में किसी भी नए देश के लिए चार प्रमुख शर्तें तय की गई हैं।

स्थायी आबादी

निश्चित और स्पष्ट भूभाग

प्रभावी सरकार

अन्य देशों से संबंध स्थापित करने की क्षमता

इन चारों शर्तों को पूरा करना किसी भी नए देश के लिए बुनियादी आवश्यकता माना जाता है।

International Law: क्या संयुक्त राष्ट्र देता है नए देश को मान्यता-

आम धारणा के विपरीत संयुक्त राष्ट्र (UN) किसी नए देश को मान्यता नहीं देता। किसी क्षेत्र को स्वतंत्र देश के रूप में स्वीकार करने का अधिकार दुनिया के अन्य संप्रभु देशों के पास होता है। हालांकि, संयुक्त राष्ट्र की सदस्यता मिलना किसी भी नए देश की वैश्विक स्वीकार्यता का सबसे बड़ा संकेत माना जाता है।

UN की सदस्यता कैसे मिलती है-

संयुक्त राष्ट्र की सदस्यता के लिए पहले सुरक्षा परिषद (UNSC) के 15 में से कम से कम 9 सदस्यों का समर्थन जरूरी होता है। साथ ही पांच स्थायी सदस्य—अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन—में से कोई भी वीटो नहीं लगा सकता। इसके बाद प्रस्ताव संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में जाता है, जहां दो-तिहाई बहुमत यानी 193 में से कम से कम 129 देशों का समर्थन आवश्यक होता है।

मान्यता के दो प्रमुख सिद्धांत-

अंतरराष्ट्रीय कानून में नए देश की मान्यता को लेकर दो प्रमुख सिद्धांत हैं। घोषणात्मक (Declaratory) सिद्धांत के अनुसार यदि कोई क्षेत्र मोंटेवीडियो कन्वेंशन की सभी शर्तें पूरी करता है, तो वह देश माना जा सकता है, भले ही अन्य देश उसे मान्यता दें या नहीं।वहीं घटक (Constitutive) सिद्धांत कहता है कि जब तक अन्य संप्रभु देश किसी क्षेत्र को आधिकारिक मान्यता नहीं देते, तब तक वह नया देश नहीं माना जा सकता।

PoJK का मामला क्यों है अलग-

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoJK) में समय-समय पर अलग देश या आत्मनिर्णय की मांग उठती रही है। हालांकि भारत का स्पष्ट रुख है कि पूरा जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न हिस्सा है, जिस पर पाकिस्तान ने अवैध कब्जा किया हुआ है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय कानून और भारत के कानूनी दावे को देखते हुए PoJK को एक स्वतंत्र देश के रूप में वैश्विक मान्यता मिलना बेहद कठिन माना जाता है।

इतिहास क्या बताता है-

इतिहास बताता है कि जब तक मूल देश किसी क्षेत्र को अलग होने की अनुमति नहीं देता या वैश्विक शक्तियों का व्यापक समर्थन नहीं मिलता, तब तक नए देश को अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिलना बेहद मुश्किल होता है। दक्षिण सूडान इसका प्रमुख उदाहरण है, जिसे लंबी राजनीतिक प्रक्रिया और अंतरराष्ट्रीय सहमति के बाद स्वतंत्र देश का दर्जा मिला।

निष्कर्ष-

किसी नए देश का निर्माण केवल स्वतंत्रता की घोषणा से संभव नहीं होता। इसके लिए कानूनी शर्तों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय मान्यता, कूटनीतिक समर्थन और वैश्विक सहमति भी बेहद जरूरी होती है। यही कारण है कि दुनिया के नक्शे पर नया देश जोड़ना जितना आसान दिखता है, व्यवहार में उतना ही कठिन होता है

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