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अमित शाह का चुनावी ब्लूप्रिंट तैयार, जीत की क्षमता बनेगी टिकट का आधार

UP 2027: यूपी में अमित शाह का चुनावी ब्लूप्रिंट 2027 तैयार

UP 2027: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी चुनावी तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी ने ‘मिशन-2027’ के तहत सीटवार रणनीति तैयार करते हुए उम्मीदवारों के चयन का नया फॉर्मूला बनाया है। सूत्रों के अनुसार, इस बार टिकट वितरण में सबसे बड़ा आधार उम्मीदवार की जीत की क्षमता होगी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जल्द ही प्रदेश के छह क्षेत्रों का दौरा कर संगठन और चुनावी तैयारियों की समीक्षा करेंगे।

सीटों को चार कैटेगरी में बांटकर बनेगी रणनीति

भाजपा ने विधानसभा की 403 सीटों को चुनावी स्थिति के आधार पर चार श्रेणियों में बांटा है। A कैटेगरी में वे सीटें शामिल हैं, जहां पार्टी लगातार तीन चुनाव जीतती रही है। B कैटेगरी में कम अंतर से जीती गई सीटों को रखा गया है। C कैटेगरी में लगातार दो चुनावों से कम अंतर से हारी सीटें हैं, जबकि D कैटेगरी में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के मजबूत गढ़ वाली सीटों को शामिल किया गया है। प्रत्येक श्रेणी के लिए अलग चुनावी रणनीति तैयार की जाएगी।

UP 2027: 121 हारी सीटों और 61 मुश्किल सीटों पर विशेष फोकस

वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 376 सीटों पर चुनाव लड़कर 255 सीटों पर जीत हासिल की थी, जबकि 121 सीटों पर हार का सामना करना पड़ा था। इनमें 49 सीटें ऐसी थीं, जहां जीत-हार का अंतर 5 हजार वोट से भी कम रहा। इसके अलावा पार्टी का विशेष ध्यान उन 61 सीटों पर रहेगा, जहां वह पिछले तीन विधानसभा चुनावों में एक बार भी जीत दर्ज नहीं कर सकी। इन सीटों पर बूथ स्तर की समीक्षा, जातीय समीकरण और संभावित उम्मीदवारों का नया सर्वे कराया जाएगा।

UP 2027: यूपी में अमित शाह का चुनावी ब्लूप्रिंट 2027 तैयार

टिकट वितरण में होगा प्रदर्शन का मूल्यांकन

भाजपा संगठन इस बार तीन या उससे अधिक चुनाव लड़ चुके नेताओं के प्रदर्शन की विस्तृत समीक्षा करेगा। उम्मीदवारों के पिछले चुनावों का वोट प्रतिशत, जीत-हार का अंतर, बूथ स्तर पर प्रदर्शन और संगठन में सक्रियता जैसे पहलुओं का मूल्यांकन किया जाएगा। पार्टी का संकेत है कि केवल पुराने चेहरे होने से टिकट नहीं मिलेगा, बल्कि जीत की संभावना सबसे महत्वपूर्ण मानदंड होगी।

UP 2027: राम मंदिर विवाद और विपक्ष की रणनीति भी चुनौती

भाजपा के सामने अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा विवाद भी एक राजनीतिक चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। दूसरी ओर समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव रथ यात्रा और पीडीए अभियान के जरिए जनसंपर्क बढ़ाने की तैयारी में हैं। कांग्रेस भी अपनी संगठनात्मक गतिविधियां तेज कर रही है। ऐसे में भाजपा मिशन-2027 के तहत संगठन, उम्मीदवार चयन और सीटवार रणनीति के जरिए चुनावी बढ़त बनाए रखने की कोशिश में जुट गई है।

 

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