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‘ईरान वादे निभाए, तभी आगे बढ़ेगी बातचीत’, फिलीपींस से मार्को रुबियो का सख्त संदेश

ईरान पर अमेरिका का बड़ा आरोप

US Iran Tensions: अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने ईरान पर आरोप लगाया है कि उसने पिछले महीने अमेरिका के साथ हुई बातचीत में किए गए वादों को पूरा नहीं किया। उनका कहना है कि ईरान बातचीत को गंभीरता से नहीं ले रहा है। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ईरान को Strait of Hormuz पर नियंत्रण मिल गया, तो यह अंतरराष्ट्रीय व्यापार और समुद्री आवाजाही की स्वतंत्रता के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।

डिप्लोमेसी के जरिए समाधान चाहता है अमेरिका

फिलीपींस की राजधानी मनीला में आयोजित ASEAN पोस्ट-मिनिस्टीरियल कॉन्फ्रेंस में मार्को रुबियो ने कहा कि अमेरिका अब भी बातचीत के जरिए विवाद का समाधान चाहता है। उन्होंने कहा कि अमेरिका हमेशा डिप्लोमेसी का समर्थन करता है और मतभेदों को बातचीत के माध्यम से सुलझाने के लिए तैयार है।रुबियो ने कहा, “मैं फिर से कहना चाहता हूं कि अमेरिका हमेशा डिप्लोमेसी के लिए प्रतिबद्ध रहा है। हम खुले विचारों के साथ बातचीत के जरिए मतभेद खत्म करने के पक्ष में हैं। ईरान के मामले में भी हमारा यही रुख है।”

बातचीत के वादे पूरे नहीं किए

मार्को रुबियो ने बताया कि ईरान ने अमेरिका से सीधे (Direct) और परोक्ष (Indirect), दोनों तरीकों से संपर्क किया था। हालांकि, बातचीत के दौरान किए गए अपने वादों को वह पूरा नहीं कर पाया।उन्होंने यह भी कहा कि ईरान का प्रभाव Strait of Hormuz से आगे बढ़कर Bab el-Mandeb Strait तक दिखाई दे रहा है। इसी बीच हूती विद्रोहियों ने इस समुद्री मार्ग से होने वाले सऊदी अरब के व्यापार को रोकने का ऐलान किया है।

अमेरिका ने दी सख्त चेतावनी

रुबियो ने कहा, “फिलहाल सबसे बड़ी समस्या यह है कि ईरान बातचीत को गंभीरता से नहीं ले रहा है। अगर वह गंभीरता दिखाता है, तो अमेरिका भी पूरी गंभीरता से बातचीत करेगा। लेकिन अगर ऐसा नहीं हुआ, तो हम अपने और अपने सहयोगी देशों के हितों की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाएंगे।”

होर्मुज पर नियंत्रण की मांग का विरोध

मार्को रुबियो ने Strait of Hormuz से गुजरने वाले जहाजों के ट्रैफिक पर नियंत्रण की ईरान की मांग का भी विरोध किया। उन्होंने कहा कि यह एक अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग है और किसी एक देश को इस पर नियंत्रण का अधिकार नहीं मिल सकता।रुबियो ने कहा, “मामला बिल्कुल साफ है। ईरान ऐसे अधिकार की मांग कर रहा है, जो उसे किसी भी मौजूदा अंतरराष्ट्रीय कानूनी व्यवस्था के तहत नहीं मिला है। वह होर्मुज से गुजरने वाले ट्रैफिक को नियंत्रित करना चाहता है, जबकि यह एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग है और इस पर किसी एक देश का नियंत्रण नहीं हो सकता।”

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