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मुख्यमंत्री धामी की बड़ी पहल, उत्तराखंड में बनेगा संस्कृत आयोग 

Dehradun: मुख्यमंत्री धामी की बड़ी पहल, उत्तराखंड में बनेगा संस्कृत आयोग 
Dehradun: उत्तराखंड केे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी शिक्षा के क्षेत्र में ठोस कदम उठा रहे हैं।मुख्यमंत्री ने राज्य में संस्कृत आयोग बनाने की आवश्यकता पर बल दिया है।हाल में उनकी सरकार ने राज्य के मदरसा बोर्ड को भंग किया तो इसकी देशभर में चर्चा रही। सरकार के इस फैसले के बाद मदरसे केवल धार्मिक शिक्षा के केंद्र नहीं रहेंगे, बल्कि उनमें गणित, विज्ञान, अंग्रेजी और कंप्यूटर जैसे आधुनिक विषय पढ़ाने होंगे।इसके लिए NCERT आधारित पाठ्यक्रम लागू किया जाएगा। 

क्या चाहते हैं मुख्यमंत्री?

मुख्यमंत्री की स्पष्ट सोच है कि संस्कृत भाषा राष्ट्र की ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक विरासत की आधारशिला है।जन-जन तक इस भाषा के व्यापक प्रचार-प्रसार की आवश्यकता है।वे मानते हैं कि देवभूमि की पहचान भी यहां की समृद्ध सांस्कृतिक व आध्यात्मिक विरासत और संस्कृत भाषा से है। संस्कृत भाषा में यहां के लोगों की प्राचीन काल से ही विशेष रुचि रही है। राज्य सरकार की कोशिश है कि संस्कृत भाषा के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में आगे बढ़ा जाए। 

Dehradun: देशभर से मांगे सुझाव

देवभूमि में संस्कृत आयोग को ठोस रूप में गठित करने के उद्देश्य से सरकार ने देशभर के संस्कृत विद्वानों, शिक्षकों, शोधार्थियों, विश्वविद्यालयों, गुरुकुलों, संस्कृत संस्थानों तथा संस्कृत प्रेमियों से सुझाव आमंत्रित किये हैं। उनसे अनुरोध किया गया वे 10 अगस्त 2026 तक ई-मेल के माध्यम से अपने सुझाव भेज दें।

Dehradun: साकार होती सोच

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पिछले वर्ष यानी दिसंबर 2025 में हरिद्वार में हुए अंतरराष्ट्रीय संस्कृत सम्मेलन के दौरान उच्चस्तरीय संस्कृत आयोग बनाने की आवश्यकता पर बल दिया था।इस वर्ष 15 जुलाई 2026 को एक उच्चस्तरीय बैठक में आयोग के गठन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया।

Dehradun: संस्कृत के प्रति बढ़ेगी रुचि

आशाएं व्यक्त की जा रही हैं कि जनता को जल्दी ही एक उच्चस्तरीय संस्कृत आयोग मिलेगा।इस आयोग के बाद राज्य में संस्कृत स्कूलों या यानी गुरुकुलों की स्थिति मजबूत होगी। बच्चों की संस्कृत के अध्ययन में रुचि बढ़ेगी और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।