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जंतर-मंतर के पास आंदोलनकारियों और पुलिस में फिर झड़प, पत्थरबाजी के बाद आंसू गैस छोड़ी गई; ACP समेत दो पुलिसकर्मी घायल

CJP Protest:

CJP Protest: दिल्ली के जंतर-मंतर के पास बुधवार रात करीब 8:30 बजे छात्रों और पुलिस के बीच एक बार फिर झड़प हो गई। दिल्ली पुलिस के अनुसार, कनॉट प्लेस स्थित टॉल्स्टॉय मार्ग के पास कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पत्थरों और बोतलों से हमला किया, जिसके बाद स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े। घटना में एसीपी विवेक भगत समेत दो पुलिसकर्मी घायल हो गए।

पत्थरबाजी के बाद बढ़ा तनाव

पुलिस के मुताबिक, संसद मार्ग की ओर जाने वाले टी-पॉइंट के पास प्रदर्शन के दौरान अचानक हालात बिगड़ गए। प्रदर्शनकारियों की ओर से कथित रूप से पत्थरबाजी और बोतलें फेंकी गईं, जिसके जवाब में पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल किया। करीब 15 मिनट तक चले तनाव के बाद स्थिति सामान्य हो गई।

CJP Protest: सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो

घटना के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए हैं। इनमें कुछ लोगों के हाथों में लाठियां दिखाई दे रही हैं और पुलिस के साथ धक्का-मुक्की तथा झड़प के दृश्य नजर आ रहे हैं। हालांकि, इन वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

CJP Protest: 20 जुलाई को भी हुई थी झड़प

इससे पहले 20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संसद मार्च के दौरान भी प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई थी। उस समय प्रदर्शनकारी संसद परिसर की ओर बढ़ गए थे, जिसके बाद उन्हें रोकने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया था।

हाईकोर्ट ने CCTV फुटेज सुरक्षित रखने को कहा

इसी आंदोलन के दौरान छात्रों के साथ कथित मारपीट से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को घटना से जुड़े CCTV और अन्य वीडियो फुटेज सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं।

सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी की गई

प्रदर्शन को देखते हुए केंद्र सरकार ने दिल्ली में अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की है। वहीं, दिल्ली पुलिस पहले से दर्ज मामलों की जांच के साथ-साथ बुधवार रात हुई झड़प के घटनाक्रम की भी जांच कर रही है।

खबर इंडिया दखल

जंतर-मंतर पर शुरू हुआ यह आंदोलन शुरुआत में छात्रों के मुद्दों और परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग पर केंद्रित था। लेकिन हाल के दिनों में पुलिस के साथ लगातार झड़प, पत्थरबाजी, सुरक्षा बलों पर हमले और मीडिया कर्मियों के साथ धक्का-मुक्की जैसी घटनाओं ने इसकी दिशा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इन घटनाओं से यह धारणा मजबूत हुई है कि आंदोलन का एक हिस्सा अपने मूल उद्देश्य से भटकता नजर आ रहा है।

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