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हाई-प्रोफाइल और मजबूत गढ़ों के बावजूद उपचुनावों में करना पड़ा हार का सामना

High Profile by Elections:

High Profile by Elections: भारत के राजनीतिक इतिहास की बात करें तो कई हाई-प्रोफाइल उपचुनावों के नतीजे चौंकाने वाले रहे हैं। इन हाई-प्रोफाइल उपचुनावों पर ध्यान केंद्रित करें तो देखा जा सकता है कि कई बड़े नेताओं, वर्तमान मुख्यमंत्रियों और सत्ताधारी पार्टियों को अपने मजबूत गढ़ों में भी हार का सामना करना पड़ा है।

High Profile by Elections: सदन का हिस्सा नहीं थे, इस वजह से हारे उपचुनाव-

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिभुवन नारायण सिंह 1971 में उपचुनाव हार गए थे। किसी सदन का सदस्य होना कितना जरूरी है, यह उनके कार्यकाल के दौरान देखने को मिला। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि 1971 में वह उपचुनाव हार गए थे, क्योंकि उस समय वह किसी भी सदन के सदस्य नहीं थे।

High Profile by Elections: उपचुनावों में पराजय की सूची में ये बड़े नाम हैं शामिल-

सबसे चर्चित चुनावी पराजयों की बात करें तो अक्सर इंदिरा गांधी (रायबरेली, 1977) और डॉ. बी. आर. अंबेडकर (बॉम्बे सिटी नॉर्थ, 1951-52) का जिक्र किया जाता है। हालांकि, दोनों नेताओं को आम चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था।

2023 में कांग्रेस उम्मीदवार ने बीजेपी को दिया था बड़ा झटका-

भाजपा (BJP) के इतिहास पर नजर डालें तो देखा जा सकता है कि 2023 में कांग्रेस उम्मीदवार रविंद्र धंगेकर ने पार्टी को बड़ा झटका दिया था, जब उन्होंने कस्बा पेठ विधानसभा सीट जीत ली थी। उनकी जीत से पहले भाजपा का इस सीट पर लगातार 28 वर्षों तक कब्जा था।

5 बार लगातार लोकसभा सीट जीत चुके थे योगी आदित्यनाथ-

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बनने से पहले योगी आदित्यनाथ लगातार 5 बार गोरखपुर लोकसभा सीट से सांसद चुने गए थे। लेकिन वर्ष 2018 में हुए गोरखपुर लोकसभा उपचुनाव में भाजपा को सपा-बसपा गठबंधन के उम्मीदवार से हार का सामना करना पड़ा

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