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छात्रों की गूंज’ या ‘झूठ की गूंज’? इंदौर में राहुल गांधी के कार्यक्रम पर उठे सवाल, दावा- राहुल से सवाल पूछने वाले छात्र कांग्रेस कार्यकर्ता

Rahul Gandhi

Rahul Gandhi: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी शनिवार को इंदौर में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में युवाओं और छात्रों से संवाद करते नजर आए। कार्यक्रम में शिक्षा, रोजगार, भर्ती परीक्षाओं और पेपर लीक जैसे मुद्दों पर छात्रों ने राहुल गांधी से सवाल किए। लेकिन कार्यक्रम के बाद मंच पर सवाल पूछने वाले कुछ युवाओं की पहचान को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। बीजेपी मध्य प्रदेश के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल ने दावा किया है कि राहुल गांधी से सवाल पूछने वाले कुछ छात्र वास्तव में कांग्रेस और NSUI से जुड़े कार्यकर्ता हैं। इसी दावे को लेकर सोशल मीडिया पर ‘झूठ की गूंज’ हैशटैग के साथ सवाल उठाए जा रहे हैं।

मंच पर सवाल पूछने वालों की पहचान पर विवाद

बीजेपी मध्य प्रदेश की ओर से सोशल मीडिया पर कार्यक्रम के मंच पर राहुल गांधी से सवाल पूछने वाले युवाओं को लेकर पोस्ट साझा किए गए। पार्टी का दावा है कि इनमें कुछ लोग कांग्रेस या NSUI से जुड़े हुए हैं और उन्हें कार्यक्रम में छात्र के तौर पर सवाल पूछने का मौका दिया गया। बीजेपी की ओर से अपने दावे के समर्थन में संबंधित युवाओं की सोशल मीडिया गतिविधियों और राजनीतिक संगठनों से कथित जुड़ाव के स्क्रीनशॉट/जानकारियां साझा किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, इन दावों को खबर में बीजेपी के आरोप के तौर पर देखना जरूरी है। संबंधित युवाओं की ओर से इन पहचान संबंधी दावों पर क्या स्पष्टीकरण दिया गया है, यह अलग से महत्वपूर्ण सवाल है।

Rahul Gandhi: ‘झूठ की गूंज’ के पोस्टर से पहले ही गरमा चुका था माहौल

राहुल गांधी के कार्यक्रम से पहले ही इंदौर में ‘झूठ की गूंज’ नाम से पोस्टर लगाए गए थे। इन पोस्टरों के जरिए राहुल गांधी और कांग्रेस के दावों पर सवाल उठाए गए। कांग्रेस ने इसे बीजेपी से जोड़ते हुए विरोध किया, जबकि बीजेपी की ओर से कहा गया कि यह छात्रों और युवाओं की प्रतिक्रिया है। यानी कार्यक्रम शुरू होने से पहले ही ‘छात्रों की गूंज’ बनाम ‘झूठ की गूंज’ की राजनीतिक बहस शुरू हो चुकी थी।

बीजेपी का दावा क्या है?

बीजेपी के मुताबिक विवाद केवल पोस्टरों तक सीमित नहीं है। पार्टी का आरोप है कि जिस कार्यक्रम को छात्रों के सवालों और युवाओं की आवाज का मंच बताया गया, वहां सवाल पूछने वाले कुछ लोग खुद कांग्रेस या NSUI से जुड़े हुए हैं। यही वजह है कि बीजेपी की ओर से कार्यक्रम की निष्पक्षता पर सवाल उठाए जा रहे हैं। पार्टी का तर्क है कि यदि किसी राजनीतिक संगठन से जुड़े व्यक्ति को आम छात्र के रूप में मंच देकर सवाल पूछवाए गए, तो कार्यक्रम को लेकर दर्शकों के सामने पूरी तस्वीर स्पष्ट होनी चाहिए।

Rahul Gandhi: कांग्रेस ने कार्यक्रम को बताया छात्रों की आवाज का मंच

दूसरी ओर कांग्रेस ने ‘छात्रों की गूंज’ को युवाओं से संवाद का कार्यक्रम बताया है। कार्यक्रम में छात्रों और युवाओं की शिक्षा, रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं और भविष्य से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई। कार्यक्रम से पहले NSUI की ओर से ABVP पदाधिकारियों को भी आमंत्रित किए जाने की रिपोर्ट सामने आई थी। वहीं कार्यक्रम में कांग्रेस के झंडे और चुनाव चिह्न का इस्तेमाल नहीं किए जाने की भी रिपोर्ट सामने आई है।

अब असली सवाल—छात्र कौन और कार्यकर्ता कौन?

पूरे विवाद का सबसे बड़ा सवाल यही है कि राहुल गांधी से मंच पर सवाल पूछने वाले युवाओं की राजनीतिक पहचान क्या है। बीजेपी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से इसे लेकर गंभीर दावे किए हैं, जबकि कार्यक्रम को कांग्रेस ने छात्रों और युवाओं से संवाद का मंच बताया है।

ऐसे में सोशल मीडिया पर चल रही बहस का केंद्र ‘छात्रों की गूंज’ से बदलकर ‘मंच पर सवाल पूछने वाले छात्रों की पहचान’ बन गया है। यदि बीजेपी द्वारा साझा किए गए दस्तावेजों और सोशल मीडिया प्रोफाइल से किसी व्यक्ति का राजनीतिक जुड़ाव स्थापित होता है, तो वह इस विवाद का महत्वपूर्ण पहलू होगा; वहीं संबंधित युवाओं का पक्ष सामने आना भी तस्वीर को पूरा करने के लिए जरूरी होगा।

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