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अंतिम सांस तक अयोध्या नहीं छोड़ूंगा: चढ़ावा विवाद के बाद पहली बार बोले चंपत राय

Ayodhya: अंतिम सांस तक अयोध्या नहीं छोड़ूंगा: चंपत राय

Ayodhya: राम मंदिर चढ़ावा विवाद के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय पहली बार सार्वजनिक रूप से सामने आए। मंगलवार को उन्होंने अयोध्या स्थित तपस्वी छावनी पहुंचकर पीठाधीश्वर जगदगुरु परमहंस आचार्य से मुलाकात की। दोनों के बीच करीब 30 मिनट तक बंद कमरे में चर्चा हुई। मुलाकात के बाद परमहंस आचार्य ने बताया कि उन्होंने चंपत राय से अयोध्या न छोड़ने का आग्रह किया, जिस पर चंपत राय ने भरोसा दिलाया कि वह अंतिम सांस तक अयोध्या नहीं छोड़ेंगे।

परमहंस आचार्य ने जताया समर्थन

मुलाकात के दौरान जगदगुरु परमहंस आचार्य ने चंपत राय के कार्यों की सराहना करते हुए उन्हें “युग ऋषि” बताया। उन्होंने कहा कि राम मंदिर का निर्माण जिस भव्यता और गुणवत्ता के साथ हुआ है, वह सभी की कल्पना से बेहतर है। उन्होंने विश्वास जताया कि चंपत राय ने राम मंदिर आंदोलन और निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, इसलिए उनका अयोध्या में बने रहना आवश्यक है।

Ayodhya: चढ़ावा विवाद के बाद बढ़ा था राजनीतिक विवाद

राम मंदिर में चढ़ावे की कथित धनराशि के गबन का मामला जून के पहले सप्ताह में सामने आया था। इसके बाद विपक्षी दलों ने संसद और उत्तर प्रदेश विधानसभा में इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया। मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने ट्रस्ट की सिफारिश पर विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया। एसआईटी की अंतरिम रिपोर्ट आने के बाद 25 जून को एफआईआर दर्ज की गई और दान की राशि की गिनती तथा कथित गबन की साजिश के आरोप में आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया। यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंच चुका है।

Ayodhya: अंतिम सांस तक अयोध्या नहीं छोड़ूंगा: चंपत राय

आरोपों पर अब तक नहीं दिया विस्तृत जवाब

विवाद बढ़ने के बाद चंपत राय और ट्रस्ट सदस्य अनिल मिश्रा ने अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था। चंपत राय का कहना है कि उन पर लगाए गए आरोप निराधार हैं। उन्होंने अपने सहयोगियों से पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि वह एसआईटी की जांच पूरी होने के बाद ही इस मामले पर विस्तार से प्रतिक्रिया देंगे। फिलहाल उन्होंने सार्वजनिक रूप से आरोपों पर कोई विस्तृत बयान नहीं दिया है। हालांकि, अयोध्या में उनकी मौजूदगी और “अंतिम सांस तक अयोध्या नहीं छोड़ने” का संदेश इस पूरे विवाद के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है।