Home » राष्ट्रीय » मोहन भागवत ने Gen Z को समझाया ‘धर्म’ का असली मतलब, बोले- Religion अलग है; जानिए दोनों में क्या है बड़ा अंतर

मोहन भागवत ने Gen Z को समझाया ‘धर्म’ का असली मतलब, बोले- Religion अलग है; जानिए दोनों में क्या है बड़ा अंतर

Mohan Bhagwat

Mohan Bhagwat: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने उज्जैन में आयोजित ‘युवा धर्म संसद-2026’ में Gen Z के करीब 1,700 प्रतिभागियों को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने ‘धर्म’ और अंग्रेजी के ‘Religion’ शब्द के बीच अंतर समझाया। भागवत ने कहा कि आम तौर पर दोनों को एक-दूसरे का पर्याय मान लिया जाता है, जबकि भारतीय संदर्भ में धर्म की अवधारणा इससे कहीं व्यापक है। उन्होंने युवाओं से कहा कि धर्म को समझने के लिए पहले मन में बने पूर्वाग्रहों से बाहर निकलना जरूरी है।

धर्म और Religion को एक नहीं मानना चाहिए

मोहन भागवत के मुताबिक, ‘धर्म’ और ‘Religion’ को समान अर्थ वाला नहीं माना जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि धर्म का संबंध केवल किसी विशेष पंथ, पूजा-पद्धति या धार्मिक पहचान से नहीं है। उनके अनुसार धर्म अस्तित्व के साथ जुड़ा हुआ सिद्धांत है, जो व्यक्ति के आचरण और कर्तव्यों को दिशा देता है। उन्होंने यह भी कहा कि अंग्रेजी भाषा में भारतीय अवधारणा ‘धर्म’ के लिए कोई बिल्कुल सटीक समानार्थी शब्द नहीं है, इसलिए ऐतिहासिक रूप से ‘Religion’ शब्द का इस्तेमाल किया जाता रहा है।

Mohan Bhagwat: ‘धर्म’ सत्य, करुणा और अनुशासन से जुड़ा

भागवत ने धर्म को सत्य, करुणा, पवित्रता और आत्म-अनुशासन से जोड़कर समझाया। उन्होंने कहा कि धर्म कोई ऐसी चीज नहीं है जिसे केवल किताबों या चर्चाओं के जरिए खोजा जाए, बल्कि उसे पहचाना और अपने आचरण में उतारा जाना चाहिए। उन्होंने धर्म को ऐसा सिद्धांत बताया जो सृष्टि को बनाए रखने, सभी के विकास और अपने कर्तव्यों को समझने की दिशा देता है।

‘जहां Religion बांधता है, धर्म मुक्त करता है’

भागवत ने कहा कि धर्म Religion से ऊपर है। उनके अनुसार Religion का संबंध किसी व्यवस्था या विशेष धार्मिक परंपरा से हो सकता है, जबकि धर्म व्यक्ति को व्यापक जिम्मेदारी और मुक्ति की दिशा में ले जाता है। उन्होंने कहा कि जब Religion धर्म के आधार से अलग हो जाता है तो वह संकीर्णता और सांप्रदायिक टकराव का कारण बन सकता है। उन्होंने युवाओं से अपनी परंपराओं के प्रति प्रतिबद्ध रहते हुए दूसरे लोगों की पूजा-पद्धतियों का सम्मान करने की भी अपील की।

Mohan Bhagwat: भारतीय संदर्भ में धर्मनिरपेक्षता को भी समझाया

संघ प्रमुख ने भारतीय और पश्चिमी संदर्भ में धर्मनिरपेक्षता की अवधारणा का अंतर भी बताया। उन्होंने कहा कि भारत में राज्य की परंपरा अलग-अलग आस्थाओं के बीच भेदभाव न करने की रही है और उनके अनुसार यही ‘पंथ-निरपेक्षता’ की भारतीय समझ है। उन्होंने कहा कि पश्चिम में सेक्युलरिज्म की अवधारणा का विकास शासकों और धार्मिक संस्थाओं के बीच संघर्ष की पृष्ठभूमि में हुआ, इसलिए उसे भारतीय संदर्भ में उसी तरह नहीं देखा जा सकता।

प्रकृति, धन और परिवार को भी धर्म से जोड़ा

भागवत ने धर्म को केवल आध्यात्मिक विषय तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने प्रकृति की रक्षा को मानव का कर्तव्य बताते हुए जंगलों के विनाश और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने को अधर्म बताया। इसके साथ ही उन्होंने धन कमाने और जीवन में संतुलन पर भी बात की। उन्होंने कहा कि जरूरत से अधिक धन जुटाने की होड़ में परिवार और समाज की जिम्मेदारियों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। उनके मुताबिक विकास ऐसा होना चाहिए जिससे व्यक्ति के साथ समाज का भी कल्याण हो।

ये भी पढ़ें…राधा अष्टमी पर ऐसे करें राधा-कृष्ण की पूजा, जानें शुभ मुहूर्त से लेकर व्रत पारण तक की पूरी विधि