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पहली बार व्रत करने वाली महिलाएं जानें हरियाली तीज की पूजा विधि? पढ़िए क्यों है झूला झूलने की परंपरा?

Hariyali Teej: Women fast for first time learn the Hariyali Teej puja rituals

Hariyali Teej: सावन शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि (15 अगस्त) शनिवार को हरियाली तीज का त्योहार मनाया जाएगा। सुहागिन महिलाएं इस त्योहार को धूमधाम से मनाती हैं। जो महिलाएं पहली बार हरियाली तीज का व्रत रख रही हैं, उनको पूजा विधि और उसके महत्व के बारे में जान लेना चाहिए। मनचाहे वर के लिए कुंवारी कन्याएं भी व्रत रख सकती हैं।

महिलाएं रखती है भगवान शिव-माता पार्वती का व्रत

हरियाली तीज पर सुहागिन महिलाएं अखंड सौभाग्य की कामना से भगवान शिव और माता पार्वती का व्रत रखती हैं। ऐसे में जो महिलाएं पहली बार व्रत रख रही हैं, उनको सुबह जल्दी उठना चाहिए। स्नानादि करके उनको साफ वस्त्र धारण करना चाहिए। महिलाओं को हाथों में मेहंदी रचाना चाहिए। हरियाली तीज के लिए महिलाओं के मायके से सिंधारा (साड़ी, चूड़ियां, मिष्ठान, शृंगार का सामान आदि) आता है। इस दिन उनको सिंधारा की ही साड़ी पहननी चाहिए। हरे रंग की साड़ी पहनना शुभ माना जाता है। हरियाली तीज पर महिलाओं के लिए सोलह शृंगार करना शुभ माना जाता है। इसे सुहाग का प्रतीक माना जाता है। महिलाओं को संकल्प के साथ व्रत करना चाहिए और शुभ मुहूर्त में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करनी चाहिए। माता पार्वती को शृंगार का सामान अर्पित करना चाहिए और बेलपत्र, जल, फूल आदि भगवान शिव को चढ़ाना चाहिए। इस दिन महिलाएं झूला भी झूलती हैं।

Hariyali Teej: झूला झूलने का खास महत्व

हरियाली तीज के दिन महिलाओं के झूला झूलने का खास महत्व है। यह दिन भगवान शिव और माता पार्वती के मिलन और प्रेम के प्रतीक के तौर पर जाना जाता है। इसी खुशी में महिलाएं झूला झूलती हैं और तीज के पारंपरिक गीत गाती हैं। झूला झूलना व्रत या पूजा के लिए अनिवार्य धार्मिक नियम नहीं है, बल्कि यह लोक परंपरा और उत्सव का हिस्सा है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा में झूला झूलने की विशेष परंपरा है। सुहागिन महिलाएं ही नहीं, कुंवारी कन्याएं भी झूला झूल सकती हैं। इस वर्ष हरियाली तीज का शुभारंग 14 अगस्त (शुक्रवार) की शाम 6:46 से हो जाएगा, जो अगले दिन 15 अगस्त (शनिवार) को शाम 5:28 बजे तक रहेगा। पूजा के लिए 15 अगस्त को सूर्योदय से सुबह 9:08 बजे तक का समय सबसे उत्तम रहेगा।

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