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CJP के संसद मार्च में पुलिस कार्रवाई की जांच करेंगे SC के पूर्व जज, आज बनेगी हाई-पावर कमेटी

पुलिस एक्शन पर सुप्रीम कोर्ट की कमेटी

CJP Parliament March: ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) की ओर से 20 जुलाई को किए गए संसद मार्च के दौरान छात्र प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की कार्रवाई के मामले की जांच अब सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में होगी। सुप्रीम कोर्ट बुधवार को एक हाई-पावर कमेटी के गठन का आदेश जारी करेगा। इस कमेटी की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के एक रिटायर्ड जज करेंगे।कमेटी में हाई कोर्ट के एक पूर्व चीफ जस्टिस और एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को भी शामिल किया जाएगा। इसका मुख्य काम प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई को लेकर लगाए गए आरोपों और पुलिस की ओर से लगाए गए जवाबी आरोपों की जांच करना होगा।

बल प्रयोग पर भी देगी सुझाव

कमेटी सिर्फ घटना की जांच ही नहीं करेगी, बल्कि प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए पुलिस और सुरक्षा बलों की ओर से बल प्रयोग किए जाने के तरीके पर भी दिशा-निर्देश सुझाएगी।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची तथा वी. मोहना की पीठ ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के एक पूर्व जज और हाई कोर्ट के एक रिटायर्ड चीफ जस्टिस ने कमेटी में शामिल होने के लिए सहमति दे दी है।हालांकि, पीठ ने अभी उनके नाम सार्वजनिक नहीं किए हैं। कोर्ट का कहना है कि नाम सामने आने के बाद लोग उनके पक्ष या विरोध में पहले से राय बना सकते हैं।

CBI के पूर्व डायरेक्टर या पूर्व DGP?

पीठ ने यह भी बताया कि CBI के एक पूर्व डायरेक्टर और एक राज्य के पूर्व DGP ने भी कमेटी का हिस्सा बनने के लिए अपनी सहमति दी है। इसके बाद अदालत ने याचिकाकर्ताओं के वकील से पूछा कि जांच के लिए CBI के पूर्व डायरेक्टर को शामिल करना ज्यादा उचित होगा या राज्य के पूर्व DGP को।सुप्रीम कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकील एन. हरिहरन, वृंदा ग्रोवर, शादान फरासत और गोपाल शंकरनारायणन से मंगलवार शाम तक कमेटी के काम के दायरे को लेकर अपने सुझाव देने को कहा है।

बुधवार को जारी होगा आदेश

पीठ ने कहा कि सभी पक्षों से मिले सुझावों पर विचार करने के बाद बुधवार को कमेटी के गठन और उसके कामकाज को लेकर आदेश जारी किया जाएगा।अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि कमेटी किसी भी पीड़ित व्यक्ति को अपनी बात रखने का तुरंत अवसर देगी। सुप्रीम कोर्ट कमेटी की सिफारिशों का इंतजार करेगा और सभी पक्षों को सुनने के बाद जरूरत के अनुसार अंतरिम आदेश भी जारी करेगा।

पुलिस के हलफनामे पर भी सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले से जुड़ी एक अन्य याचिका पर भी नोटिस जारी किया है। इस याचिका में उस विरोध प्रदर्शन के आयोजकों की जवाबदेही तय करने की मांग की गई है, जिसके दौरान हिंसा हुई और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचने की बात सामने आई थी।प्रदर्शन के दौरान कुछ लोग घायल भी हुए थे। याचिका में एक घायल व्यक्ति के लिए मुआवजे की मांग भी की गई है। बताया गया कि वह एक कलाकार है और आंख में चोट लगने के बाद अब अपनी रोजी-रोटी कमाने में सक्षम नहीं है।

पैलेट गन के इस्तेमाल की भी होगी जांच

इस मामले में दिल्ली पुलिस की ओर से दाखिल हलफनामे में पैलेट गन के इस्तेमाल का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं है। आशंका जताई गई है कि प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन का इस्तेमाल किसी दूसरी केंद्रीय सुरक्षा बल की ओर से किया गया हो सकता है।सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रस्तावित कमेटी इस पहलू की भी जांच करेगी। कमेटी यह भी सुझाव देगी कि घायल लोगों को अंतरिम मुआवजा दिया जाना चाहिए या नहीं।इस तरह सुप्रीम कोर्ट की बनाई जाने वाली कमेटी पुलिस कार्रवाई, बल प्रयोग, पैलेट गन के इस्तेमाल, प्रदर्शनकारियों की शिकायतों और मुआवजे से जुड़े सभी महत्वपूर्ण पहलुओं की जांच करेगी।

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