YOGI GOVERNMENT: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले कानून-व्यवस्था एक बार फिर बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन रही है। बीजेपी योगी आदित्यनाथ सरकार के कार्यकाल को ‘जीरो टॉलरेंस’ वाली नीति का उदाहरण बता रही है, जबकि विपक्ष सरकार पर अपराध को लेकर सवाल उठाता रहा है। ऐसे में 2017 से पहले और योगी सरकार के कार्यकाल के बाद की तस्वीर को सरकारी आंकड़ों के आधार पर समझना जरूरी है।
2017 से पहले यूपी में अपराधों की तस्वीर कैसी थी?
योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने से पहले यानी 2016 में उत्तर प्रदेश में कई गंभीर अपराधों के मामले देश में सबसे ज्यादा दर्ज हुए थे। NCRB के अनुसार 2016 में राज्य में 4,889 हत्या के मामले तथा 15,898 अपहरण और अपहरण से जुड़े मामले दर्ज हुए। महिलाओं के खिलाफ अपराध भी बड़ी चुनौती था। 2016 में ऐसे 49,262 मामले दर्ज हुए, जबकि बलात्कार के 4,816 मामले सामने आए। फिर भी हत्या और अपहरण जैसी गंभीर श्रेणियों में देश में सबसे अधिक मामले दर्ज होना उस समय यूपी की कानून-व्यवस्था को लेकर होने वाली राजनीतिक बहस की बड़ी वजह थी।
YOGI GOVERNMENT: योगी राज में कानून-व्यवस्था बनी सबसे बड़ी प्राथमिकता
मार्च 2017 में योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद कानून-व्यवस्था को सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल किया गया। सरकार ने अपराधियों और संगठित गिरोहों के खिलाफ कार्रवाई के लिए गैंगस्टर एक्ट, संपत्ति जब्ती, गैंग की निगरानी और विशेष पुलिस अभियानों पर जोर दिया। योगी सरकार की कानून-व्यवस्था नीति का मूल संदेश रहा: अपराध के खिलाफ जीरो टॉलरेंस।
पुलिसिंग में केवल अपराध होने के बाद कार्रवाई के बजाय अपराधियों की निगरानी, गैंग की पहचान, संपत्ति पर कार्रवाई और अभियोजन को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया। गंभीर मामलों में अदालत से सजा दिलाने के लिए ऑपरेशन कन्विक्शन चलाया गया। इसके तहत पुलिस को विवेचना पूरी करने, वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाने और अभियोजन के साथ बेहतर समन्वय के निर्देश दिए गए।

यूपी बदली हुई तस्वीर की सबसे बड़ी मिसाल हैं ये आँकड़े
योगी सरकार के पक्ष में सबसे मजबूत आंकड़ों में हत्या के मामले शामिल हैं। 2016 में उत्तर प्रदेश में 4,889 हत्या के मामले दर्ज हुए थे। 2024 में यह संख्या घटकर 3,218 रह गई। यानी 2016 के मुकाबले 2024 में हत्या के मामलों में करीब 34 फीसदी दर्ज हुई। अपराध दर के लिहाज से भी तस्वीर बदली है। 2016 में यूपी में हत्या की दर करीब 2.2 प्रति लाख आबादी थी, जबकि 2024 में यह घटकर 1.3 प्रति लाख रह गई। 2024 में राष्ट्रीय औसत करीब 1.9 प्रति लाख था। इसका मतलब है कि आबादी के अनुपात में भी उत्तर प्रदेश की हत्या दर राष्ट्रीय औसत से नीचे रही। कानून-व्यवस्था के लिहाज से यह योगी सरकार के पक्ष में जाने वाला सबसे महत्वपूर्ण आंकड़ा है।\

YOGI GOVERNMENT: अपहरण, दंगे और लूट में भी राष्ट्रीय औसत से बेहतर स्थिति
2024 के NCRB आंकड़ों में सिर्फ हत्या ही नहीं, बल्कि कई अन्य अपराधों में भी उत्तर प्रदेश की अपराध दर राष्ट्रीय औसत से कम रही। अपहरण की अपराध दर 4.9 प्रति लाख रही, जबकि राष्ट्रीय औसत 5.8 था। दंगों की अपराध दर 1.1 प्रति लाख रही, जबकि राष्ट्रीय औसत 2.2 था। इसी तरह लूट की दर 0.5 प्रति लाख रही, जबकि राष्ट्रीय औसत 1.6 था। डकैती के मामले में भी उत्तर प्रदेश की दर बेहद कम रही। चोरी की अपराध दर 18.3 प्रति लाख थी, जबकि राष्ट्रीय औसत 44.3 प्रति लाख था। इस तस्वीर से यह संकेत मिलता है कि 2024 में यूपी की कई प्रमुख अपराध श्रेणियों में आबादी के अनुपात में स्थिति देश के औसत से बेहतर थी।
महिलाओं की सुरक्षा में भी कई मोर्चों पर सुधार
योगी सरकार ने महिला सुरक्षा को कानून-व्यवस्था के प्रमुख हिस्से के रूप में आगे बढ़ाया। 1090 Women Power Line, Mission Shakti और Women and Child Security Organization (WCSO) जैसी व्यवस्थाओं को मजबूत किया गया। 2024 में महिलाओं के खिलाफ अपराध की दर उत्तर प्रदेश में 58.0 प्रति लाख महिला आबादी रही, जबकि राष्ट्रीय औसत 64.6 था। बलात्कार की अपराध दर 2.8 प्रति लाख रही, जबकि राष्ट्रीय औसत 4.3 था। महिलाओं के अपहरण की दर 8.4 रही, जबकि राष्ट्रीय औसत 9.9 था।
YOGI GOVERNMENT: तो क्या ‘गुंडाराज’ पूरी तरह खत्म हो गया?
NCRB के आंकड़े किसी राजनीतिक नारे को सीधे प्रमाणित नहीं करते, लेकिन वे यह जरूर बताते हैं कि योगी सरकार के दौरान कई गंभीर अपराधों के प्रमुख संकेतकों (INDEX) में उत्तर प्रदेश की स्थिति बेहतर हुई है। 2016 के मुकाबले 2024 में हत्या के मामलों में करीब एक-तिहाई कमी, हत्या दर का 2.2 से घटकर 1.3 होना और अपहरण, दंगा, लूट, चोरी तथा बलात्कार जैसे अपराधों की दर का राष्ट्रीय औसत से नीचे रहना सरकार के ‘जीरो टॉलरेंस’ मॉडल के पक्ष में मजबूत आंकड़ा प्रस्तुत करता है।
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