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कॉकरोच विकल्प क्यों नहीं देना चाहते, कांग्रेस और केजरीवाल को लेकर क्या राय है?

Opinion: कॉकरोच विकल्प क्यों नहीं देना चाहते, कांग्रेस और केजरीवाल को लेकर क्या राय है?
Opinion: कॉकरोच विकल्प क्यों नहीं देना चाहते, कांग्रेस और केजरीवाल को लेकर क्या राय है?
Opinion: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने 10 अक्टूबर को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ बड़े प्रदर्शन का ऐलान किया है। पार्टी के नेता देश के युवाओं को दिशा देने और व्यवस्था में सुधार की बड़ी-बड़ी बातें कर रहे हैं। यह उनका लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन समझ में नहीं आता है कि जब वे युवाओं को कोई राजनीतिक विकल्प नहीं देना चाहते या विकल्प देने की स्थिति में नहीं हैं, तो फिर युवा वर्ग क्या सोचकर लंबे समय तक उनके पीछे खड़ा रहेगा ?  ठीक है कि उन्हें मौजूदा केंद्र सरकार में खोट दिखाई देता है, प्रधानमंत्री मोदी उन्हें फूटी आँख नहीं सुहाते हैं, तो फिर देश की युवा पीढ़ी को यह क्यों नहीं बताते कि कौन-सी पार्टी मौजूदा केंद्र सरकार का बेहतर विकल्प साबित होगी? भविष्य में कौन-सी पार्टी शिक्षा, रोजगार आदि की दृष्टि से लोकप्रिय सरकार दे सकती है? क्या जनभावनाओं के अनुरूप व्यवस्था में आमूल-चूल परिवर्तन का काम महज किसी प्रेशर ग्रुप से संभव हो पाएगा? क्या इसके लिए किसी राजनीतिक विकल्प की जरूरत नहीं है?

Gen Z  को गुमराह नहीं किया जा सकता

किसी भी आंदोलन को लंबे समय तक चलाने के लिए नेतृत्व की नीति और नीयत की विश्वसनीयता बहुत मायने रखती है। CJP नेता भलीभांति जान लें कि इस देश की युवा पीढ़ी जिसे Gen Z कहा जा रहा है, किसी भी बात को तर्क और तथ्यों की कसौटी पर परखने की क्षमता रखती है। उसे गुमराह नहीं किया जा सकता है। वह राजनेताओं की नीति और नीयत को भी बखूबी समझती है। सीजेपी नेताओं को युवाओं को दिशा देने से पहले इस दिशा में ज्यादा सोचने की जरूरत है कि उनकी निष्ठा पर युवा पीढ़ी के बीच से ही सवाल उठने लगे हैं। युवा खुलेआम कह रहे हैं कि प्रदर्शन के नाम पर उनका राजनीतिक इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। Gen Z के बीच से यह भी सवाल उठ रहा है कि जब ज्ञानेश कुमार के मुख्य चुनाव आयुक्त का दायित्व संभालने से पहले ही महाराष्ट्र, हरियाणा और दिल्ली में विधानसभा चुनाव संपन्न हो चुके थे, तो फिर उन पर इन राज्यों में वोट चोरी करवाने के आरोप किस आधार पर लगाए जा सकते हैं? युवा पीढ़ी इसे गुमराह करने की नीयत ठहरा रही है।

Opinion: नीति और नीयत पर सवाल

CJP नेताओं की नीयत पर पहले भी सवाल उठ चुके हैं। हालांकि वे आज भी कॉकरोच का नकाब पहने हुए हैं, लेकिन CJP से अलग होकर बने गुट ‘CJP-Democratic’ के नेता ब्रह्मभट्ट ने अभिजीत दीपके पर आंदोलन को राजनीतिक रंग देने और इसे ‘टीम केजरीवाल’ बनाने का आरोप लगाया। ब्रह्मभट्ट ही नहीं, बल्कि राजनीतिक गलियारों और मीडिया में भी यह चर्चा होती रही है कि सीजेपी नेता ‘केजरीवाल की बी-टीम’ के तौर पर काम कर रहे हैं।चर्चा यह भी होती है कि कॉकरोच जनता पार्टी की टीम के कई सदस्यों के तार आम आदमी पार्टी से जुड़े रहे हैं। वोट चोरी के मुद्दे पर मुखर कांग्रेस भी महसूस करती है कि कॉकरोच का झुकाव अरविंद केजरीवाल के पक्ष में है, इसीलिए कांग्रेस उसे आधिकारिक समर्थन देने से कतराती रही है। 

व्यावहारिक रास्ता क्या है?

 यदि कॉकरोच जनता पार्टी  वास्तव में युवाओं को कोई व्यावहारिक दिशा दिखाना चाहती है, तो उसे सबसे पहले अपने ऊपर उठते सवालों का जवाब देना होगा। उसके नेताओं को खुलकर कहना होगा कि उनका किसी पार्टी के प्रति झुकाव नहीं है, यह उनके व्यवहार में भी साफतौर पर दिखाई देना चाहिए। कहीं पेपर लीक पर मुखरता और कहीं उदासीनता की जाएगी, तो सवाल उठेंगे ही।यह सही है कि किसी तात्कालिक मुद्दे पर भीड़ अवश्य जुटाई जा सकती है, लेकिन लंबे समय तक जन आंदोलन चलाने के लिए ठोस वैचारिक एजेंडे के साथ ही ऐसे मजबूत संगठन की जरूरत भी होती है जिसकी जड़ें दूर-दराज के क्षेत्रों तक फैली हुई हों। अकेले जंतर-मंतर पर आंदोलन कर देने भर से व्यवस्था में बदलाव की बात करना कैसे व्यावहारिक कहा जा सकता है? जनता की समस्याओं के समाधान और व्यवस्था में बदलाव के लिए राजनीतिक विकल्प बेहतर माना जाता है।आखिर कॉकरोच इससे कतरा क्यों रहे हैं? क्या उनमें इतनी क्षमता नहीं या फिर उनकी राजनीतिक निष्ठा किसी ऐसी खास पार्टी के प्रति है जो मौजूदा सरकार के खिलाफ विकल्प बन सकती है?  जो भी हो स्थिति उन्हें स्पष्ट कर देनी चाहिए। यही उनके लिए बेहतर भी होगा।