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बंगाल SIR विवाद पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, चुनाव आयोग से पूछा- कितने वोटरों के नाम काटे

Supreme Court

Supreme Court: पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर विवाद अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने के आरोपों पर अदालत ने चुनाव आयोग से विस्तृत आंकड़े मांगे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि मतदाता सूची से जुड़े सभी मामलों का निपटारा 2029 के लोकसभा चुनाव से काफी पहले हो जाना चाहिए, ताकि पात्र मतदाताओं को मतदान के अधिकार से वंचित न होना पड़े मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ कर रही है। याचिकाकर्ताओं की ओर से दावा किया गया कि करीब 38 लाख अपीलें दाखिल हुई हैं। इनमें लगभग 7 लाख अपीलें उन लोगों की हैं, जिनके नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से मांगी पूरी जानकारी

अदालत ने चुनाव आयोग से पूछा कि अपील ट्रिब्यूनल के सामने कितने मामले लंबित हैं और कितनी अपीलों का निपटारा हो चुका है। कोर्ट ने यह भी जानना चाहा कि हटाए गए नामों को वापस जोड़ने के लिए कितनी अपीलें दाखिल हुई हैं और कितने मामलों में मतदाता सूची में नाम जोड़ने पर आपत्ति दर्ज की गई है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने कुछ सीटों का उदाहरण देते हुए कहा कि जहां जीत-हार का अंतर कुछ सैकड़ों वोटों का रहा, वहां हजारों नाम हटाए जाने का दावा किया गया है। मुर्शिदाबाद में भी बड़ी संख्या में नाम हटने की बात अदालत के सामने रखी गई।

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Supreme Court: 2029 चुनाव से पहले निपटाने होंगे सभी मामले

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अपीलों की प्रक्रिया जल्द पूरी होनी चाहिए। अदालत ने खास तौर पर उन लोगों के मामलों को प्राथमिकता देने पर जोर दिया, जिनके नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। याचिकाकर्ताओं के मुताबिक, करीब 38 लाख अपीलों में बड़ी संख्या ऐसे मामलों की है, जिनमें मौजूदा मतदाताओं के नाम जोड़ने पर आपत्ति की गई है। उनका कहना है कि नाम हटाए गए लोगों की अपीलों का पहले निपटारा होना जरूरी है, क्योंकि आगामी नगरपालिका और पंचायत चुनावों के साथ 2029 का लोकसभा चुनाव भी सामने है।

चुनाव आयोग ने पोर्टल की दिक्कत दूर करने का दिया भरोसा

चुनाव आयोग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता डीएस नायडू ने अदालत को बताया कि ट्रिब्यूनल के साथ बैठकें की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि पोर्टल से जुड़ी कुछ तकनीकी समस्याएं हैं और इन्हें व्यवस्थित करने के सुझाव अगले सप्ताह तक अदालत के सामने रखे जाएंगे। कोर्ट ने आयोग से यह भी जानकारी मांगी कि अपील स्वीकार होने के बाद मतदाता सूची में नाम दोबारा जोड़ने के लिए क्या प्रक्रिया अपनाई जाएगी। याचिकाकर्ताओं ने मांग की कि नाम जुड़ने वाले मतदाताओं की सप्लीमेंटरी सूची समय पर जारी की जाए, ताकि आगामी चुनावों में पात्र नागरिक अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर सकें।

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