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साइबर लिटरेसी: बच्चों की फोटो ऑनलाइन शेयर करना पड़ सकता है भारी, पुलिस ने बताए बचाव के 10 तरीके

बच्चों की फोटो पोस्ट करने से पहले ये जानें

Child Online Safety: आज के समय में सोशल मीडिया लोगों की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। माता-पिता भी अपने बच्चों से जुड़े खास पलों को सोशल मीडिया पर शेयर करते रहते हैं। स्कूल के कार्यक्रम, छुट्टियों की तस्वीरें, जन्मदिन, बच्चों की उपलब्धियां या रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े खास पल अक्सर फेसबुक, इंस्टाग्राम और दूसरे प्लेटफॉर्म पर पोस्ट किए जाते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि बच्चों की यही तस्वीरें और वीडियो उनकी सुरक्षा के लिए खतरा बन सकते हैं?

दरअसल, एक बार कोई फोटो या वीडियो इंटरनेट पर डालने के बाद उस पर पूरी तरह से नियंत्रण रखना मुश्किल हो जाता है। कोई दूसरा व्यक्ति उसे डाउनलोड करके गलत तरीके से इस्तेमाल कर सकता है। आज जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डीपफेक जैसी तकनीक तेजी से बढ़ रही हैं, तब यह खतरा और गंभीर हो गया है। फोटो में दिखाई देने वाली छोटी-सी जानकारी, जैसे बच्चे का नाम, स्कूल या लोकेशन, किसी अपराधी के लिए काफी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

इसी खतरे को ध्यान में रखते हुए हाल ही में असम पुलिस ने बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर एडवाइजरी जारी की थी। ‘इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर’ यानी I4C ने भी स्कूलों और माता-पिता से बच्चों से जुड़ी जानकारी सोशल मीडिया पर साझा करते समय सावधानी बरतने की अपील की है।

इसी विषय को लेकर ‘साइबर लिटरेसी’ में आज समझते हैं कि बच्चों की तस्वीरें ऑनलाइन शेयर करने से कौन-कौन से खतरे हो सकते हैं और माता-पिता उनकी डिजिटल सुरक्षा को कैसे मजबूत कर सकते हैं।

Child Online Safety: बच्चों की फोटो पोस्ट करने से पहले ये जानें
बच्चों की फोटो पोस्ट करने से पहले ये जानें
Child Online Safety: ‘शेयरेंटिंग’ क्या है?

साइबर सिक्योरिटी एडवाइजर और उत्तर प्रदेश पुलिस से जुड़े विशेषज्ञ राहुल मिश्रा के मुताबिक, बच्चों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर करना आज बहुत आम हो गया है। इस आदत के लिए ‘शेयरेंटिंग’ शब्द का इस्तेमाल किया जाता है। यह शब्द ‘शेयरिंग’ और ‘पेरेंटिंग’ को मिलाकर बनाया गया है।

साल 2012 में ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ ने इस शब्द का इस्तेमाल किया था। इसमें माता-पिता अपने बच्चों से जुड़े खास पलों, उनकी उपलब्धियों और रोजमर्रा की गतिविधियों की तस्वीरें या वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करते हैं।

McAfee के साल 2018 के ‘द एज ऑफ कंसेंट’ सर्वे में भी बच्चों की ऑनलाइन प्राइवेसी को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई थी। सर्वे के अनुसार, भारत में ज्यादातर माता-पिता बच्चों की ऑनलाइन प्राइवेसी और उससे जुड़े संभावित खतरों से परिचित होने के बावजूद उनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर करते हैं।

सर्वे में सामने आया कि 98 फीसदी माता-पिता बच्चों की ऐसी तस्वीरें भी पोस्ट करते हैं, जो बड़े होने के बाद उनके लिए शर्मिंदगी का कारण बन सकती हैं। वहीं, 40 फीसदी से ज्यादा माता-पिता रोजाना कम से कम एक बार बच्चे की फोटो या वीडियो शेयर करते हैं। करीब 79 फीसदी माता-पिता पब्लिक अकाउंट पर बच्चों की तस्वीरें पोस्ट करते हैं, जिससे उनकी प्राइवेसी और डेटा सुरक्षा का जोखिम बढ़ जाता है।

क्या बच्चों की फोटो शेयर करना सुरक्षित है?

बच्चों की फोटो सोशल मीडिया पर शेयर करने को पूरी तरह सुरक्षित नहीं माना जा सकता। किसी तस्वीर के साथ बच्चे का नाम, स्कूल, लोकेशन या दूसरी निजी जानकारी अनजाने में सार्वजनिक हो सकती है।भले ही माता-पिता का इरादा सिर्फ यादें साझा करने का हो, लेकिन भविष्य में इन तस्वीरों और जानकारियों का गलत इस्तेमाल होने की आशंका बनी रहती है।

बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा कैसे बढ़ाएं
बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा कैसे बढ़ाएं
Child Online Safety: फोटो से जुड़े ये साइबर खतरे

राहुल मिश्रा के अनुसार, बच्चों की ऑनलाइन तस्वीरों के जरिए साइबर अपराधी उनकी पहचान, लोकेशन और दूसरी निजी जानकारियों का गलत इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे कई तरह के साइबर जोखिम पैदा हो सकते हैं।

बच्चों की ऑनलाइन फोटो से जुड़े प्रमुख खतरे हैं:

  1. AI मॉफिंग
  2. फेक प्रोफाइल
  3. डीपफेक
  4. पहचान की चोरी
  5. ऑनलाइन ग्रूमिंग
  6. साइबर बुलिंग
  7. लोकेशन ट्रैकिंग
  8. ब्लैकमेलिंग
  9. डेटा का गलत इस्तेमाल
  10. AI से तैयार की गई आपत्तिजनक तस्वीरें

सोर्स: राहुल मिश्रा, साइबर सिक्योरिटी एडवाइजर, उत्तर प्रदेश पुलिस

क्या बच्चों की फोटो बिल्कुल शेयर नहीं करनी चाहिए?

ऐसा नहीं है कि बच्चों की कोई भी तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर नहीं की जा सकती। लेकिन इसे लेकर सावधानी बेहद जरूरी है।माता-पिता को कोशिश करनी चाहिए कि फोटो केवल प्राइवेट या ‘ओनली फ्रेंड्स’ जैसी प्राइवेसी सेटिंग के साथ ही शेयर की जाए। ऐसी तस्वीरों से बचना चाहिए जिनसे बच्चे की पहचान, स्कूल, लोकेशन, स्वास्थ्य या दूसरी निजी जानकारी सामने आती हो।

बच्चों की फोटो से जुड़े साइबर खतरे जानें
बच्चों की फोटो से जुड़े साइबर खतरे जानें
Child Online Safety: बच्चों की ये जानकारी ऑनलाइन न डालें

बच्चों की फोटो पोस्ट करते समय यह देखना जरूरी है कि तस्वीर में कोई संवेदनशील जानकारी दिखाई न दे। उदाहरण के लिए स्कूल का नाम, घर का पता या बच्चे का पूरा नाम तस्वीर में नजर नहीं आना चाहिए।इसके अलावा फोटो का बैकग्राउंड भी ध्यान से देखें और सोशल मीडिया की फ्रेंड लिस्ट में केवल भरोसेमंद लोगों को ही शामिल करें।

बच्चों से जुड़ी इन संवेदनशील जानकारियों को ऑनलाइन शेयर करने से बचें:

  1. बच्चे का पूरा नाम
  2. जन्मतिथि
  3. स्कूल का नाम
  4. क्लास और सेक्शन
  5. घर का पता
  6. मोबाइल नंबर
  7. आधार या अन्य पहचान पत्र
  8. लाइव लोकेशन
  9. रोजाना की दिनचर्या

सोर्स: राहुल मिश्रा, साइबर सिक्योरिटी एडवाइजर, उत्तर प्रदेश पुलिस

स्कूल की पोस्ट से भी बढ़ सकता है खतरा

सिर्फ माता-पिता ही नहीं, स्कूलों की ओर से सोशल मीडिया पर डाली जाने वाली बच्चों की तस्वीरें और वीडियो भी जोखिम पैदा कर सकते हैं। स्कूलों के सोशल मीडिया अकाउंट अक्सर पब्लिक होते हैं। ऐसे में कोई अपराधी पोस्ट देखकर बच्चे की निजी जानकारी, स्कूल की टाइमिंग और उसकी रोजाना की गतिविधियों के बारे में पता लगा सकता है।ऐसी जानकारी का गलत इस्तेमाल अपहरण जैसी गंभीर घटनाओं में भी हो सकता है। इसलिए स्कूलों को बच्चों की प्राइवेसी और सुरक्षा को सबसे ज्यादा प्राथमिकता देनी चाहिए।

Child Online Safety: स्कूलों के लिए जरूरी सावधानियां

स्कूलों को बच्चों की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट करने के लिए माता-पिता की सहमति के आधार पर स्पष्ट सोशल मीडिया पॉलिसी बनानी चाहिए। इसके अलावा कंटेंट पोस्ट करते समय जिम्मेदारी और सावधानी दोनों बरतनी चाहिए।स्कूल मैनेजमेंट को खास तौर पर बच्चों की पहचान और निजी जानकारी सुरक्षित रखने पर ध्यान देना चाहिए।

रिपोर्ट कार्ड और एडमिट कार्ड क्यों न करें शेयर?

रिपोर्ट कार्ड, एडमिट कार्ड, सर्टिफिकेट या पहचान से जुड़े दूसरे दस्तावेज सोशल मीडिया पर शेयर करना भी खतरनाक हो सकता है। इनमें बच्चे का पूरा नाम, जन्मतिथि, माता-पिता का नाम, रोल नंबर जैसी संवेदनशील जानकारी मौजूद होती है।साइबर अपराधी इन जानकारियों का इस्तेमाल धोखाधड़ी या दूसरे साइबर अपराधों के लिए कर सकते हैं। इसलिए ऐसे दस्तावेजों की फोटो सोशल मीडिया पर डालने से बचना चाहिए।

Child Online Safety: बच्चों की डिजिटल प्राइवेसी क्यों जरूरी?

बच्चे अभी वयस्क नहीं होते, इसलिए उनकी ऑनलाइन सुरक्षा की जिम्मेदारी माता-पिता पर होती है। पेरेंट्स को यह समझना जरूरी है कि आज सोशल मीडिया पर डाली गई कोई पोस्ट भविष्य में बच्चे की प्रतिष्ठा, सुरक्षा और निजी जिंदगी को प्रभावित कर सकती है।इसलिए कोई भी फोटो या वीडियो पोस्ट करने से पहले यह सोचना जरूरी है कि क्या बच्चा बड़ा होने के बाद भी इस पोस्ट को देखकर सहज महसूस करेगा।

क्या होता है डिजिटल फुटप्रिंट?

इंटरनेट पर हमारे द्वारा शेयर की गई जानकारी से जो डिजिटल रिकॉर्ड बनता है, उसे ‘डिजिटल फुटप्रिंट’ कहा जाता है।सोशल मीडिया पर अपलोड की गई किसी फोटो को पूरी तरह इंटरनेट से हटाना लगभग असंभव हो सकता है। अगर आप अपनी पोस्ट डिलीट भी कर दें, तब तक कोई व्यक्ति उसे डाउनलोड, सेव या दोबारा शेयर कर सकता है।इसीलिए इंटरनेट पर किसी भी पोस्ट को स्थायी मानकर ही शेयर करना बेहतर है।

जियोटैग से भी सामने आ सकती है लोकेशन

जियोटैग फोटो या वीडियो के साथ जुड़ी लोकेशन की जानकारी होती है। इससे पता लगाया जा सकता है कि कोई तस्वीर किस जगह पर ली गई है।अगर बच्चे की तस्वीर में जियोटैग मौजूद है, तो कोई अनजान व्यक्ति उसके घर, स्कूल या किसी दूसरी जगह की लोकेशन का पता लगा सकता है। इसलिए फोटो पोस्ट करने से पहले लोकेशन सेटिंग जरूर जांच लें।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने तस्वीरों के गलत इस्तेमाल का खतरा और बढ़ा दिया है। आज AI टूल्स की मदद से किसी सामान्य फोटो को डीपफेक वीडियो या आपत्तिजनक तस्वीर में बदला जा सकता है।बच्चों की तस्वीरों के साथ इस तरह की AI मॉर्फिंग बेहद गंभीर और चिंताजनक समस्या बन सकती है।

Child Online Safety: किसी अनजान व्यक्ति की गतिविधि पर रखें नजर

अगर कोई अनजान व्यक्ति आपके बच्चे की तस्वीरों में जरूरत से ज्यादा दिलचस्पी दिखा रहा है तो सावधान हो जाएं। इन व्यवहारों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

ऐसे व्यक्ति की गतिविधियों पर ध्यान दें अगर वह:

  • सोशल मीडिया पर बच्चे की हर गतिविधि को लगातार देखता है।
  • बच्चे की तस्वीरों पर बार-बार कमेंट करता है।
  • मैसेज करके बच्चे या परिवार की निजी जानकारी पूछता है।
  • बार-बार बच्चे की फोटो या वीडियो मांगता है।
  • बच्चे से सीधे चैट या कॉल करने की कोशिश करता है।
फोटो से साइबर बुलिंग का खतरा

बच्चे की सोशल मीडिया फोटो का इस्तेमाल साइबर बुलिंग के लिए भी किया जा सकता है। कोई व्यक्ति बच्चे का मजाक उड़ाने, उसे परेशान करने या अपमानित करने के लिए उसकी तस्वीर का इस्तेमाल कर सकता है।इस तरह की ऑनलाइन परेशानी का बच्चे के मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़ सकता है और वह मानसिक तनाव का सामना कर सकता है।

बच्चों को मिला डिजिटल प्राइवेसी का अधिकार

‘डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट’ यानी DPDP एक्ट, 2023 में बच्चों के डिजिटल पर्सनल डेटा को विशेष सुरक्षा देने का प्रावधान किया गया है।इसके तहत बच्चों के व्यक्तिगत डेटा को प्रोसेस करने के लिए माता-पिता या कानूनी अभिभावक की सहमति जरूरी है। इसके अलावा बच्चों की ट्रैकिंग, उनके व्यवहार की निगरानी और टार्गेटेड विज्ञापन पर रोक का प्रावधान है।बच्चे के डेटा का इस्तेमाल ऐसे तरीके से भी नहीं किया जा सकता जिससे उसे नुकसान पहुंचे।हालांकि, ध्यान देने वाली बात यह है कि बच्चों से जुड़े DPDP एक्ट के ये प्रावधान 13 मई 2027 से लागू होंगे।

Child Online Safety: बच्चों की ये तस्वीरें कभी शेयर न करें

माता-पिता को बच्चों से जुड़ी कुछ तस्वीरों को सोशल मीडिया से पूरी तरह दूर रखना चाहिए। इनमें शामिल हैं:

  • रिपोर्ट कार्ड, एडमिट कार्ड या सर्टिफिकेट की तस्वीरें।
  • घर का पता या लोकेशन दिखाने वाली तस्वीरें।
  • मेडिकल ट्रीटमेंट से जुड़ी तस्वीरें।
  • बच्चे के रोने, सजा पाने या शर्मिंदा होने वाले पलों की तस्वीरें।
  • पासपोर्ट, आधार या दूसरे पहचान संबंधी दस्तावेज।
  • लाइव लोकेशन के साथ पोस्ट की गई तस्वीरें।
  • बच्चे की रोजाना की दिनचर्या बताने वाली तस्वीरें।
Child Online Safety: फोटो पोस्ट करने से पहले खुद से पूछें ये 5 सवाल

बच्चे की कोई भी फोटो या वीडियो सोशल मीडिया पर डालने से पहले माता-पिता को खुद से पांच सवाल जरूर पूछने चाहिए:

  1. क्या इस तस्वीर से बच्चे की पहचान का पता चल सकता है?
  2. क्या फोटो में बच्चे की लोकेशन से जुड़ी कोई जानकारी दिखाई दे रही है?
  3. क्या भविष्य में यह तस्वीर बच्चे को असहज कर सकती है?
  4. क्या मैं यह तस्वीर किसी अनजान व्यक्ति को दिखाने में सहज रहूंगा या रहूंगी?
  5. क्या इस फोटो को सोशल मीडिया पर पोस्ट करना वास्तव में जरूरी है?

अगर इन सवालों में से किसी का जवाब आपको असहज करता है, तो फोटो पोस्ट न करना ही बेहतर है।

फोटो का गलत इस्तेमाल हो जाए तो क्या करें?

अगर किसी ने बच्चे की फोटो का गलत इस्तेमाल किया है तो सबसे पहले संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उस कंटेंट को रिपोर्ट करें। इसके बाद सबूत के तौर पर स्क्रीनशॉट सुरक्षित रखें।मामले की शिकायत स्थानीय पुलिस स्टेशन के साइबर सेल में भी दर्ज कराई जा सकती है।

Child Online Safety: साइबर अपराध की शिकायत कहां करें?

साइबर अपराध से जुड़ी शिकायत के लिए 1930 टोल-फ्री हेल्पलाइन पर तुरंत संपर्क किया जा सकता है। इसके अलावा www.cybercrime.gov.in पोर्टल के जरिए ऑनलाइन शिकायत भी दर्ज कराई जा सकती है।

बच्चों को भी सिखाएं ऑनलाइन सुरक्षा

जिस तरह माता-पिता बच्चों को ‘गुड टच’ और ‘बैड टच’ के बारे में समझाते हैं, उसी तरह उन्हें ‘सेफ ऑनलाइन’ और ‘अनसेफ ऑनलाइन’ व्यवहार के बारे में भी जानकारी देनी चाहिए।बच्चों को यह समझाना जरूरी है कि इंटरनेट पर हर व्यक्ति भरोसेमंद नहीं होता और अपनी निजी जानकारी किसी अनजान व्यक्ति के साथ शेयर नहीं करनी चाहिए।

सोशल मीडिया पर बच्चों की फोटो का खतरा
सोशल मीडिया पर बच्चों की फोटो का खतरा
Child Online Safety: स्कूल मैनेजमेंट के लिए जरूरी सेफ्टी टिप्स

बच्चों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर पोस्ट करने से पहले स्कूलों को इन बातों का ध्यान रखना चाहिए:

  1. माता-पिता से लिखित सहमति लें।
  2. बच्चों की पहचान को सुरक्षित रखें।
  3. बच्चे का पूरा नाम और क्लास सार्वजनिक न करें।
  4. स्कूल आईडी कार्ड दिखाई न दे।
  5. बच्चों की लोकेशन टैग न करें।
  6. रियल-टाइम पोस्ट करने से बचें।
  7. बच्चों या माता-पिता को पोस्ट में टैग न करें।
  8. मजबूत सोशल मीडिया पॉलिसी तैयार करें।
  9. सोशल मीडिया अकाउंट की प्राइवेसी सेटिंग्स नियमित रूप से जांचें।
  10. पोस्ट केवल अधिकृत व्यक्ति से ही करवाएं।

सोर्स: राहुल मिश्रा, साइबर सिक्योरिटी एडवाइजर, उत्तर प्रदेश पुलिस

Child Online Safety: पेरेंट्स के लिए 10 जरूरी सेफ्टी टिप्स

माता-पिता इन आसान उपायों से बच्चों की डिजिटल सुरक्षा को बेहतर बना सकते हैं:

  1. बच्चों को ऑनलाइन सुरक्षा के बारे में समझाएं।
  2. अपना सोशल मीडिया अकाउंट प्राइवेट रखें।
  3. लोकेशन टैग बंद रखें।
  4. संदिग्ध अकाउंट को तुरंत ब्लॉक करें।
  5. कोई भी पोस्ट करने से पहले अच्छी तरह सोचें।
  6. बच्चे या परिवार की निजी जानकारी शेयर न करें।
  7. सोशल मीडिया पर टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन चालू रखें।
  8. प्राइवेसी सेटिंग्स को नियमित रूप से चेक करें।
  9. अपनी फ्रेंड लिस्ट की समय-समय पर समीक्षा करें।
  10. बच्चों से जुड़ी पोस्ट को पब्लिक करने से बचें।

सोर्स: राहुल मिश्रा, साइबर सिक्योरिटी एडवाइजर, उत्तर प्रदेश पुलिस

यही है बच्चों की डिजिटल सुरक्षा का गोल्डन रूल

साइबर सिक्योरिटी एडवाइजर राहुल मिश्रा के अनुसार, सोशल मीडिया पर कुछ भी पोस्ट करने से पहले दो बार सोचना चाहिए। कुछ लाइक्स और कमेंट्स के लिए बच्चे की सुरक्षा को जोखिम में डालना सही नहीं है।बच्चों की डिजिटल प्राइवेसी और सुरक्षा को हमेशा सबसे ऊपर रखना चाहिए। सोशल मीडिया पर शेयर की गई एक तस्वीर भले ही माता-पिता के लिए सिर्फ एक खूबसूरत याद हो, लेकिन गलत व्यक्ति के हाथ में पहुंचने पर वही तस्वीर बच्चे के लिए परेशानी का कारण बन सकती है।

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