New Delhi: सत्य निकेतन हादसे के बाद सोशल मीडिया पर कुछ ऐसे वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिनमें बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के तेवर सख्त हैं, लेकिन सवाल यह है कि क्या सीएम ने ये सख्त तेवर सत्य निकेतन हादसे के पहले भी दिखाए होंगे? यदि दिखाए होंगे, तो तब शोशल मीडिया पर इस तरह के वीडियो क्यों शेयर नहीं हो पाए होंगे? खैर, अब सीएम दिल्ली को हादसों से बचाने के लिए सक्रिय हुई हैं, तो अच्छी बात है।कहते हैं कि जब जागो तभी सवेरा, लेकिन अब देखना है कि दिल्ली सरकार भविष्य में जनता को हादसों से बचाने के लिए जो दावे कर रही है या जो ठोस कदम उठाने जा रही है, वे कितने कारगर साबित हो पाते हैं?
सीएम के पास कौन सी जादुई छड़ी ?
दिल्ली सरकार ने अवैध रूप से बनी पांच मंजिला या खतरनाक इमारतों की पहचान कर उन्हें तत्काल सील करने का निर्णय लिया है, लेकिन क्या मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता गारांटी दे सकती हैं कि यह काम बड़ी ईमानदारी से हो सकेगा? कहां से इस काम के लिए ईमानदार कर्मचारी या अधिकारी लाए जाएंगे? यदि कर्मचारी और अधिकारी ईमानदारी से अपना काम कर रहे होते तो दिल्ली में कैसे हजारों-लाखों अवैध मकान बन जाते? मान लेते हैं कि अब सीएम अधिकारियों और कर्मचारियों को जवाबदेह बनाएंगी, लेकिन समझ नहीं आ रहा है कि इसके लिए उनके पास कौन सी जादुई छड़ी है?
New Delhi: कैसे जवाबदेही तय होगी?
सत्य निकेतन हादसे के बाद चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया कि MCD ने 2026 की शुरुआत में 27,84,286 इमारतों का सर्वे किया, लेकिन इनमें सिर्फ 19 को खतरनाक घोषित किया गया। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि सर्वे कैसे होता है। आखिर कौन विश्वास कर लेगा कि सिर्फ 19 इमारतें ही खतरनाक मिली होंगी? दिल्ली में लाखों इमारतें पांच मंजिला हैं और कई काफी पुरानी भी हो चुकी हैं, अब देखना है कि रेखा गुप्ता सरकार कितनी पारदर्शिता से अवैध इमारतों के खिलाफ कार्रवाई करवाती है? कैसे कर्माचारियों को कार्रवाई के लिए जवाबदेह बनाती है?
New Delhi: सीएम की अपील के क्या मायने?
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सांसदों, विधायकों और पार्षदों से अपने क्षेत्रों में निर्माणाधीन अवैध इमारतों की जानकारी संबंधित विभाग को देने की अपील की है।सवाल यह है कि क्या ऐसी अपील वे आज तब ही कर रही हैं, जब हाईकोर्ट ने उनकी सरकार को फटकार लगाई है? क्या वे बताएंगी कि जब वे निगम पार्षद रहीं, तब उन्होंने निगम की बैठकों में कितनी अवैध इमारतों के मामले उठाए, कितनी अवैध इमारतों के खिलाफ कार्रवाई करवाई? सांसद, विधायक और पार्षद यदि वाकई जिम्मेदारी का अहसास करते तो क्या सत्य निकेतन में जो इमारत गिरी या जो जर्जर इमारतें वहां खड़ी हैं, उनकी जानकारी पहले ही सीएम को नहीं दे देते? आखिर वे तो सक्षम हैं, यदि उनके पास समय नहीं था तो सीएम को दूरभाष या पत्र के माध्यम से अवगत करा सकते थे, फिर सदन में भी सवाल उठा सकते थे।
New Delhi: कैसे कारगर होगी सुरक्षा नीति?
दिल्ली सरकार पेइंग गेस्ट (PG) आवासों, हॉस्टलों, नर्सिंग होम और स्कूलों जैसी सार्वजनिक इमारतों के लिए एक नई सुरक्षा नीति तैयार कर रही है।मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि उनकी सरकार एक ऐसी सख्त नीति तैयार कर रही है, जिसके तहत पुरानी इमारतों के मालिकों को स्ट्रक्चरल ऑडिट रिपोर्ट जमा करनी होगी और उनकी सुरक्षा का प्रमाण पत्र देना अनिवार्य होगा। क्या यह काम पारदर्शिता से हो पाएगा? जब दिल्ली में सुरक्षा इंतजामों के बिना या नियमों के विरुद्ध खुलेआम होटल, हॉस्टल या अन्य कारोबार चल सकते हैं, तो फिर स्ट्रक्चरल ऑडिट रिपोर्ट और सुरक्षा प्रमाण पत्र के काम में कौन पारदर्शिता की भविष्यवाणी कर सकता है?
New Delhi: दलीलों में दम नहीं
दिल्ली सरकार के नुमांइदे और भाजपा संगठन के पदाधिकारी दलील दे सकते हैं कि सत्य निकेतन हादसे के बाद एमसीडी दक्षिण जोन के डिप्टी कमिश्नर और चार अन्य इंजीनियरों के तत्काल निलंबन और सीलिंग के आदेश का प्रशासनिक अधिकारियों एवं अवैध निर्माणकर्ताओं में सख्त संदेश गया है, लेकिन सवाल फिर यही है कि क्या इससे भविष्य में हादसों की पुनरावृति नहीं होगी? क्या स्ट्रक्चरल ऑडिट का नियम ईमानदारी से लागू होगा? जब तक सिस्टम में व्याप्त भ्रष्टाचार पूरी तरह खत्म नहीं होता और नियमित रूप से अवैध निर्माणों व पीजी हास्टलों पर निगरानी नहीं रखी जाती, तब तक भला कौन पूर्ण सुरक्षा की गारंटी कौन दे सकता है?
New Delhi: संवेदनाएं जाग पाएंगी?
सच तो यह है कि जब तक जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों और अधिकारियों की संवेदनाएं न जागें, जब तक उन्हें अपनी जिम्मेदारी का गंभीरता से अहसास न हो, तब तक दिल्ली में हादसों को कोई नहीं रोक सकता।यदि जन प्रतिनिधियों और अधिकारियों में जरा भी संवेदनाएं होती, तो जो बच्चे देश का भविष्य थे, उन्हें मकान माफिया बुरी तरह नहीं लूटते, वे देश के काम आने से पहले कालकवलित न हुए होते।क्या प्रतिनिधि और अधिकारी अपनी अंतरात्मा में झांककर देख पाएंगे कि आखिर दिल्ली में कब तक लोग हादसों के शिकार होते रहेंगे?








