Home » उत्तर प्रदेश » DM मेधा रूपम और पुलिस अधिकारियों की सैलरी से कैसे वसूला जाएगा 5 लाख का मुआवजा? समझे नियम 


DM मेधा रूपम और पुलिस अधिकारियों की सैलरी से कैसे वसूला जाएगा 5 लाख का मुआवजा? समझे नियम 


Noida DM Medha Roopam

Noida News: नोएडा की डीएम मेधा रूपम से जुड़े एक हाई कोर्ट के आदेश की इन दिनों काफ़ी चर्चा हो रही है। मामला दिल्ली यूनिवर्सिटी की छात्रा और सामाजिक कार्यकर्ता आकृति चौधरी की NSA यानी राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत हुई हिरासत से जुड़ा है। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने आकृति की हिरासत को रद्द करते हुए उन्हें 5 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है। दिलचस्प बात ये है कि कोर्ट ने इस रकम की वसूली सरकारी खजाने से करने के बजाय मामले में जिम्मेदार अधिकारियों से करने का निर्देश दिया है।

कोर्ट की नाराजगी दर्ज करने का निर्देश 

कोर्ट के आदेश के मुताबिक, मुआवजे की रकम नोएडा की डीएम मेधा रूपम और मामले में जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों, जिसमें संबंधित SHO भी शामिल है, से वसूली जाएगी। इसके अलावा अदालत ने संबंधित अधिकारियों के सर्विस रिकॉर्ड में भी कोर्ट की नाराजगी दर्ज करने का निर्देश दिया है। इस आदेश के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर किसी सरकारी अधिकारी से लाखों रुपये की वसूली करनी हो, तो उसकी सैलरी से पैसा आखिर किस तरह काटा जाता है? क्या 5 लाख रुपये एक साथ वेतन से काटे जा सकते हैं या फिर हर महीने एक निश्चित रकम की कटौती होती है?इस सवाल को समझने के लिए हाई कोर्ट के मौजूदा आदेश और वेतन की सामान्य कानूनी प्रक्रिया को अलगअलग समझना जरूरी है।

Noida News: पहले जानिए क्या है मामला?

यह मामला अप्रैल 2026 में नोएडा में हुए मजदूरों के प्रदर्शन से जुड़ा है। मजदूरों ने वेतन, ओवरटाइम और काम की परिस्थितियों समेत अपनी विभिन्न मांगों को लेकर प्रदर्शन किया था। इसी आंदोलन से जुड़े एक मामले में दिल्ली यूनिवर्सिटी की छात्रा और सामाजिक कार्यकर्ता आकृति चौधरी को गिरफ्तार किया गया। बाद में उन पर NSA यानी National Security Act के तहत कार्रवाई की गई और वह करीब पांच महीने तक हिरासत में रहीं। प्रशासन और पुलिस की ओर से उन पर आंदोलन के दौरान हिंसा भड़काने समेत कई आरोप लगाए गए थे। इसके बाद मामला इलाहाबाद हाई कोर्ट पहुंचा, जहां अदालत ने NSA के तहत हिरासत में रखने के लिए पेश की गई सामग्री और उसके आधार की जांच की।

हाई कोर्ट ने हिरासत रद्द की

मामले की सुनवाई के दौरान इलाहाबाद हाई कोर्ट ने माना कि NSA जैसी कठोर कार्रवाई को सही ठहराने के लिए जिस तरह की ठोस और पर्याप्त सामग्री जरूरी है, वह इस मामले में पर्याप्त रूप से सामने नहीं आई। अदालत ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों के समर्थन में प्रदर्शन करने के अधिकार को भी संवैधानिक अधिकारों के संदर्भ में देखा। कोर्ट के मुताबिक, उपलब्ध सामग्री के आधार पर आकृति चौधरी को NSA के तहत हिरासत में रखने की कार्रवाई उचित नहीं ठहराई जा सकती। इसी आधार पर अदालत ने उनकी हिरासत को रद्द कर दिया और उन्हें 5 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया। इस मामले में हाई कोर्ट के आदेश का सबसे अहम हिस्सा मुआवजे की रकम को लेकर है।

अदालत ने केवल सरकार को मुआवजा देने का निर्देश नहीं दिया, बल्कि मामले में जिम्मेदार अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही तय करने की दिशा में कदम उठाया। कोर्ट ने निर्देश दिया कि 5 लाख रुपये की रकम जिम्मेदार अधिकारियों के वेतन से वसूल की जाए। इसमें नोएडा की डीएम मेधा रूपम और संबंधित पुलिस अधिकारियों के नाम शामिल हैं। अदालत ने संबंधित अधिकारियों के सर्विस रिकॉर्ड में भी अपनी नाराजगी दर्ज करने का निर्देश दिया है। यानी कोर्ट ने इस मामले को महज एक सामान्य प्रशासनिक चूक के तौर पर नहीं देखा, बल्कि कार्रवाई के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की है।

Noida News: कैसे कटेंगे सैलरी से 5 लाख रुपये?

अब सवाल आता है कि किसी सरकारी अधिकारी की सैलरी से इतनी बड़ी रकम की वसूली व्यावहारिक तौर पर कैसे होगी। सरकारी कर्मचारी के वेतन से किसी रकम की कटौती के लिए संबंधित विभाग को निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होता है। वहीं, अगर अदालत वेतन की अटैचमेंट या उससे वसूली का आदेश देती है, तो सिविल प्रोसीजर कोड यानी CPC में इसके लिए प्रावधान मौजूद हैं। CPC की धारा 60(1)(i) वेतन की उस रकम से संबंधित है जिसे डिक्री की वसूली के लिए अटैच किया जा सकता है। सामान्य परिस्थितियों में वेतन का एक हिस्सा कानून के तहत सुरक्षित रहता है। इसलिए अदालत के आदेश का मतलब यह जरूरी नहीं है कि अधिकारी की पूरी मासिक सैलरी एक ही बार में काट ली जाएगी। वास्तविक कटौती संबंधित आदेश, लागू सेवा नियमों और वेतन की कानूनी सुरक्षा पर निर्भर करेगी।

यह सबसे अहम सवाल है। किसी अधिकारी से 5 लाख रुपये की वसूली का आदेश होने का अर्थ यह नहीं है कि उसकी पूरी सैलरी को एक साथ जब्त कर लिया जाएगा। वेतन से वसूली करते समय कानून यह तय करता है कि कितनी रकम अटैच की जा सकती है और कितनी रकम कर्मचारी के लिए सुरक्षित रहेगी। ऐसे मामलों में कटौती की वास्तविक राशि अधिकारी के वेतन, लागू नियमों और अदालत के आदेश के क्रियान्वयन पर निर्भर करेगी। यानी अगर पूरी रकम एक बार में काटना कानूनी तौर पर संभव नहीं है, तो निर्धारित प्रक्रिया के तहत वेतन से चरणबद्ध तरीके से रकम की वसूली हो सकती है।

सरकारी खजाने में जमा होने के बाद पीड़ित को मिलेगी रकम

वेतन से होने वाली कटौती को संबंधित विभाग की प्रक्रिया के तहत जमा कराया जाता है। इसके बाद अदालत के निर्देश के अनुसार मुआवजे की रकम पीड़ित तक पहुंचाई जाती है। यहां यह समझना जरूरी है कि हाई कोर्ट का किसी अधिकारी से व्यक्तिगत रूप से वसूली का निर्देश देना और सामान्य सरकारी कर्मचारी के वेतन से कानूनी रिकवरी होना दो अलग प्रक्रियाएं हो सकती हैं। इसलिए CPC के सामान्य प्रावधानों को सीधे इस मामले की अंतिम कटौती का तरीका मानना सही नहीं होगा।

ये भी पढ़े… ‘वाह… मेरा वडोदरा’, PM मोदी ने गुजरात के लोगों की तारीफ कर क्या कहा?