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दो पाटों में बीच फंसा कांग्रेस हाईकमान, अखिलेश से ज्यादा अपनों का दबाव 

Uttar Pradesh Assembly Elections: दो पाटों में बीच फंसा कांग्रेस हाईकमान, अखिलेश से ज्यादा अपनों का दबाव 
Uttar Pradesh Assembly Elections: आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की सियासी हलचलें तेज हो गई हैं।भारतीय जनता पार्टी पहले ही चुनावी मोड में है।इस बीच कांग्रेस सपा के बीच भी सीटों के बंटवारे को लेकर प्रयास तेज हो गए हैं।इन प्रयासों के चलतेे कांग्रेस हाईकमान की परेशानियां बढ़ गई हैं। उसकी स्थिति दो पाटों के बीच फंसने जैसी हो गई है। 

150 सीटों पर लड़ना चाहते हैं कांग्रेस कार्यकर्ता

राज्य में सपा और कांग्रेस के बीच गठबंधन तो तय है, लेकिन पेंच सीटों के बंटवारे को लेकर फंसा हुआ है।बताया जाता है कि कांग्रेस कार्यकर्ता अपने आलाकमान पर बराबर दबाव बनाए हुए हैं कि सीटों के बंटवारे में बराबर हिस्सेदारी ली जाए। कार्यकर्ताओं ने पार्टी आलाकमान को साफ तौर पर अपनी भावनाओं से अवगत करा दिया है कि कांग्रेस को 150 सीटें चाहिए।एक तरफ कार्यकर्ताओं का भारी दबाव तो दूसरी तरफ सपा प्रमुख अखिलेश यादव कांग्रेस को उसकी अपेक्षा के अनुसार सीटें देने को तैयार नहीं हैं। ऐसे में कांग्रेस आलाकमान की स्थिति दो पाटों के बीच फंसने जैसी हो चुकी है।

Uttar Pradesh Assembly Elections: 70 से 75 सीटें देने के मूड में अखिलेश 

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर जबर्दस्त खींचतान चल रही है।कांग्रेस का दावा है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में उसका प्रदर्शन काफी अच्छा रहा।प्रदेश कांग्रेस के बड़े नेता इमरान मसूद बराबर यह मांग उठाते आ रहे हैं कि कांग्रेस अच्छी स्थिति में आ गई, लिहाजा सीटों के बंटवारे में उसे बराबर की हिस्सेदारी चाहिए।सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस 2017 के विधानसभा चुनाव की तरह सीटों का बंटवारा चाहती है। उस समय कांग्रेस करीब 114 सीटों पर लड़ी थी।इस बार भी कांग्रेस ज्यादा सीटें चाहती है, जबकि अखिलेश यादव उसे 70 से 75 सीटें ही देने के मूड में बताए जाते हैं। 
Uttar Pradesh Assembly Elections: शीर्ष नेतृत्व करेगा तय

बताया जाता है कि सपा प्रमुख अखिलेश यादव और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी के बीच जल्दी ही सीटों के बंटवारे को लेकर बैठक होने वाली है।इस बैठक के बाद अंतिम सूची तैयार की जाएगी।अब देखना है कि कांग्रेस आलाकमान अपने कार्यकर्ताओं और अखिलेश यादव को कैसे मैनेज कर पाता है?

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