Barnabas Station: पूर्वोत्तर रेलवे का चमकदार बनारस स्टेशन (मंडुवाडीह) बुनियादी सुविधाओं के मामले में फिसड्डी साबित हो रहा है। स्टेशन पर यात्रियों के लिए बनाए गए निश्शुल्क शौचालयों की स्थिति बदहाल है। कहीं शौचालय बंद पड़े हैं तो कहीं साफ-सफाई के अभाव में गंदगी का अंबार लगा है। वहीं, प्लेटफार्मों पर आवारा कुत्तों के झुंड घूमने से यात्रियों की सुरक्षा पर भी सवाल उठ रहे हैं।
Barnabas Station: प्लेटफार्म नंबर एक पर शौचालय बंद, सिर्फ लगा है कार्य प्रगति का बोर्ड-
प्लेटफार्म नंबर एक पर महिला और पुरुष शौचालय में लंबे समय से काम चल रहा है। यहां शौचालय बंद पड़ा है और सिर्फ ‘कार्य प्रगति पर’ का बोर्ड लगाकर खानापूर्ति कर दी गई है। बोर्ड पर काम कब तक पूरा होगा, इसकी कोई जानकारी नहीं दी गई है। प्लेटफार्म नंबर एक और आठ बनारस स्टेशन के सबसे व्यस्त प्लेटफार्मों में शामिल हैं, जहां से अधिकांश ट्रेनों का संचालन होता है। ऐसे में शौचालय बंद होने से यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। खासकर महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के लिए स्थिति ज्यादा मुश्किल हो रही है।
Barnabas Station: प्लेटफार्म दो-तीन के शौचालय में गंदगी का अंबार-
प्लेटफार्म नंबर दो-तीन पर शौचालय चालू है, लेकिन साफ-सफाई के अभाव में इसकी स्थिति बेहद खराब है। अंदर गंदगी का अंबार लगा हुआ है और बदबू के कारण वहां खड़ा होना भी मुश्किल है। फर्श पर भी गंदगी फैली हुई है। यात्री आकाश सिंह ने बताया कि शौचालय में इतनी गंदगी है कि उसका इस्तेमाल करना मुश्किल हो जाता है। इससे स्टेशन की सुंदरता भी प्रभावित हो रही है। रेलवे ने अमृत भारत योजना के तहत स्टेशन को सुंदर बनाया है, लेकिन शौचालयों की बदहाल स्थिति उसकी चमक को फीका कर रही है।
द्वितीय प्रवेश द्वार के पास भी शौचालय बंद-
द्वितीय प्रवेश द्वार के पास बना यात्री शौचालय भी लंबे समय से बंद पड़ा है। दूसरी तरफ बना शौचालय चालू है, लेकिन प्रवेश द्वार से आने वाले यात्रियों को वहां तक पहुंचने के लिए काफी दूरी तय करनी पड़ती है। ट्रेन छूटने की जल्दी में यात्रियों को इससे काफी परेशानी होती है। बनारस स्टेशन वाराणसी का दूसरा सबसे बड़ा स्टेशन है। यहां से लगभग 30 जोड़ी ट्रेनों का संचालन होता है और रोजाना हजारों यात्रियों की आवाजाही रहती है। ऐसे में निश्शुल्क शौचालयों की खराब व्यवस्था रेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है। मजबूरन यात्रियों को पेड शौचालय का सहारा लेना पड़ रहा है।
प्लेटफार्मों पर आवारा कुत्तों का डेरा-
बनारस स्टेशन पर शौचालयों की बदहाल व्यवस्था के साथ ही प्लेटफार्मों पर आवारा कुत्तों की मौजूदगी भी यात्रियों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। बताया जा रहा है कि प्लेटफार्म नंबर एक से आठ तक दिनभर आवारा कुत्तों के झुंड घूमते रहते हैं। प्लेटफार्म पर बैठे यात्रियों के आसपास कुत्ते मंडराते रहते हैं। कई बार दो कुत्तों के आपस में भौंकने और लड़ना। से अफरा-तफरी की स्थिति बन जाती है। इससे महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग यात्री डर जाते हैं।
रात में बढ़ जाती है आवारा कुत्तों की संख्या-
रात के समय प्लेटफार्मों पर आवारा कुत्तों की संख्या और बढ़ जाती है। ये कुत्ते प्लेटफार्म पर लगी बेंचों के नीचे, वेटिंग हॉल के पास और फूड स्टॉल के आसपास बैठे रहते हैं। इससे यात्रियों में सुरक्षा को लेकर चिंता बनी रहती है।
यात्रियों ने की शौचालय और सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने की मांग-
यात्रियों ने रेल प्रशासन से मांग की है कि बंद पड़े शौचालयों को जल्द से जल्द चालू कराया जाए और चालू शौचालयों में नियमित साफ-सफाई की व्यवस्था की जाए। साथ ही प्लेटफार्मों से आवारा कुत्तों को हटाने के लिए भी प्रभावी कदम उठाने की मांग की गई है, ताकि यात्रियों को सुरक्षित और स्वच्छ माहौल मिल सके। इस संबंध में डीआरएम पूर्वोत्तर रेलवे आशीष जैन को फोन किया गया, लेकिन उनका फोन नहीं उठने के कारण संपर्क नहीं हो सका।








