Moti Dungri Temple: गणेश चतुर्थी का त्योहार हो और जयपुर के प्रसिद्ध मोतीडूंगरी गणेश मंदिर का जिक्र न हो, ऐसा शायद ही देखने को मिलता है। गुलाबी नगरी के प्रथम आराध्य माने जाने वाले मोतीडूंगरी श्रीगणेश मंदिर में पूरे साल भक्तों की भीड़ लगी रहती है। खासकर गणेश चतुर्थी के अवसर पर यहां श्रद्धा और भक्ति का अलग ही माहौल देखने को मिलता है। सिर्फ जयपुर ही नहीं, बल्कि राजस्थान के अलग-अलग इलाकों के साथ देश और विदेश से भी श्रद्धालु भगवान गणेश के दर्शन के लिए यहां पहुंचते हैं। भक्तों के बीच मान्यता है कि मंदिर में विराजमान श्रीगणेश की सिंदूरी प्रतिमा के दर्शन करने और सच्चे मन से प्रार्थना करने पर मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इसी वजह से इस मंदिर का महत्व केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जयपुर की पहचान और लोगों की भावनाओं से भी गहराई से जुड़ा हुआ है।
Moti Dungri Temple: करीब ढाई सौ साल पुराना है मंदिर का इतिहास
मोतीडूंगरी गणेश मंदिर का इतिहास लगभग ढाई सौ साल पुराना बताया जाता है। जयपुर की स्थापना के 34 साल बाद वर्ष 1761 में यहां भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित की गई थी। मंदिर की स्थापना से जुड़ी कहानी भी काफी दिलचस्प है। बताया जाता है कि भगवान गणेश की यह भारी प्रतिमा तत्कालीन राजा सवाई माधोसिंह मेवाड़ के मावली से जयपुर लेकर आए थे। सवाई माधोसिंह, जयपुर के संस्थापक सवाई जयसिंह और सिसोदिया रानी चंद्रकुंवर के पुत्र थे। उनका मेवाड़ से पारिवारिक संबंध था। ऐतिहासिक परिस्थितियों के बीच जब माधोसिंह को जयपुर की राजगद्दी मिली, तब वे मेवाड़ से भगवान गणेश की प्रतिमा अपने साथ जयपुर लेकर आए और मोतीडूंगरी में उसकी स्थापना करवाई। इसके बाद समय के साथ यह स्थान जयपुर के प्रमुख धार्मिक केंद्रों में शामिल हो गया।

हर बुधवार बड़ी संख्या में पहुंचते हैं भक्त
मोतीडूंगरी गणेश मंदिर में बुधवार का दिन विशेष माना जाता है। इस दिन जयपुर और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान गणेश के दर्शन करने मंदिर पहुंचते हैं। बुजुर्गों से लेकर युवा, महिलाएं और बच्चे, हर उम्र और वर्ग के लोगों की मंदिर के प्रति गहरी आस्था है। भक्तों के बीच यह मान्यता भी है कि किसी नए काम की शुरुआत भगवान गणेश का आशीर्वाद लेकर करना शुभ होता है। यही कारण है कि लोग नया वाहन खरीदने के बाद सबसे पहले मोतीडूंगरी गणेश मंदिर पहुंचते हैं। इसके अलावा कई लोग अपने घर, कारोबार या किसी अन्य शुभ कार्य के लिए भगवान गणेश को निमंत्रण देने भी मंदिर आते हैं।
Moti Dungri Temple: मनोकामना के लिए मंदिर में बांधते हैं धागा
अपनी मनोकामना लेकर मंदिर आने वाले भक्त अलग-अलग तरीकों से भगवान गणेश के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं। इनमें मंदिर परिसर में धागा बांधना भी शामिल है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि सच्चे मन से की गई प्रार्थना और भगवान गणेश की कृपा से उनकी इच्छाएं पूरी होती हैं। मंदिर के महंत पंडित कैलाश शर्मा के अनुसार, मोतीडूंगरी गणेशजी के प्रति लोगों की आस्था कई पीढ़ियों से चली आ रही है। यहां दर्शन के लिए आने वाले भक्त केवल जयपुर और राजस्थान से ही नहीं, बल्कि देश के अलग-अलग हिस्सों और विदेशों से भी पहुंचते हैं।
गणेश चतुर्थी पर बढ़ जाती है मंदिर की रौनक
गणेश चतुर्थी के दौरान मोतीडूंगरी गणेश मंदिर की रौनक और भी बढ़ जाती है। भगवान गणेश के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचते हैं। इस दौरान विशेष पूजा और दर्शन को लेकर भक्तों में खास उत्साह रहता है। मंदिर के साथ आसपास का पूरा क्षेत्र गणपति की भक्ति में डूबा नजर आता है। मोतीडूंगरी गणेश मंदिर आज सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं है, बल्कि यह जयपुर की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का भी महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। लंबे समय से चली आ रही परंपराएं, भगवान गणेश के प्रति लोगों की आस्था और हर वर्ग के श्रद्धालुओं की मौजूदगी इस मंदिर को खास बनाती है। गुलाबी नगरी जयपुर आने वाले लोगों के लिए भी मोतीडूंगरी गणेश मंदिर शहर की पहचान से जुड़े प्रमुख स्थानों में शामिल है।








