Vande Mataram: जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा है कि वंदे मातरम के सभी छह अंतरों को लेकर सरकार की ओर से जो नियम और प्रावधान तय किए गए हैं, उनका पालन करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम के दौरान खड़ा नहीं होने पर कानूनी परिणाम हो सकते हैं। उमर अब्दुल्ला ने सवाल उठाते हुए कहा, “कांग्रेस क्या चाहती है, कि कश्मीरियों को इसी वजह से जेल भेज दिया जाए?”
Vande Mataram: सरकारी कार्यक्रमों में प्रोटोकॉल जरूरी
उमर अब्दुल्ला ने कहा कि सरकारी कार्यक्रमों में लागू नियमों और प्रोटोकॉल का पालन करना आवश्यक है। उनके मुताबिक, ये नियम केवल जम्मू-कश्मीर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पूरे देश में होने वाले सरकारी कार्यक्रमों पर लागू होते हैं।दरअसल, सोमवार को श्रीनगर में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला की मौजूदगी में वंदे मातरम का पूरा संस्करण प्रस्तुत किया गया था। इसको लेकर कांग्रेस ने आपत्ति जताई थी।कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कार्यक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया था। उन्होंने नेशनल कॉन्फ्रेंस से अपील की थी कि वह कांग्रेस के साथ अपना रुख कायम रखे और वंदे मातरम के केवल शुरुआती दो अंतरे गाने के पक्ष में रहे।
उमर बोले- पार्टी का फैसला अलग, सरकार की जिम्मेदारी अलग
उमर अब्दुल्ला ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी ने कभी भी वंदे मातरम को पार्टी के तौर पर नहीं अपनाया है और आगे भी ऐसा करने की उसकी कोई योजना नहीं है। उन्होंने कहा कि यह पार्टी की विचारधारा और राजनीतिक फैसले से जुड़ा विषय है।उन्होंने कहा कि पार्टी के राजनीतिक फैसले और सरकार की कानूनी जिम्मेदारी को एक जैसा नहीं समझना चाहिए। उमर के मुताबिक, इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के समापन समारोह में भी राष्ट्रगान और राष्ट्रीय गीत दोनों प्रस्तुत किए जाएंगे।

Vande Mataram: कांग्रेस ने दो अंतरे गाने का फैसला किया था
कांग्रेस वर्किंग कमेटी ने फैसला किया था कि पार्टी के सभी कार्यक्रमों में वंदे मातरम के छह अंतरों में से केवल शुरुआती दो अंतरे ही गाए जाएंगे। यह निर्णय 15 अगस्त को कांग्रेस मुख्यालय में वंदे मातरम के गायन को लेकर हुए विवाद के बाद लिया गया था।बीजेपी ने कांग्रेस नेताओं पर आरोप लगाया था कि वे पार्टी के कार्यक्रमों में वंदे मातरम का पूरा संस्करण नहीं गाकर राष्ट्रीय गीत का अपमान कर रहे हैं।
2026 में वंदे मातरम के अपमान को लेकर बना कानून
24 जनवरी 1950 को संविधान सभा ने वंदे मातरम को राष्ट्रीय गीत का दर्जा दिया था। हालांकि, लंबे समय तक इसके अपमान को लेकर कोई अलग कानून मौजूद नहीं था। इसके बाद 2026 के मानसून सत्र में केंद्र सरकार ने ‘राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम’ बनाया।इस कानून के तहत वंदे मातरम के गायन को जानबूझकर रोकना, उसमें बाधा डालना या सार्वजनिक रूप से उसका अपमान करना अपराध माना गया है। ऐसे मामलों में 3 साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों की सजा का प्रावधान किया गया है।इस साल 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान पहली बार लाल किले की प्राचीर से वंदे मातरम के सभी छह छंद पूरे तौर पर गाए गए।
Vande Mataram: वंदे मातरम को लेकर पहले भी हुए हैं विवाद
1950: संविधान सभा में वंदे मातरम को राष्ट्रगान बनाने को लेकर चर्चा हुई थी। हालांकि, बाद में इसे राष्ट्रगान के बराबर दर्जे वाला राष्ट्रीय गीत घोषित किया गया।
1986: सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि किसी व्यक्ति को उसकी धार्मिक मान्यताओं के आधार पर वंदे मातरम गाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।
2006: स्कूलों में वंदे मातरम को अनिवार्य रूप से गाने की सलाह के बाद कुछ मुस्लिम संगठनों ने धार्मिक आधार पर इसका विरोध किया था।
2009: दारुल उलूम देवबंद ने वंदे मातरम गाने के खिलाफ फतवा जारी किया था।
2017: मुंबई, मेरठ और वाराणसी नगर निगम की बैठकों में वंदे मातरम गाने को लेकर विवाद और हंगामा हुआ था।
2019-2022: सुप्रीम कोर्ट में वंदे मातरम को राष्ट्रगान की तरह सख्त नियमों के दायरे में लाने की मांग को लेकर मामला उठाया गया था।
Vande Mataram: केंद्र ने जारी किए थे नए निर्देश
गृह मंत्रालय ने 9 जुलाई को सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और केंद्रीय मंत्रालयों को राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम और राष्ट्रगान जन गण मन के गायन और बजाने को लेकर नए निर्देश जारी किए थे। इन निर्देशों में दोनों के सही बोल, उच्चारण और निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन करने के लिए कहा गया था।नए नियमों के अनुसार, अगर किसी कार्यक्रम में वंदे मातरम और जन गण मन दोनों प्रस्तुत किए जाते हैं, तो पहले वंदे मातरम और उसके बाद राष्ट्रगान होगा। वहीं, अगर किसी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश का अपना राज्य गीत भी है, तो क्रम में सबसे पहले राज्य गीत, उसके बाद वंदे मातरम और अंत में जन गण मन होगा।
Vande Mataram: क्या है नया प्रोटोकॉल?
- राष्ट्रगान से पहले राष्ट्रगीत गाया या बजाया जाएगा।
- राष्ट्रगीत के सभी छह अंतरे पूरे 3.10 मिनट में प्रस्तुत किए जाएंगे।
- राष्ट्रगीत के दौरान सभी लोगों को सावधान की मुद्रा में खड़ा रहना होगा।
- परेड में राष्ट्रध्वज लाते समय राष्ट्रगीत गाया जाएगा।
- तिरंगा फहराते समय भी राष्ट्रगीत प्रस्तुत किया जाएगा।
- किसी कार्यक्रम में राष्ट्रपति के पहुंचने पर राष्ट्रगीत गाया जाएगा।
- राष्ट्रपति के संबोधन से पहले और बाद में भी इसे प्रस्तुत किया जाएगा।
- राज्यपाल या उपराज्यपाल के समारोहों में राष्ट्रगीत गाया जाएगा।
- राज्यपालों के भाषण से पहले और बाद में भी इसे प्रस्तुत किया जाएगा।
- भारत रत्न, पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्मश्री जैसे नागरिक सम्मान समारोहों में भी राष्ट्रगीत प्रस्तुत किया जाएगा।
- स्कूलों में कामकाज शुरू होने से पहले राष्ट्रगीत गाने का प्रावधान है।
- सामूहिक रूप से पूरे छह अंतरे गाए या बजाए जाएंगे।
- जरूरत पड़ने पर राष्ट्रगीत की प्रतियां प्रिंट करके लोगों को बांटी जा सकती हैं।
- सरकारी स्कूलों में दिन की शुरुआत सामूहिक गायन के साथ होगी।
राष्ट्रगीत नहीं गाने पर क्या होगा?
मौजूदा प्रावधान के अनुसार राष्ट्रगीत नहीं गाने पर किसी दंड या कानूनी कार्रवाई का प्रावधान नहीं है।अगर वंदे मातरम या राष्ट्रगीत किसी डॉक्यूमेंट्री या फिल्म के हिस्से के तौर पर बजाया जा रहा है, तो उस दौरान खड़ा होने से छूट दी जा सकती है। इसकी वजह यह है कि ऐसा करने से फिल्म या डॉक्यूमेंट्री की प्रस्तुति में बाधा पड़ सकती है।








