BRICS Summit Security: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन समेत कई देशों के शीर्ष नेताओं की मेजबानी के लिए दिल्ली तैयार है। 12 और 13 सितंबर को होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन से पहले राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था कई स्तरों पर मजबूत की गई है। एयरपोर्ट से लेकर विदेशी मेहमानों के ठहरने वाले होटल और सम्मेलन स्थल भारत मंडपम तक सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर हैं।
रिपोर्टों के मुताबिक, BRICS सम्मेलन की सुरक्षा में करीब 30 हजार सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है। इनमें दिल्ली पुलिस के साथ अर्धसैनिक बलों के जवान भी शामिल हैं। सुरक्षा व्यवस्था को अलग-अलग सेक्टर में बांटकर वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
सवाल-1: आखिर दिल्ली में इतनी बड़ी सुरक्षा क्यों?
BRICS में दुनिया की कई बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के राष्ट्राध्यक्ष और वरिष्ठ प्रतिनिधि एक साथ दिल्ली पहुंच रहे हैं। ऐसे में चुनौती केवल नेताओं की व्यक्तिगत सुरक्षा तक सीमित नहीं है। एयरपोर्ट, होटल, सम्मेलन स्थल, वीआईपी मूवमेंट, ट्रैफिक और अलग-अलग देशों की सुरक्षा टीमों के बीच तालमेल—इन सभी मोर्चों को एक साथ संभालना है। इसी वजह से नई दिल्ली और चाणक्यपुरी समेत उन इलाकों में सुरक्षा बढ़ाई गई है, जहां विदेशी प्रतिनिधिमंडलों के ठहरने और आवाजाही की व्यवस्था है।
BRICS Summit Security: सवाल-2: पुतिन और शी की सुरक्षा इतनी खास क्यों?
रूस और चीन दुनिया की प्रमुख सैन्य और आर्थिक शक्तियां हैं। दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्षों की यात्रा के दौरान सुरक्षा के लिए भारतीय एजेंसियों के साथ उनकी अपनी सुरक्षा टीमें भी समन्वय करती हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, रूस और चीन की सुरक्षा टीमें दिल्ली पहुंच चुकी हैं और संबंधित व्यवस्थाओं का जायजा ले रही हैं। होटलों में कर्मचारियों के सत्यापन और सुरक्षा प्रोटोकॉल की भी जांच की गई है। हालांकि, सुरक्षा कारणों से नेताओं के सटीक ठिकाने, काफिले के रूट या सुरक्षा व्यवस्था की संवेदनशील जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा रही है।

सवाल-3: 30 हजार जवानों के जिम्मे क्या-क्या होगा?
BRICS की सुरक्षा को कई स्तरों में बांटा गया है। इसमें मुख्य रूप से- एयरपोर्ट सुरक्षा: विदेशी नेताओं के आगमन और प्रस्थान की सुरक्षा। होटल सुरक्षा: विदेशी राष्ट्राध्यक्षों और प्रतिनिधिमंडलों के ठहरने वाले स्थानों की सुरक्षा। भारत मंडपम सुरक्षा: सम्मेलन स्थल के आसपास बहुस्तरीय सुरक्षा घेरा। वीआईपी मूवमेंट: विदेशी नेताओं की आवाजाही के दौरान सुरक्षा और समन्वय। ट्रैफिक मैनेजमेंट: काफिलों की आवाजाही के दौरान यातायात व्यवस्था। हर सेक्टर की निगरानी वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को सौंपी गई है।
BRICS Summit Security: सवाल-4: क्या सभी विदेशी नेता एक ही होटल में रुकेंगे?
नहीं। अलग-अलग देशों के राष्ट्राध्यक्षों और वरिष्ठ प्रतिनिधियों के लिए दिल्ली के विभिन्न होटलों में ठहरने की व्यवस्था की गई है। कुछ प्रतिनिधिमंडलों को एक ही होटल में ठहराया गया है, जबकि कुछ शीर्ष नेताओं के लिए अलग व्यवस्था की गई है। इसका उद्देश्य सुरक्षा के साथ-साथ राजनयिक प्रोटोकॉल और प्रतिनिधिमंडलों की जरूरतों को ध्यान में रखना है। रूस, चीन और ईरान के राष्ट्राध्यक्षों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
सवाल-5: भारत मंडपम तक कैसे पहुंचेगा विदेशी प्रतिनिधिमंडल?
सम्मेलन स्थल तक विदेशी नेताओं की आवाजाही के लिए दिल्ली पुलिस और ट्रैफिक पुलिस ने विशेष व्यवस्था की है। महत्वपूर्ण मार्गों पर सुरक्षा और यातायात प्रबंधन की तैयारियां पहले से की गई हैं। सुरक्षा एजेंसियों ने संभावित वीआईपी मूवमेंट को ध्यान में रखते हुए रिहर्सल भी की है, ताकि सम्मेलन के दौरान काफिलों की आवाजाही में किसी तरह की परेशानी न हो। यानी BRICS के दौरान दिल्ली की सड़क व्यवस्था भी सुरक्षा प्लान का अहम हिस्सा होगी।

BRICS Summit Security: सवाल-6: पुतिन-शी की मौजूदगी से दिल्ली में सुरक्षा चुनौती कितनी बढ़ी?
इस बार चुनौती इसलिए भी बड़ी है क्योंकि सम्मेलन में एक साथ कई हाई-प्रोफाइल विदेशी नेता मौजूद रहेंगे। पुतिन और शी के अलावा ईरान समेत कई देशों के शीर्ष प्रतिनिधि भी दिल्ली पहुंचेंगे। इन नेताओं की सुरक्षा व्यवस्था के लिए भारतीय सुरक्षा एजेंसियों को अलग-अलग देशों की सुरक्षा टीमों और राजनयिक प्रोटोकॉल के साथ लगातार समन्वय करना होगा। यही वजह है कि सुरक्षा व्यवस्था को एक सामान्य अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के मुकाबले ज्यादा व्यापक बनाया गया है।
सवाल-7: सुरक्षा के साथ दिल्ली में ट्रैफिक का क्या होगा?
विदेशी नेताओं के काफिलों की आवाजाही का सीधा असर दिल्ली के ट्रैफिक पर पड़ सकता है। वीआईपी मूवमेंट के दौरान कुछ मार्गों पर अस्थायी प्रतिबंध, डायवर्जन या ट्रैफिक नियंत्रण लागू किया जा सकता है। इसलिए सम्मेलन के दौरान दिल्ली में यात्रा करने वाले लोगों के लिए ट्रैफिक पुलिस की एडवाइजरी पर नजर रखना जरूरी होगा।
BRICS Summit Security: सवाल-8: BRICS के लिए दिल्ली की तैयारी इतनी अहम क्यों?
BRICS सिर्फ एक सामान्य अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन नहीं है। इसमें दुनिया की प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं के नेता व्यापार, निवेश, ऊर्जा, तकनीक, वित्त और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा करते हैं। भारत इस वर्ष BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में 18वां BRICS शिखर सम्मेलन आयोजित हो रहा है। ऐसे में दिल्ली की सुरक्षा व्यवस्था भारत की मेजबानी और आयोजन क्षमता का भी बड़ा परीक्षण है।
सुरक्षा के घेरे में होगी दुनिया की नजर
30 हजार सुरक्षाकर्मियों की तैनाती से साफ है कि BRICS सम्मेलन के लिए दिल्ली में सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। पुतिन, शी जिनपिंग और पेजेशकियन जैसे नेताओं की मौजूदगी में सुरक्षा, प्रोटोकॉल और ट्रैफिक – तीनों मोर्चों पर एजेंसियों को एक साथ काम करना होगा।
लेकिन इस पूरे सुरक्षा इंतजाम का सबसे बड़ा मकसद यही है कि दुनिया के बड़े नेता दिल्ली में बिना किसी व्यवधान के सम्मेलन में हिस्सा ले सकें। अब जब BRICS के लिए राजधानी तैयार है, नजर इस बात पर भी रहेगी कि भारत अपनी अध्यक्षता में इस बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच से कितने ठोस कूटनीतिक और आर्थिक नतीजे हासिल कर पाता है।








