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युवाओं को निशाना बनाने वाले ऑनलाइन नेटवर्क से आतंकी सिंडिकेट तक, शहजाद भट्टी नेटवर्क की पूरी कहानी

युवाओं को जाल में फंसा रहा था भट्टी नेटवर्क

Shahzad Bhatti Network: पाकिस्तान स्थित शहजाद भट्टी नेटवर्क पर भारत सरकार ने बड़ी कार्रवाई की है। गृह मंत्रालय ने 16 सितंबर 2026 को जारी राजपत्र अधिसूचना के जरिए शहजाद भट्टी नेटवर्क यानी SBN को गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA, 1967 के तहत आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया। सरकार के मुताबिक, यह नेटवर्क युवाओं और छोटे अपराधियों को अपने साथ जोड़कर उन्हें कट्टरपंथ और आतंकी गतिविधियों की ओर ले जाने की कोशिश कर रहा था। नेटवर्क पर सीमा पार से हथियार, विस्फोटक और नशीले पदार्थों की तस्करी तथा डिजिटल माध्यमों से नफरत फैलाने वाले कंटेंट के इस्तेमाल के आरोप हैं।

Shahzad Bhatti Network: क्या है शहजाद भट्टी नेटवर्क?

सरकार के अनुसार, शहजाद भट्टी नेटवर्क पाकिस्तान से संचालित एक आतंकी-गैंगस्टर सिंडिकेट है। इसका नेतृत्व पाकिस्तान स्थित गैंगस्टर से आतंकी बने शहजाद भट्टी के हाथ में बताया गया है। सरकारी जांच के मुताबिक, नेटवर्क का उद्देश्य युवाओं और स्थानीय अपराधियों को अपने प्रभाव में लेकर उन्हें हथियार, विस्फोटक और नशीले पदार्थों की तस्करी तथा दूसरी आपराधिक और आतंकी गतिविधियों में इस्तेमाल करना था। सरकार का कहना है कि यह नेटवर्क भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था, आंतरिक सुरक्षा और सामाजिक सद्भाव को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहा था। इसके लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म पर नफरत फैलाने वाली सामग्री का भी इस्तेमाल किया जाता था।

14 राज्यों में फैला था नेटवर्क

अगस्त 2026 में सुरक्षा एजेंसियों ने शहजाद भट्टी नेटवर्क के खिलाफ कई राज्यों में एक साथ कार्रवाई की थी। सरकारी जानकारी के मुताबिक, 14 राज्यों में कुल 253 लोगों को हिरासत में लिया गया था। इनमें उत्तर प्रदेश से 62, हरियाणा से 52, दिल्ली से 51, पंजाब से 44, राजस्थान से 15, महाराष्ट्र से 8 और उत्तराखंड से 5 लोग शामिल थे। कर्नाटक, गुजरात और बिहार में 3-3, जबकि तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और केरल में 2-2 लोगों को हिरासत में लिया गया था। इस कार्रवाई के दौरान 80 से अधिक एफआईआर और 200 से ज्यादा गिरफ्तारियां दर्ज होने की जानकारी दी गई थी।जांच के दौरान आईईडी, पाकिस्तान ऑर्डनेंस फैक्ट्री के निशान वाले ग्रेनेड, पिस्तौल, जिंदा कारतूस और निगरानी के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले सीसीटीवी उपकरण बरामद किए जाने की बात सामने आई थी। एजेंसियां इन बरामदगी को नेटवर्क के कथित सीमा पार संपर्कों से जोड़कर जांच कर रही हैं।

Shahzad Bhatti Network: युवाओं को जाल में फंसा रहा था भट्टी नेटवर्क
युवाओं को जाल में फंसा रहा था भट्टी नेटवर्क
Shahzad Bhatti Network: सोशल मीडिया के जरिए युवाओं तक पहुंच

जांच एजेंसियों के मुताबिक, शहजाद भट्टी नेटवर्क का एक अहम तरीका इंटरनेट और सोशल मीडिया के जरिए युवाओं से संपर्क करना था। रिपोर्टों के अनुसार, ऐसे युवाओं को आसान पैसा, अपराध की दुनिया में पहचान, हथियार और विदेश जाने जैसे लालच देकर प्रभावित करने की कोशिश की जाती थी। इसके बाद उन्हें धीरे-धीरे नेटवर्क से जुड़े अलग-अलग काम सौंपे जाने का आरोप है।इस नेटवर्क में ऐसे स्थानीय युवाओं और अपराधियों को भी निशाना बनाने की बात सामने आई है, जिनका पहले कोई आतंकी रिकॉर्ड नहीं था। जांच के मुताबिक, इन लोगों से रेकी, संवेदनशील स्थानों की जानकारी जुटाने, हथियार पहुंचाने और दूसरे काम कराए जाते थे। सुरक्षा एजेंसियों के लिए ऐसे मॉड्यूल की पहचान करना चुनौतीपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इसमें शामिल व्यक्ति सामान्य पृष्ठभूमि का दिखाई दे सकता है।

पाकिस्तान में मौजूद अपराधियों के नाम का इस्तेमाल

जांच के मुताबिक, शहजाद भट्टी के अलावा पाकिस्तान में मौजूद कुछ अन्य अपराधियों के नाम और प्रभाव का इस्तेमाल भी युवाओं को प्रभावित करने के लिए किया जाता था। ऑनलाइन माध्यमों से संपर्क के बाद युवाओं को आर्थिक लाभ और अपराध की दुनिया में आगे बढ़ने का लालच दिए जाने का आरोप है।सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, इस तरह की व्यवस्था को हाइब्रिड या प्रॉक्सी तरीके से होने वाली गतिविधियों से जोड़कर देखा जा रहा है। इसमें पारंपरिक आतंकी संगठनों के प्रशिक्षित कैडर के बजाय स्थानीय अपराधियों और ऐसे युवाओं का इस्तेमाल किया जाता है, जिनका पहले कोई आतंकी रिकॉर्ड नहीं होता। जांच में ऐसे लोगों से रेकी, हथियारों की आवाजाही और हमलों से जुड़े काम कराने के आरोप सामने आए हैं।

Shahzad Bhatti Network: इंटरनेट मीडिया बना बड़ा माध्यम

शहजाद भट्टी नेटवर्क से जुड़े मामलों में इंटरनेट मीडिया और एन्क्रिप्टेड ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल की भी जांच की जा रही है। आरोप है कि पहले युवाओं से ऑनलाइन संपर्क बनाया जाता था और उसके बाद उन्हें आर्थिक लाभ तथा अपराध से जुड़ी गतिविधियों का लालच दिया जाता था।सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, नेटवर्क से जुड़े कई लोगों का पहले कोई आतंकी रिकॉर्ड नहीं था। इसी वजह से जांच एजेंसियां सोशल मीडिया पर चलने वाले ऐसे नेटवर्क, स्थानीय अपराधियों और सीमा पार से संचालित अपराध-आतंक के कथित गठजोड़ पर नजर रख रही हैं।

UAPA के तहत आतंकी संगठन घोषित करने का क्या असर होगा?

केंद्र सरकार ने UAPA की धारा 35(1)(a) के तहत शहजाद भट्टी नेटवर्क को कानून की पहली अनुसूची में शामिल किया है। इस अनुसूची में घोषित आतंकवादी संगठनों के नाम दर्ज होते हैं। इसके बाद संगठन के खिलाफ कानूनी और वित्तीय कार्रवाई के लिए UAPA का ढांचा लागू हो जाता है।

संगठन से जुड़ी गतिविधियों पर कार्रवाई: UAPA के तहत आतंकवादी संगठन से जुड़ने, उसके लिए समर्थन जुटाने, भर्ती करने या उसकी गतिविधियों को बढ़ावा देने से संबंधित कृत्यों पर कठोर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

जमानत के कड़े प्रावधान: UAPA में जमानत से जुड़े प्रावधान सामान्य आपराधिक कानूनों की तुलना में अधिक सख्त हैं। अदालत को यह देखना होता है कि आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया सही प्रतीत होते हैं या नहीं।

जांच के लिए अधिक समय: UAPA के मामलों में जांच पूरी कर आरोपपत्र दाखिल करने की अवधि विशेष परिस्थितियों में 180 दिनों तक बढ़ाई जा सकती है। यह प्रावधान सामान्य मामलों की तुलना में जांच एजेंसियों को अधिक समय देता है।

केंद्रीय एजेंसियों की भूमिका: कई राज्यों में फैले नेटवर्क के मामलों में केंद्रीय और राज्य जांच एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाया जा सकता है। मामले की प्रकृति के अनुसार केंद्रीय एजेंसी जांच अपने हाथ में भी ले सकती है।

संपत्ति और वित्तीय नेटवर्क पर कार्रवाई: एजेंसियां नेटवर्क से जुड़े संदिग्ध वित्तीय लेनदेन, बैंक खातों और संपत्तियों की जांच कर सकती हैं। कानून के तहत आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद संपत्ति को जब्त या फ्रीज करने की कार्रवाई भी की जा सकती है।

नार्को-टेरर नेटवर्क की जांच: सरकार के अनुसार, इस नेटवर्क पर सीमा पार से नशीले पदार्थों, हथियारों और विस्फोटकों की तस्करी से जुड़े होने के आरोप हैं। आतंकी संगठन के रूप में सूचीबद्ध होने के बाद एजेंसियों के लिए इसके कथित वित्तीय और तस्करी नेटवर्क की जांच का कानूनी ढांचा और मजबूत हो जाता है।

डिजिटल प्रचार पर कार्रवाई: नेटवर्क पर डिजिटल माध्यमों के जरिए नफरत फैलाने और युवाओं को प्रभावित करने के आरोप हैं। ऐसे मामलों में जांच एजेंसियां संबंधित डिजिटल सामग्री, ऑनलाइन खातों और संचार माध्यमों की जांच कर सकती हैं तथा कानून के तहत आवश्यक कार्रवाई कर सकती हैं।

Shahzad Bhatti Network: अब एक ही कानूनी ढांचे में होगी कार्रवाई

कुल मिलाकर, गृह मंत्रालय की 16 सितंबर 2026 की अधिसूचना के बाद शहजाद भट्टी नेटवर्क को UAPA की पहली अनुसूची में शामिल आतंकवादी संगठन का दर्जा मिल गया है। इससे नेटवर्क से जुड़े मामलों में केंद्रीय और राज्य एजेंसियों को आतंकवाद विरोधी कानून के तहत कार्रवाई करने का स्पष्ट कानूनी आधार मिला है। सरकार का कहना है कि इस कार्रवाई का उद्देश्य सीमा पार से चलने वाली हथियार और नशीले पदार्थों की तस्करी, युवाओं की कथित भर्ती और डिजिटल माध्यमों से कट्टरपंथ फैलाने वाली गतिविधियों पर रोक लगाना है।