TATA CEO: टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन एक बार फिर कंपनी की कमान संभालेंगे। टाटा संस के बोर्ड ने 17 सितंबर 2026 को उन्हें एग्जीक्यूटिव चेयरमैन के तौर पर पांच साल के नए कार्यकाल के लिए दोबारा नियुक्त करने को मंजूरी दे दी। उनका मौजूदा कार्यकाल 20 फरवरी 2027 को खत्म होना था। खास बात यह है कि करीब एक महीने पहले चंद्रशेखरन ने खुद तीसरा कार्यकाल नहीं लेने की बात कही थी।
कौन हैं एन. चंद्रशेखरन?
एन. चंद्रशेखरन यानी नटराजन चंद्रशेखरन का जन्म 1963 में तमिलनाडु में हुआ। उन्होंने एप्लाइड साइंस में स्नातक और कंप्यूटर एप्लिकेशन में मास्टर्स किया है। उनका टाटा ग्रुप से जुड़ाव 1987 में टीसीएस से शुरू हुआ। वह 2009 में टीसीएस के सीईओ और एमडी बने और 2017 तक इस पद पर रहे। इसके बाद 21 फरवरी 2017 को उन्होंने टाटा संस के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन का पद संभाला।
TATA CEO: टाटा ग्रुप में क्या रही भूमिका?
चंद्रशेखरन के नेतृत्व में टाटा ग्रुप ने ‘वन टाटा’ रणनीति पर जोर दिया, जिसमें कारोबार को सरल बनाने, बड़े स्तर पर विस्तार और अलग-अलग कंपनियों के बीच तालमेल बढ़ाने पर फोकस रहा। उनके कार्यकाल में ग्रुप ने सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, डिजिटल कारोबार और बैटरी निर्माण जैसे नए क्षेत्रों में विस्तार किया। एयर इंडिया के अधिग्रहण के बाद ग्रुप की विमानन क्षेत्र में भी मौजूदगी बढ़ी।
पहले पद छोड़ने का फैसला क्यों बदला?
12 अगस्त 2026 को चंद्रशेखरन ने बोर्ड को बताया था कि मौजूदा कार्यकाल पूरा होने के बाद वह दोबारा चेयरमैन पद के लिए अपना नाम पेश नहीं करेंगे। इसके बाद टाटा संस में उत्तराधिकारी तलाशने की चर्चा शुरू हुई। लेकिन 3 सितंबर को बोर्ड की नॉमिनेशन एंड रिम्यूनरेशन कमेटी ने उनके योगदान और ग्रुप के व्यापक हितों को देखते हुए उनसे अपना फैसला बदलने का अनुरोध किया। 17 सितंबर की बैठक में उन्होंने बोर्ड के अनुरोध पर अपने फैसले पर पुनर्विचार किया और बोर्ड ने बहुमत से पांच साल के नए कार्यकाल को मंजूरी दे दी।
TATA CEO: अब एक्सटेंशन क्यों अहम है?
चंद्रशेखरन की नई पारी ऐसे समय शुरू होगी जब टाटा संस के सामने बड़ा कॉरपोरेट और नियामकीय बदलाव है। भारतीय रिजर्व बैंक ने हाल ही में टाटा संस की संबंधित पंजीकरण व्यवस्था से बाहर निकलने की कोशिश को मंजूरी नहीं दी। इसके बाद कंपनी के लिए शेयर बाजार में लिस्टिंग की दिशा में आगे बढ़ने की जरूरत बढ़ गई है। 17 सितंबर की बैठक में बोर्ड ने लिस्टिंग से जुड़े कदम उठाने का भी फैसला किया। ऐसे में अगले पांच साल चंद्रशेखरन के नेतृत्व में टाटा संस के लिए महत्वपूर्ण बदलावों का दौर हो सकता है।
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